भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और शिक्षक चयन परीक्षाओं में घोषित पदों की बहुत कम संख्या के खिलाफ मंगलवार को भोपाल में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। राज्य भर से लगभग 2,000 भावी शिक्षक राजधानी पहुंचे हैं। यह विरोध प्रदर्शन लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) में हो रहा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!उम्मीदवारों का आरोप है कि हजारों पद खाली होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में घोषित सीटों की संख्या बहुत कम है। इससे न केवल योग्य उम्मीदवार बाहर हो रहे हैं, बल्कि स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार जल्द ही उनकी मांगों पर फैसला नहीं लेती है, तो विरोध प्रदर्शन को अनिश्चितकालीन हड़ताल और भूख हड़ताल में बदल दिया जाएगा। यह विरोध प्रदर्शन शिक्षा प्रणाली में सुधार और युवाओं के लिए न्याय की मांग को लेकर किया जा रहा है।
पदों की संख्या बढ़ाने की मांग
मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा आयोजित माध्यमिक शिक्षक चयन परीक्षा (श्रेणी-2) और प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा (श्रेणी-3) में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर उम्मीदवारों में लगातार गुस्सा बढ़ रहा है।
हजारों पद खाली, भर्ती में सिर्फ कुछ पद
उम्मीदवारों का कहना है कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जारी गजट के अनुसार, 27 दिसंबर, 2024 तक माध्यमिक शिक्षकों के लगभग 99,197 पद और प्राथमिक शिक्षकों के लगभग 1,31,152 पद खाली हैं। इसके बावजूद मौजूदा भर्ती प्रक्रिया में माध्यमिक शिक्षकों के लिए केवल 10,800 पद और प्राथमिक शिक्षकों के लिए 13,089 पद भरे जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि घोषित पदों की संख्या वास्तविक ज़रूरत की तुलना में बहुत कम है, जिससे योग्य उम्मीदवारों को मौका नहीं मिल रहा है।
EWS और OBC श्रेणियों के लिए शून्य पदों का आरोप
उम्मीदवारों ने जनजातीय कार्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई विषयों में EWS और OBC श्रेणियों के लिए शून्य पद दिखाए गए हैं, जिससे इन श्रेणियों के युवाओं में गहरी निराशा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है और आरक्षण प्रणाली पर भी सवाल उठाता है। छात्रों की शिक्षा सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।
छात्रों पर पड़ रहा शिक्षकों की कमी का असर
शिक्षक संगठनों का कहना है कि पदों की कमी का सबसे बड़ा असर छात्रों पर पड़ रहा है। कई स्कूलों में एक ही टीचर को कई सब्जेक्ट पढ़ाने पड़ रहे हैं। इससे न सिर्फ़ पढ़ाने की क्वालिटी पर असर पड़ रहा है, बल्कि परीक्षा के नतीजों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। नई शिक्षा नीति-2020 टीचर-स्टूडेंट रेशियो को बेहतर बनाने पर ज़ोर देती है, लेकिन बिना काफ़ी नियुक्तियों के इसे लागू करना मुमकिन नहीं है।
ये हैं मुख्य मांगें
टीचर भर्ती कैटेगरी-2 के सभी सब्जेक्ट में पदों की संख्या कम से कम 3,000 बढ़ाए जाएं।
प्राइमरी टीचर भर्ती (कैटेगरी-3) में पदों की संख्या बढ़ाकर 25,000 की जाए।
जल्द ही काउंसलिंग का दूसरा राउंड शुरू की जाए।
जब तक 2025 के लिए टीचर भर्ती प्रक्रिया बढ़े हुए पदों के साथ पूरी नहीं होती, तब तक कोई नया एलिजिबिलिटी टेस्ट न लिया जाए।
