भोपाल। मध्य प्रदेश में करीब 21 साल 9 महीने बाद सार्वजनिक यात्री बस सेवा नए मॉडल के साथ फिर शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ 25 सितंबर 2026 को भोपाल के बीएचईएल दशहरा मैदान में होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बसों को हरी झंडी दिखाएंगे।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!पहले चरण में 351 बसें सड़क पर उतरेंगी। इनमें 120 इंटरसिटी और 231 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं। इंटरसिटी बसें दो या अधिक शहरों को जोड़ेंगी, जबकि इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा देंगी। योजना के शुरुआती चरण में करीब 1,500 बसों का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सात शहरों से होगी शुरुआत
पहले चरण में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को शामिल किया गया है।
इंदौर: 145 बसें
भोपाल: 106 बसें
जबलपुर: 67 बसें
रीवा: 18 बसें
देवास: 10 बसें
कटनी: 3 बसें
भिंड: 2 बसें
महानगरों में इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसें
इंदौर में 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी बसें, भोपाल में 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी बसें तथा जबलपुर में 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी बसें प्रस्तावित हैं। रीवा, देवास, कटनी और भिंड में शुरुआती चरण में इंटरसिटी सेवा शुरू होगी।
बसों में CCTV, GPS और पैनिक बटन
नई परिवहन व्यवस्था को तकनीक से जोड़ा गया है। बसों में रियल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग, CCTV कैमरे और पैनिक बटन की व्यवस्था की जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार बसों में सात CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। इससे यात्रियों की सुरक्षा के साथ बसों के संचालन पर भी नजर रखी जा सकेगी।
बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के जरिए होगी। कमांड-कंट्रोल सेंटर से बसों की लोकेशन, संचालन और समयबद्धता की रियल-टाइम निगरानी की जाएगी। यात्रियों के लिए पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम और शिकायत निवारण व्यवस्था भी विकसित की जा रही है।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर फोकस
नई बस सेवा में महिला और बाल सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। पैनिक बटन और CCTV जैसी सुविधाओं के अलावा बस संचालन से जुड़े कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है।
2031 तक 15 हजार से ज्यादा बसों का लक्ष्य
सरकार ने इस सेवा को चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में विस्तार देने की योजना बनाई है। 2031 तक 15 हजार से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़ने की योजना है। सरकार के अनुसार इससे प्रतिदिन 30 लाख से अधिक यात्रियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
180 से ज्यादा बस स्टैंड और डिपो का कायाकल्प
योजना केवल बसों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। प्रदेश में 180 से अधिक बस स्टैंड, टर्मिनल और डिपो के कायाकल्प की योजना भी है। इसके जरिए बस संचालन के साथ यात्रियों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने पर जोर दिया जाएगा।
इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ईंधन वाली बसों पर जोर
सरकार सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों और स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण को कम करना है। आने वाले चरणों में पर्यावरण-अनुकूल बसों की संख्या बढ़ाने पर जोर रहेगा।
निजी ऑपरेटरों की भी होगी भागीदारी
नई व्यवस्था में निजी बस ऑपरेटरों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्टों के अनुसार बस संचालन को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल से आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार का फोकस बस नेटवर्क, निगरानी, यात्री सुविधाओं और परिवहन ढांचे को मजबूत करने पर रहेगा।
रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ने की उम्मीद
सरकार का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन के विस्तार से बस संचालन के अलावा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, वाहन निर्माण और तकनीकी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ेंगी। इससे परिवहन क्षेत्र में रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
क्या बदलेगा?
करीब दो दशक बाद शुरू हो रही मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में शहरों के भीतर और शहरों के बीच दोनों तरह की कनेक्टिविटी पर जोर है। पहले चरण में सात शहरों से शुरुआत होगी और इसके बाद नेटवर्क को प्रदेश के अन्य शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार देने की योजना है।
25 सितंबर से शुरू होने वाली यह सेवा मध्य प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नए तकनीकी और संचालन मॉडल के साथ विस्तार देने की सरकार की बड़ी पहल है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को मध्य प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक नई पहल के तौर पर पेश किया जा रहा है।
