इंदौर/भोपाल। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी से हुई 15 मौतों के मामले में मोहन सरकार ने नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को हटा दिया है। एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को भी सस्पेंड कर दिया गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इससे पहले शुक्रवार दोपहर को नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव और एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। एडिशनल कमिश्नर सिसोनिया का ट्रांसफर कर दिया गया था, और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से जल वितरण विभाग का चार्ज वापस ले लिया गया था।
इसके साथ ही इंदौर नगर निगम में तीन नए अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। खरगोन जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश सिंह, अलीराजपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर सिंह और इंदौर के डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर आशीष कुमार पाठक को निगम में एडिशनल कमिश्नर के पद पर नियुक्त किया गया है।
सरकार ने हाई कोर्ट को बताया सिर्फ 4 मौतें हुईं
शुक्रवार को सरकार ने हाई कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि इंदौर में दूषित पानी से सिर्फ 4 मौतें हुई हैं। सरकार की यह रिपोर्ट तब आई है जब मृतकों के परिवारों और अस्पतालों से 15 मौतों की जानकारी पहले ही सामने आ चुकी थी। अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी। 1 जनवरी को हाई कोर्ट ने सरकार से स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा था। सरकार ने 5 दिन बाद सिर्फ 4 मौतों की बात मानी। 39 पेज की स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया कि सभी मृतक 60 साल से ज़्यादा उम्र के थे। उर्मिला की मौत 28 दिसंबर को, तारा (60) और नंदा (70) की 30 दिसंबर को और हीरालाल (65) की 31 दिसंबर को हुई। अस्पतालों और स्थानीय लोगों का कहना है कि 15 लोगों की मौत हुई है।
इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि गुरुवार को MGM मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट आई। इसमें बताया गया कि पानी पीने लायक नहीं है। सैंपल में फेकल कोलीफॉर्म, ई. कोलाई, विब्रियो और प्रोटोजोआ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए। सूत्रों के अनुसार, पानी में विब्रियो कोलेरी, जिससे हैजा होता है, भी पाया गया था, लेकिन सरकारी मशीनरी अभी भी इसे शुरुआती रिपोर्ट बताकर खारिज कर रही है।
नगर निगम ने भी करीब 80 सैंपल अपनी लैब में भेजे थे। टेस्ट रिपोर्ट में इन सैंपल को “असंतोषजनक” बताया गया। भागीरथपुरा से लिए गए पानी का सैंपल पीने और दूसरे घरेलू इस्तेमाल के लिए unsuitable पाया गया। हालांकि, दोनों में से कोई भी रिपोर्ट पब्लिक नहीं की गई है। अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मेन पीने के पानी की सप्लाई पाइपलाइन में एक लीक मिला। उस जगह के ऊपर एक टॉयलेट है। उन्होंने कहा कि इस लीक की वजह से इलाके में पानी की सप्लाई दूषित हो गई।
तब गाली-गलौज की थी, अब मंत्री सिर झुकाकर चले गए
कैलाश विजयवर्गीय शुक्रवार शाम को भागीरथपुरा के प्राइमरी हेल्थ सेंटर पहुंचे। वह वहां करीब 10 मिनट रुके। उन्होंने जोनल इंचार्ज डॉ. रूपाली जोशी से मरीजों की हालत के बारे में बात की। उन्होंने इलाके में पानी की सप्लाई के बारे में भी बात की। बाहर आने के बाद उन्हें अपनी कार तक पहुंचने में 5 मिनट लगे। इस दौरान मीडिया वालों ने रास्ते में 50 से ज्यादा सवाल पूछे, लेकिन उन्होंने कोई रिएक्शन नहीं दिया। उन्होंने सिर्फ एक बार कहा, “मैं कल एक ऑफिशियल प्रेस कॉन्फ्रेंस में आपको सब कुछ बताऊंगा।”
राहुल ने कहा—पानी की जगह जहर बांटा गया
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, “इंदौर में पानी की जगह ज़हर बांटा गया, और प्रशासन गहरी नींद में सोता रहा। लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की। फिर भी, कार्रवाई क्यों नहीं हुई? ज़िम्मेदार अधिकारियों और नेताओं के खिलाफ कार्रवाई कब होगी? ये ‘फ्री’ सवाल नहीं हैं, ये जवाबदेही की मांगें हैं।” कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “मोदी जी हमेशा मौतों पर चुप रहते हैं।”
उमा ने कहा—मोहनजी के लिए कड़ी परीक्षा
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी इस घटना पर नाराजगी जताते हुए अपनी पार्टी की सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अपने सोशल पर उन्होंने लिखा- साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारे प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं। प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवॉर्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी कितनी जिंदगियों को निगल गया और निगलता जा रहा है, मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। उमा ने नाराजगी जताते हुए लिखा-जिंदगी की कीमत दो लाख रुपए नहीं होती, क्योंकि उनके परिजन जीवन भर दु:ख में डूबे रहते हैं। पीडि़तों से माफी मांगना होगी। नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी अपराधी हैं, उन्हें अधिकतम दंड देना होगा। यह मोहन यादव जी की परीक्षा की घड़ी है। उन्होंने नसीहत भरे अंदाज में कहा कि इस मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी नहीं चली। आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोडक़र जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे? ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता, या तो प्रायश्चित या दंड।
सीएम ने कहा—लापरवाही बर्दाश्त नहीं
सीएम मोहन यादव ने कहा, इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण हुई घटना में राज्य सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। इस संबंध में सख्त फैसले लिए जा रहे हैं। नगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया और पीएचई के प्रभारी अधीक्षण अभियंता संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। इंदौर नगर आयुक्त दिलीप कुमार यादव को हटाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
