भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) सेंट्रल जोन की भोपाल बेंच ने राजधानी भोपाल और इंदौर समेत 8 शहरों में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई है। इसने सरकार से 8 हफ्तों के अंदर रिपोर्ट जमा करने को कहा है। NGT ने माना कि भोपाल में हवा की क्वालिटी तय स्टैंडर्ड से कहीं ज़्यादा खराब है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!NGT ने यह आदेश बुधवार को याचिकाकर्ता राशिद नूर खान की याचिका पर दिया। याचिकाकर्ता की तरफ से एडवोकेट हर्षवर्धन तिवारी ने पैरवी की। अपने आदेश में NGT ने कहा कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, देवास, सागर और सिंगरौली को सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने ‘नॉन-अटेनमेंट सिटीज़’ घोषित किया है क्योंकि इन शहरों में PM₁₀ और PM₂.₅ का लेवल पिछले पाँच सालों से लगातार नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड से ज़्यादा रहा है। भोपाल में PM₁₀ का सालाना औसत लेवल 130 से 190 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और PM₂.₅ का 80 से 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पाया गया है, जो तय सीमा से कई गुना ज़्यादा है।
अब लगातार स्मॉग का सामना कर रहा है झीलों का शहर भोपाल
NGT ने अपने आदेश में यह भी कहा कि भोपाल, जिसे ‘झीलों का शहर’ कहा जाता है, अब सर्दियों के महीनों में लगातार स्मॉग, कम विज़िबिलिटी और ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ कैटेगरी के AQI का सामना कर रहा है। रियल-टाइम डेटा के अनुसार, कई रातों को AQI 300 से ऊपर रिकॉर्ड किया गया। आदेश में साफ किया गया कि यह प्रदूषण किसी एक कारण से नहीं है, बल्कि पराली जलाने, कंस्ट्रक्शन और तोड़फोड़ की गतिविधियों से निकलने वाली धूल, गाड़ियों से निकलने वाले धुएं, कचरा जलाने, लैंडफिल में आग लगने, पटाखों के इस्तेमाल और इंडस्ट्रियल गतिविधियों के मिले-जुले असर का नतीजा है।
MP में कोई प्रभावी सिस्टम नहीं बनाया गया
NGT ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली-NCR के लिए अपनाए गए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) और एयर-शेड आधारित पॉलिसी के बावजूद मध्य प्रदेश ने अभी तक ऐसा कोई प्रभावी राज्य-स्तरीय सिस्टम लागू नहीं किया है। इससे वायु प्रदूषण की समस्या और भी गंभीर हो रही है।
एनजीटी ने बनाई कमेटी, इन्हें किया शामिल
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए हैं। इसने एक जॉइंट कमेटी भी बनाई है। इस कमेटी में पर्यावरण विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, EPCO के एक प्रतिनिधि, शहरी प्रशासन विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, परिवहन विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक सदस्य और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के पूर्व एडिशनल डायरेक्टर डॉ. रवि प्रकाश मिश्रा समेत कई लोग शामिल हैं।
उठाए गए कदमों पर मांगी डिटेल रिपोर्ट
कमेटी को स्थिति का जायजा लेने और छह हफ़्तों के अंदर तथ्यों और उठाए गए कदमों पर एक डिटेल्ड रिपोर्ट जमा करने को कहा गया है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।
