भोपाल। मध्य प्रदेश में इकोनॉमिक ऑफेंस विंग यानी ईओडब्ल्यू ने देवास जिले के एक को-ऑपरेटिव बैंक और एक को-ऑपरेटिव सोसाइटी के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ 8 करोड़ रुपए के सरकारी पैसे के गबन का केस दर्ज किया है। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि जालसाजों ने कांग्रेस सरकार की ‘जय किसान लोन माफी योजना’ का भी फायदा उठाया था।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!DG, EOW उपेंद्र जैन ने बताया कि देवास जिले में राजोदा प्राइमरी एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव कमेटी और सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक देवास के सोसाइटी पदाधिकारियों ने 2016 से 2019 तक सोसाइटी के सदस्यों (किसानों) की जानकारी के बिना लोन लिए। जमीन का एरिया बढ़ाकर 5.50 करोड़ रुपए से ज्यादा निकाले गए। उन्होंने फसल बीमा की रकम अपने अकाउंट में जमा करवाकर करीब 300 किसानों से ठगी भी की।
इन अधिकारियों ने किसानों के अकाउंट से अपने फोन नंबर लिंक कर दिए, इसलिए किसानों को इस धोखाधड़ी के बारे में पता नहीं चला, क्योंकि सारी ट्रांजैक्शन डिटेल्स आरोपियों को मिलीं, किसानों को नहीं।
पदाधिकारियों ने कांग्रेस सरकार की कर्ज माफी योजना का भी फायदा उठाया और सब्सिडी की रकम निकाल ली। सोसायटी कमेटी के सेक्रेटरी महेश जैन ने विड्रॉल स्लिप के जरिए 1.12 करोड़ रुपए निकाल लिए।
कोऑपरेटिव सोसायटी के सुपरवाइजर दिलीप नागर, जिला कोऑपरेटिव सेंट्रल बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर अनिल दुबे, कोऑपरेटिव सोसायटी की चेयरपर्सन रामका बाई चौहान और अन्य ने मिलकर किसानों से ठगी की। अब तक EOW को 8 करोड़ रुपए की फाइनेंशियल गड़बड़ियां मिली हैं और जांच के बाद और भी बातें सामने आ सकती हैं।
मप्र में ईओडब्ल्यू की वर्षवार कार्रवाई
मध्य प्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के विरुद्ध हाल के वर्षों में अपनी कार्रवाई तेज की है।
वर्ष 2024-25 (अबतक): साल 2024 में 2023 की तुलना में FIR दर्ज करने के मामलों में लगभग 10% की वृद्धि देखी गई है। हालिया बड़ी कार्रवाइयों में भोपाल के कारोबारी दिलीप गुप्ता पर 35 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में छापेमारी और कांग्रेस नेता हेमंत कटारे के विरुद्ध FIR शामिल है।
वर्ष 2023: इस वर्ष भ्रष्टाचार और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की गई। इंदौर इकाई ने अकेले ही इस दौरान 84 शिकायतें प्राप्त कीं, जिनमें से 20 में FIR दर्ज की गई और 3 बड़े छापे मारे गए।
पूर्व के वर्षों में: EOW मुख्य रूप से आय से अधिक संपत्ति (DA), बैंक धोखाधड़ी और पोंजी योजनाओं पर केंद्रित रहा है। आंकड़ों के अनुसार, ईओडब्ल्यू ने पिछले 3-4 वर्षों में अनुपातहीन संपत्ति के मामलों में करोड़ों रुपये की काली कमाई उजागर की है।
प्रमुख कार्रवाई क्षेत्र
EOW मध्य प्रदेश में निम्नलिखित श्रेणियों में कार्रवाई करता है।
आय से अधिक संपत्ति (DA): सरकारी अधिकारियों के ठिकानों पर छापे मारकर उनकी अवैध संपत्ति का खुलासा करना।
वित्तीय धोखाधड़ी: निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर ठगने वाली कंपनियों (जैसे श्री मां समटेक मामला) के खिलाफ कार्रवाई।
भ्रष्टाचार: सार्वजनिक पदों के दुरुपयोग और रिश्वतखोरी के मामलों में ट्रैप और केस दर्ज करना।
मप्र में बड़े घोटालों पर कार्रवाई
मध्य प्रदेश में हाल के महीनों में सहकारी बैंकों और समितियों में वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों और विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है।
मंडला जिला सहकारी बैंक (दस्तावेज हेराफेरी): दिसंबर 2025 में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने मंडला में एक अनोखे घोटाले का पर्दाफाश किया। यहाँ अधिकारियों ने दस्तावेजों में ‘अस्वीकृत’ शब्द से ‘अ’ हटाकर उसे ‘स्वीकृत’ बना दिया और 65 लाख का गबन किया। तत्कालीन महाप्रबंधक नरेंद्र कोरी सहित चार अधिकारियों पर FIR दर्ज की गई है।
6.4 करोड़ का ‘बरदाना’ घोटाला: नवंबर 2025 में ग्वालियर और आसपास की 143 सहकारी समितियों में राशन और फसल भंडारण के लिए उपयोग होने वाले सरकारी बोरों (बरदाना) को अवैध रूप से बेचने का मामला सामने आया। इसमें लगभग 72 कर्मचारी और 10 प्रशासक जांच के दायरे में हैं।
मऊगंज 7 करोड़ की धोखाधड़ी: मऊगंज के एक सहकारी बैंक में करीब 3000 खाताधारकों के 7 करोड़ गायब होने की खबर आई है, जिसके बाद बैंक में ताला लगा दिया गया और जांच शुरू की गई।
RBI का जुर्माना: दिसंबर 2024 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नियमों के उल्लंघन पर मध्य प्रदेश के 4 सहकारी बैंकों—इंदौर परस्पर सहकारी बैंक, राज राजेश्वरी महिला नागरिक सहकारी बैंक, गुना नागरिक सहकारी बैंक और श्री वैभव लक्ष्मी महिला नागरिक सहकारी बैंक—पर जुर्माना लगाया था।
भ्रष्टाचार पर अन्य कार्रवाई:
नर्मदापुरम में लोकायुक्त ने जिला सहकारी बैंक के मैनेजर को 20,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
सहकारी विभाग ने पारदर्शिता लाने के लिए अब सहकारी समितियों को भी सूचना का अधिकार (RTI) के दायरे में शामिल कर दिया है।
