नई दिल्ली। 1 अप्रैल 2026 से भारत में चार नए श्रम कोड (New Labour Codes) के लागू होने की प्रबल संभावना है, जो देश के श्रम इतिहास का सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है। केंद्र सरकार ने इन संहिताओं के मसौदा नियमों को अंतिम रूप दे दिया है और राज्यों के साथ मिलकर इन्हें क्रियान्वित करने की तैयारी में है। इन सुधारों के लागू होने से कर्मचारियों के वेतन, काम के घंटों और सामाजिक सुरक्षा में अहम बदलाव आएंगे।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!वेतन संरचना (Salary Structure) में बदलाव
बेसिक सैलरी: कर्मचारी की बेसिक सैलरी उसकी कुल CTC (Cost to Company) का कम से कम 50% होना अनिवार्य होगा।
टेक-होम सैलरी: बेसिक सैलरी बढ़ने से PF (भविष्य निधि) का योगदान बढ़ जाएगा, जिससे हर महीने हाथ में आने वाली (इन-हैंड) सैलरी में थोड़ी कमी आ सकती है।
रिटायरमेंट फंड: PF और ग्रेच्युटी का हिस्सा बढ़ने से रिटायरमेंट के समय मिलने वाली कुल राशि काफी ज्यादा होगी।
काम के घंटे और छुट्टियां
कार्य सप्ताह (Work Week): कंपनियों के पास हफ्ते में 4 दिन काम का विकल्प चुनने की सुविधा होगी। हालांकि, इस स्थिति में कर्मचारी को प्रतिदिन 12 घंटे काम करना होगा, ताकि हफ्ते के 48 घंटों का कोटा पूरा हो सके।
छुट्टियों का नियम: अब कर्मचारी साल में 180 दिन काम करने के बाद ही सालाना छुट्टियों के हकदार होंगे (पहले यह सीमा 240 दिन थी)। इसके अलावा, साल के अंत में 30 से ज्यादा छुट्टियां बचने पर कंपनियों को उनका पैसा (Encashment) देना पड़ सकता है।
सामाजिक सुरक्षा और अन्य लाभ
गिग वर्कर्स के लिए सुरक्षा: पहली बार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स (जैसे स्विगी, जोमैटो) के डिलीवरी पार्टनर्स और फ्रीलांसर्स को सामाजिक सुरक्षा (बीमा और अन्य सरकारी लाभ) के दायरे में लाया जाएगा।
अनिवार्य नियुक्ति पत्र: नए नियमों के तहत हर कर्मचारी को लिखित नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा।
न्यूनतम वेतन और समय पर भुगतान: देशभर में एक समान न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाएगा और वेतन का भुगतान हर महीने की 7 तारीख तक करना अनिवार्य होगा।
मुफ्त स्वास्थ्य जांच: 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र के कर्मचारियों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच का प्रावधान भी शामिल है।
महत्वपूर्ण नोट: श्रम कानून ‘समवर्ती सूची’ (Concurrent List) का विषय है, इसलिए इन नियमों को पूरी तरह लागू करने के लिए केंद्र और राज्यों दोनों को अपने-अपने स्तर पर अधिसूचना जारी करनी होगी।
कितने लोगों को मिलेगा लाभ
भारत में नए श्रम सुधारों (Labor Reforms) के लागू होने से 40 करोड़ से अधिक श्रमिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने का अनुमान है। सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक 100 करोड़ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है।
मुख्य लाभार्थी समूह
असंगठित क्षेत्र के श्रमिक: ई-श्रम (eShram) पोर्टल पर पंजीकृत 31 करोड़ से अधिक श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा।
युवा और नए कर्मचारी: ‘रोजगार आधारित प्रोत्साहन योजना’ (ELI) के माध्यम से लगभग 4.1 करोड़ युवाओं को अगले पांच वर्षों में लाभ मिलने की उम्मीद है।
महिलाएं: रात की पाली (Night Shift) में काम करने की अनुमति और समान वेतन की गारंटी से महिला श्रम शक्ति की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स: पहली बार ओला, उबर, जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है।
मिलने वाले प्रमुख लाभ
न्यूनतम वेतन की गारंटी: संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के सभी कामगारों को समय पर न्यूनतम वेतन मिलेगा।
सामाजिक सुरक्षा: पेंशन, ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य बीमा जैसे लाभों का विस्तार किया गया है। अब 1 साल की नौकरी के बाद भी फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को ग्रेच्युटी मिल सकेगी।
काम के घंटे और ओवरटाइम: काम के घंटे तय किए गए हैं और ओवरटाइम करने पर दोगुना वेतन देने का प्रावधान है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा: 40 वर्ष से अधिक उम्र के श्रमिकों के लिए सालाना मुफ्त हेल्थ चेकअप अनिवार्य किया गया है।
नियुक्ति पत्र: पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर कंपनी के लिए कर्मचारियों को लिखित नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा।
यह सुधार 29 पुराने श्रम कानूनों को चार सरल संहिताओं (Labor Codes) में समाहित करके लागू किए जा रहे हैं, जिसका उद्देश्य श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना है।
