नई दिल्ली। भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे ने एक चैनल से खास बातचीत में कई अहम खुलासे किए। पूर्व सेना प्रमुख नरवणे ने एक किताब लिखी है जो अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। इस किताब को लेकर काफी विवाद खड़ा हो गया है, और ऐसी खबरें हैं कि सरकार ने इसके प्रकाशन पर रोक लगा दी है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इस मुद्दे पर खुलकर बात करते हुए, जनरल नरवणे ने LAC—यानी भारत-चीन सीमा—पर हुई घटनाओं पर रोशनी डाली। उन्होंने विस्तार से बताया कि सरकार ने सेना को क्या आदेश दिए थे, और यह भी साफ किया कि क्या भारत ने चीन को अपनी कोई जमीन सौंपी थी।
रिटायरमेंट के बाद, जनरल नरवणे ने अपनी यादों पर आधारित एक संस्मरण (memoir) लिखा। यह किताब उनके निजी अनुभवों और नजरिए पर आधारित है। हालांकि, यह अभी तक बाज़ार में नहीं आई है। इस देरी के चलते विपक्ष ने आरोप लगाया है कि या तो सरकार ने किताब की रिलीज़ रोक दी है, या फिर इसमें ऐसी सामग्री है जिसे सार्वजनिक रूप से जाहिर करना ठीक नहीं माना गया है।
किताब के बारे में जनरल नरवणे ने क्या कहा?
जनरल नरवणे ने साफ किया कि यह किताब पूरी तरह से उनका निजी नजरिया पेश करती है। उन्होंने कहा कि संस्मरण लिखते समय उन्होंने किसी भी गोपनीय या सरकारी दस्तावेज की मदद नहीं ली। दूसरे शब्दों में, यह किताब पूरी तरह से उनकी अपनी यादों और विचारों पर आधारित है। उन्होंने आगे बताया कि उनके प्रकाशक सरकार के संपर्क में हैं, और किताब के प्रकाशन को लेकर बातचीत अभी चल रही है।
LAC को लेकर सेना को क्या आदेश मिले थे?
जनरल नरवणे ने बताया कि सरकार ने सेना पर पूरा भरोसा जताया था। उन्होंने याद करते हुए बताया कि सरकार की तरफ से सेना को यह निर्देश दिया गया था, “जो आपको सही लगे, वो करें।” इसका मतलब यह है कि सरकार ने LAC पर चीन से जुड़ी स्थिति को संभालने के लिए सेना को पूरी तरह से काम करने की आज़ादी (operational autonomy) दी थी। सरकार और सेना के बीच बहुत ही करीबी और असरदार तालमेल था।
क्या भारत ने चीन को अपनी कोई जमीन सौंपी?
कई लोगों ने यह दावा किया है कि भारत ने LAC के साथ अपनी ज़मीन का कुछ हिस्सा चीन को सौंप दिया है। जनरल नरवणे ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि भारत ने अपनी ज़मीन का एक इंच भी नहीं छोड़ा। उनके मुताबिक, भारत ने LAC पर स्थिति को सफलतापूर्वक अपने नियंत्रण में बनाए रखा।
चीन ने क्या कदम उठाए?
जनरल नरवणे ने कहा कि पूरी दुनिया ने देखा कि चीन ने अपनी बनाई हुई चौकियां हटा दीं और पीछे हट गया। दूसरे शब्दों में, उनका कहना है कि आखिरकार चीन को ही पीछे हटना पड़ा, जबकि भारत की स्थिति मज़बूत बनी रही।
सेना और राजनीति के बारे में उन्होंने क्या कहा?
जनरल नरवणे ने जोर देकर कहा कि सेना से जुड़े मामलों में राजनीति का दखल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना पूरी तरह से राजनीति से दूर रहती है—और ऐसा ही होना भी चाहिए। पड़ोसी देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जहां उन देशों में सेना राजनीति में दखल देती है, वहीं भारत में ऐसा नहीं है।
पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की किताब
भारत के पूर्व सेना प्रमुख (Chief of the Army Staff) जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (रिटायर्ड) की कई किताबें चर्चा में रही हैं, जिनमें सबसे हालिया रिलीज़ इसी हफ्ते हुई है।
- नई किताब: ‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड’ (2026)
जनरल नरवणे ने 22 अप्रैल 2026 को अपनी नई नॉन-फिक्शन किताब लॉन्च की है।
पूरा नाम: The Curious and the Classified: Unearthing Military Myths and Mysteries।
विषय: यह किताब भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़े अनछुए पहलुओं, दिलचस्प कहानियों और सैन्य परंपराओं पर आधारित है।
प्रेरणा: जनरल नरवणे के अनुसार, उन्हें यह किताब लिखने का विचार कांग्रेस सांसद शशि थरूर की किताब ‘ए वंडरलैंड ऑफ वर्ड्स’ से मिला।
- विवादित संस्मरण: ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (अप्रकाशित)
यह उनकी आत्मकथा (Memoir) है, जिसे लेकर फरवरी 2026 में संसद में काफी विवाद हुआ था।
स्थिति: यह किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है।
विवाद का कारण: इसके कुछ अंश (Excerpts) लीक हो गए थे, जिनमें 2020 के गलवान संघर्ष और अग्निवीर योजना जैसे संवेदनशील मुद्दों का जिक्र था।
रुकावट: रक्षा मंत्रालय (MoD) द्वारा इसकी समीक्षा (Review) की जा रही है। आधिकारिक मंजूरी न मिलने के कारण पेंग्विन रैंडम हाउस ने इसके प्रकाशन को रोक रखा है।
- अन्य पुस्तकें
The Cantonment Conspiracy (2025): यह एक सैन्य थ्रिलर (Fiction) उपन्यास है, जिसमें सैन्य छावनी में होने वाली एक मर्डर मिस्ट्री की कहानी है।
पुस्तक का नाम प्रकार स्थिति
The Curious and the Classified नॉन-फिक्शन (तथ्य/कहानियाँ) रिलीज़ हो चुकी है (अप्रैल 2026)
The Cantonment Conspiracy फिक्शन (उपन्यास) प्रकाशित (2025)
Four Stars of Destiny आत्मकथा होल्ड पर है (समीक्षा के अधीन)
जनरल नरवणे ने हाल ही में कहा है कि अब उनका झुकाव मुख्य रूप से फिक्शन (काल्पनिक कहानियां) लिखने की ओर है।
