भोपाल। एक के बाद एक बयान देकर चर्चा में आए आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। प्रदेश सरकार ने IAS अधिकारी और अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (AJAKS) के अध्यक्ष संतोष वर्मा के खिलाफ कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!आईएएस वर्मा ने ब्राह्मण बेटियों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया था और हाई कोर्ट पर SC-ST उम्मीदवारों को सिविल जज बनने से रोकने का आरोप लगाया था।
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि 23 नवंबर, 2025 को AJAKS के प्रांतीय सम्मेलन में वर्मा के बयान ने राज्य में सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा कर दी है और पूरे राज्य में विवाद खड़ा कर दिया है।
विभिन्न सामाजिक संगठनों, कर्मचारी यूनियनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा सरकार को कई ज्ञापन सौंपे गए हैं, जिसमें वर्मा के आचरण पर ऑल इंडिया सर्विस कंडक्ट रूल्स का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि यह प्रस्ताव 2012 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी संतोष कुमार वर्मा को IAS पद से हटाने और उनका IAS अवार्ड वापस लेने के संबंध में मिले ज्ञापनों की जांच के बाद भेजा गया था। वर्मा ने AJAX के प्रोविंशियल कन्वेंशन में कहा था कि “जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान नहीं कर देता या उससे रिश्ता नहीं बना लेता, तब तक रिजर्वेशन जारी रहना चाहिए।”
प्रमोशन और क्रिमिनल केस का ब्यौरा दिया
प्रदेश सरकार ने कहा है कि वर्मा असल में स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के ऑफिसर हैं (एलोकेशन साल 1996)। 2019 में, उन्हें स्टेट सर्विस से IAS में प्रमोशन के लिए सिलेक्शन फील्ड में शामिल किया गया था। उस समय उनके खिलाफ पेंडिंग केस नंबर 851/2016 की वजह से उनकी ईमानदारी वेरिफाई नहीं हो पाई थी। इसके बावजूद उनका नाम प्रोविजनली सिलेक्शन कमिटी की मीटिंग में शामिल किया गया था।
6 अक्टूबर, 2020 के कोर्ट ऑर्डर के आधार पर उन्हें बरी कर दिया गया, और 16 अक्टूबर, 2020 को उनकी स्क्रूटनी सर्टिफ़ाई की गई। इसके बाद उन्हें 6 नवंबर, 2020 के भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) के एक ऑर्डर से IAS दिया गया।
फर्जी ऑर्डर का आरोप और गिरफ्तारी
इस मामले में शिकायत के बाद पुलिस जांच में पता चला कि 6 अक्टूबर, 2020 का कोर्ट ऑर्डर असल में कभी पास ही नहीं हुआ था। इसे फर्ज़ी पाए जाने पर वर्मा के खिलाफ क्राइम नंबर 155/2021 दर्ज किया गया। पुलिस ने उन्हें 10 जुलाई, 2021 को गिरफ्तार किया। निचली अदालत और हाई कोर्ट से उनकी ज़मानत याचिका खारिज होने के बाद उन्हें 27 जनवरी, 2022 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई।
सस्पेंशन और बहाली
13 जुलाई, 2021 को, वर्मा को 48 घंटे से ज़्यादा पुलिस कस्टडी में रहने के कारण ऑल इंडिया सर्विसेज (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1969 के तहत सस्पेंड कर दिया गया था। इसके बाद डिपार्टमेंटल कार्रवाई शुरू की गई। 16 मई, 2024 को, सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल, जबलपुर ने सस्पेंशन बढ़ाने का ऑर्डर रद्द कर दिया, जिसके बाद वर्मा को 28 जनवरी, 2025 को सस्पेंशन से बहाल कर दिया गया।
डीई की कार्रवाई प्रचलित
वर्मा के खिलाफ डिपार्टमेंटल जांच अभी भी जारी है। सरकार का कहना है कि बरी करने का ऑर्डर, जिसके आधार पर उनकी स्क्रूटनी सर्टिफाइड की गई थी और उनका IAS प्रमोशन दिया गया था, गलत पाया गया। इसलिए, अब यह रिपोर्ट उनके IAS प्रमोशन अपॉइंटमेंट के बारे में सही फैसले के लिए भारत सरकार को भेज दी गई है।

हाईकोर्ट को चुनौती देने का कोई जिक्र नहीं
सामान्य प्रशासन विभाग के अंडर सेक्रेटरी फरहीन खान द्वारा DoPT को भेजे गए IAS ऑफिसर संतोष कुमार वर्मा को निकालने के प्रपोजल में उनके उन बयानों का ज़िक्र नहीं है, जिनमें उन्होंने हाईकोर्ट पर ब्राह्मण बेटियों और SC/ST कैंडिडेट्स को सिविल जज पोस्ट पर चुने जाने से रोकने का आरोप लगाया था।
ब्राह्मण बेटियों को लेकर दिया था यह बयान
23 नवंबर को भोपाल के अंबेडकर मैदान में शेड्यूल्ड कास्ट्स एंड ट्राइब्स ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AJAKS) का प्रोविंशियल कॉन्फ्रेंस हुआ था, जिसमें IAS ऑफिसर संतोष वर्मा को एसोसिएशन का प्रेसिडेंट चुना गया था। इसके बाद वर्मा ने कहा था कि जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी अपने बेटे को दान नहीं कर देता या उसके साथ रिश्ता नहीं बना लेता, तब तक रिजर्वेशन जारी रहना चाहिए। इतना ही नहीं, मंगलवार को वर्मा का एक और वीडियो सामने आया जिसमें वह कहते दिख रहे हैं, “कितने संतोष वर्मा को मारोगे, कितने जलाओगे, कितने निगलोगे?” अब हर घर से एक संतोष वर्मा निकलेगा, और जब हर घर से एक निकलेगा तो हर संतोष वर्मा को जलाने की ताकत नहीं बचेगी।
