भोपाल। मध्य प्रदेश में मौजूदा सरकार के दो वर्ष पूरे हो गए। इस दौरान सभी मंत्री अपनी—अपनी विभागीय उपलब्धियां सामने रख रहे हैं। दो दिन पहले प्रदेश के वित्त मंत्रालय संभाल रहे उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी ने कहा था कि सरकार ने उधार का पैसा विकास कार्यों पर खर्च किया है, लेकिन यह बयान सच्चाई के उलट है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!वित्त विभाग द्वारा दिए गए आंकड़े कुछ और ही कहते हैं। विभाग द्वारा अप्रैल से सितंबर तक की गई छमाही समीक्षा में यह सामने आया है कि सरकार राजस्व व्यय को पूरा करने के लिए पूंजीगत आय का इस्तेमाल कर रही है।
पूंजीगत आय का इस्तेमाल पूंजीगत व्यय को पूरा करने के लिए नहीं किया जा रहा है। राजस्व व्यय को पूरा करने के लिए पूंजीगत आय यानी कैपिटल इनकम का इस्तेमाल यह बताता है कि सरकार इस रकम का इस्तेमाल लाडली बहना योजना के लाभार्थियों को भुगतान करने और सैलरी और भत्ते देने के लिए कर रही है, लेकिन कैपिटल इनकम को ऐसे कामों पर खर्च किया जाना चाहिए, जो स्थायी हों। किसी भी विकासशील राज्य में कैपिटल इनकम का खर्च ज्यादा होना चाहिए।
जानकारी के मुताबिक, सरकार को अप्रैल से सितंबर तक कैपिटल इनकम से 51,109 करोड़ रुपए मिले हैं। इस दौरान कैपिटल खर्च 33,468 करोड़ रुपए रहा है। सरकार को 107,159 करोड़ रुपए का रेवेन्यू मिला है, लेकिन रेवेन्यू खर्च 125,297 करोड़ रुपए था, जो बताता है कि सरकार को कैपिटल इनकम से मिले 18,000 करोड़ रुपए रेवेन्यू खर्चों पर खर्च किए गए।
छमाही समीक्षा में यह भी सामने आया कि सरकार को 2025-26 के दौरान रेवेन्यू सरप्लस बनाए रखने में दिक्कत हो रही थी। पिछले कुछ सालों में राज्य में रेवेन्यू सरप्लस रहा है। इस साल रेवेन्यू खर्च बढ़ने के कारण सरकार को रेवेन्यू सरप्लस बनाए रखने में दिक्कत हो रही है।
राजस्व व्यय:
राजस्व व्यय से कोई संपत्ति नहीं बनती। न ही इससे कर्ज कम होता है। राजस्व व्यय आमतौर पर सैलरी, किराया, सब्सिडी और अनुदान देने के लिए होता है।
पूंजीगत व्यय:
पूंजीगत व्यय से संपत्ति बनती है। इसका इस्तेमाल ऑफिस, मशीनरी और उपकरण खरीदने और कर्ज चुकाने के लिए किया जाता है।
लाडली बहना पर सालाना खर्च:
इस योजना पर सरकार हर साल लगभग 22,000 करोड़ खर्च कर रही है। दिसंबर 2025 तक योजना की 31वीं किस्त जारी की गई, जिसमें 1.26 करोड़ महिलाओं के खातों में 1,857 करोड़ ट्रांसफर किए गए।
बजट आवंटन (2025-26):
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने इस योजना के लिए 18,984 करोड़ का प्रावधान किया है, इसके अलावा अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) में भी 1,794 करोड़ की अतिरिक्त राशि का आवंटन किया गया है।
मासिक खर्च:
योजना की राशि 1,250 से बढ़ाकर 1,500 करने के बाद अब हर महीने सरकार पर लगभग 1,850 करोड़ से 1,900 करोड़ का बजट रखना पड़ रहा है।
मप्र में वेतन भत्तों पर कुल खर्च
मध्य प्रदेश सरकार के 2024-25 के बजट के अनुसार, वेतन और भत्तों पर होने वाला कुल खर्च।
वेतन (Salaries):
वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए वेतन पर कुल 64,898 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष (2023-24) के संशोधित अनुमान (57,305 करोड़ रुपये) से लगभग 13% अधिक है।
पेंशन (Pension):
पेंशन पर होने वाला व्यय 25,648 करोड़ रुपए अनुमानित है।
कुल प्रतिबद्ध व्यय (Total Committed Expenditure):
वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान को मिलाकर सरकार का कुल प्रतिबद्ध खर्च 1,17,945 करोड़ रुपए अनुमानित है, जो राज्य की अनुमानित राजस्व प्राप्तियों का लगभग 45% है।
ये भी
विधायकों का वेतन
दिसंबर 2025 में पारित प्रस्ताव के अनुसार, मध्य प्रदेश में विधायकों का कुल मासिक वेतन और भत्ते बढ़ाकर लगभग 1.70 लाख रुपए कर दिए गए हैं।
महंगाई भत्ता (DA)
राज्य सरकार ने 1 अप्रैल, 2025 से 7वें वेतनमान के अनुसार कर्मचारियों के भत्तों को संशोधित करने का निर्णय लिया है।
