नई दिल्ली। जरा उस दुनिया की कल्पना कीजिए, जहां हमारे जैसी ही कोई दूसरी सभ्यता या शायद इंसान भी मौजूद हों। कार्ल सागन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों की नई रिसर्च ने अब इस कल्पना को हकीकत के और करीब ला दिया है। क्या इस विशाल ब्रह्मांड में हम अकेले हैं, या कहीं और भी जीवन मौजूद है? इस पुराने सवाल का जवाब शायद जल्द ही हमारी पहुंच में होगा। एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के कार्ल सागन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने 45 ऐसे ग्रहों की पहचान की है, जहां एलियंस के होने की एक पक्की संभावना मानी जा रही है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!‘हैबिटेबल जोन’ में छिपे राज
वैज्ञानिकों ने लगभग 6,000 ज्ञात एक्सोप्लैनेट यानी हमारे सौर मंडल के बाहर मौजूद ग्रहों पर रिसर्च की। इनमें से 45 ग्रह अपने ‘होस्ट स्टार’ (जिस तारे के वे चक्कर लगाते हैं) के ‘हैबिटेबल जोन’ में पाए गए। इसका मतलब है कि ये ग्रह अपने तारे के हिसाब से न तो बहुत ज्यादा गर्म हैं और न ही बहुत ज्यादा ठंडे। इन स्थितियों में, उनकी सतह पर तरल पानी जो जीवन के लिए सबसे जरूरी तत्वों में से एक है, के मौजूद होने की संभावना काफी ज्यादा होती है।
हमारे आसपास ही मौजूद चार खास ग्रह
इस रिसर्च का सबसे खास पहलू यह है कि इनमें से चार ग्रह TRAPPIST-1 d, e, f, और g पृथ्वी से सिर्फ 40 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर मौजूद हैं। हालांकि मौजूदा टेक्नोलॉजी के हिसाब से वहां पहुंचने में लाखों साल लग सकते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य की टेक्नोलॉजी—जैसे ‘न्यूक्लियर पल्स प्रोपल्शन’—की मदद से इस दूरी को कुछ ही सदियों में तय किया जा सकता है।
पूरी दुनिया की नजरें इन ग्रहों पर टिकीं
प्रोफेसर लिसा काल्टेनेगर के मुताबिक, यह रिसर्च हमें ठीक-ठीक बताती है कि जीवन की खोज में हमें अपनी दूरबीनों का रुख किस तरफ करना चाहिए। उनका सुझाव है कि हमारा मुख्य ध्यान इन ग्रहों पर होना चाहिए।
Proxima Centauri b: हमारे सबसे करीबी ग्रहों में से एक।
TOI-715 b: हाल ही में खोजा गया एक रहस्यमयी ग्रह। Kepler-186f और Wolf 1069 b: जहाँ पृथ्वी जैसी रोशनी और वातावरण मिलने की उम्मीद है।
इनकी जांच कैसे की जाएगी?
आने वाले सालों में जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप और 2027 में लॉन्च होने वाले नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप के साथ मिलकर इन ग्रहों के वायुमंडल का विश्लेषण कर पाएगा। इनकी मदद से, वैज्ञानिक यह पता लगा पाएंगे कि क्या वहाँ ऑक्सीजन या मीथेन जैसी गैसें मौजूद हैं, ये ऐसे पदार्थ हैं जो जीवन के अस्तित्व का सबूत माने जाते हैं।
हमारे अपने सौर मंडल में भी उम्मीद अभी बाकी
सिर्फ दूर के एक्सोप्लैनेट ही उम्मीद नहीं जगाते। वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि एलियंस शायद हमारे अपने सौर मंडल में ही मौजूद हो सकते हैं, खास तौर पर शनि के चंद्रमाओं, एन्सेलाडस और टाइटन पर। एन्सेलाडस के दक्षिणी ध्रुव से फूटते पानी के फव्वारे इस बात का पक्का संकेत देते हैं कि इसकी बर्फीली सतह के नीचे शायद महासागर और मुमकिन है कि जीवन भी मौजूद हो।
एलियंस के बारे में
एलियंस (परग्रही जीवन) का तात्पर्य पृथ्वी के बाहर किसी अन्य ग्रह या अंतरिक्ष में संभावित जीवन से है, जो सूक्ष्मजीवों से लेकर विकसित सभ्यताओं तक हो सकते हैं। 86% से अधिक एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट मानते हैं कि ब्रह्मांड के विशाल आकार के कारण एलियन जीवन की संभावना लगभग निश्चित है। वैज्ञानिक मंगल, शुक्र और बृहस्पति के चंद्रमाओं (यूरोपा, एनसेलेडस) पर जीवन के संकेत खोज रहे हैं।
अस्तित्व की संभावना: वैज्ञानिक ब्रह्मांड के विशाल आकार को देखते हुए एलियन जीवन को मुमकिन मानते हैं।
वैज्ञानिक दावे और खोज: प्रोफेसर एबी लोयब जैसे वैज्ञानिकों ने ‘3I/ATLAS’ जैसी रहस्यमयी अंतरिक्ष वस्तुओं को एलियन तकनीक होने का दावा किया है, हालांकि अधिकांश वैज्ञानिक इसे धूमकेतु मानते हैं।
जीवन का रूप: एलियंस बैक्टीरिया जैसे सरल जीव हो सकते हैं, या फिर इंसानों से कहीं अधिक उन्नत और शक्तिशाली सभ्यता।
संपर्क न होने के कारण: वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड की विशालता और समय की कमी (सीमित जीवनकाल) के कारण एलियंस हमसे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।
सोलर सिस्टम में खोज: नासा और अन्य एजेंसियां सौर मंडल में मंगल, शुक्र और शनि के चंद्रमाओं पर जीवन की खोज कर रही हैं।
