नई दिल्ली। कोलन कैंसर के इलाज में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। वैज्ञानिकों को एक क्लिनिकल ट्रायल में पेंब्रोलिजुमैब नामक इम्यूनोथेरेपी दवा ने सर्जरी से पहले दिए जाने पर शानदार परिणाम दिखाए हैं। इस ट्रायल में शामिल एमएमआर—डिफिशिएंट (एक विशिष्ट आनुवंशिक मार्कर) वाले मरीज 3 साल बाद भी कैंसर-मुक्त पाए गए और कई मामलों में सर्जरी से पहले ही ट्यूमर पूरी तरह से “पिघल” (गायब) गया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रिसर्च में सामने आई मुख्य बातें
इम्यूनोथेरेपी का जादू: सर्जरी से पहले सिर्फ 9 सप्ताह तक इम्यूनोथेरेपी देने से 100 फीसदी मरीजों में 3 साल तक कैंसर वापस नहीं आया।
सर्जरी से पहले ट्यूमर गायब: परीक्षण में शामिल 59 फीसदी मरीजों में इम्यूनोथेरेपी के बाद कोई कैंसर कोशिकाएं नहीं पाई गईं।
पारंपरिक उपचार से बेहतर: यह तरीका पारंपरिक सर्जरी और कीमोथेरेपी की तुलना में अधिक प्रभावी और कम हानिकारक विकल्प साबित हो रहा है, क्योंकि पारंपरिक उपचार में कैंसर के वापस आने की दर लगभग 25 फीसदी होती है।
भविष्य की उम्मीद: यह तकनीक विशेष रूप से उन 10-15 फीसदी आनुवंशिक रूप से चिह्नित बोवेल कैंसर के रोगियों के लिए एक नया ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ बन सकती है। यह उपचार उन रोगियों पर विशेष रूप से सफल रहा है, जिनमें एमएमआर—डिफिशिएंट (मिसमैच रिपेयर डेफिसिएंट) आनुवंशिक प्रोफाइल पाई जाती है।
