नई दिल्ली। BJP ने बिहार की NDA सरकार में मंत्री नितिन नबीन को एक बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी है। BJP के पार्लियामेंट्री बोर्ड ने उन्हें पार्टी का नेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट बनाया है। नितिन नबीन को जेपी नड्डा की जगह पार्टी का नेतृत्व करने के लिए नियुक्त किया गया है। नितिन नबीन को पार्टी की कमान सौंपने का BJP का फ़ैसला बिना वजह नहीं है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। BJP प्रेसिडेंट की रेस में कई नामों पर चर्चा हुई, लेकिन पार्टी ने एक बार फिर चौंकाने वाला फैसला लेते हुए एक बड़ा पॉलिटिकल दांव खेला है। नितिन नबीन को पार्टी का नेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट बनाकर यह साफ़ कर दिया है कि BJP अब पूरी तरह से भविष्य की लीडरशिप बनाने पर ध्यान दे रही है। उनकी नियुक्ति के पीछे पांच ज़रूरी पॉलिटिकल मैसेज छिपे हैं।
भविष्य की लीडरशिप
BJP के वर्किंग प्रेसिडेंट बनाए गए नितिन नबीन सिर्फ़ 45 साल के हैं। नितिन नबीन BJP के इतिहास में पार्टी की कमान संभालने वाले सबसे कम उम्र के नेता हैं। अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर जेपी नड्डा तक, अमित शाह सभी पार्टी प्रेसिडेंट में सबसे कम उम्र के रहे हैं। अमित शाह 49 साल की उम्र में नेशनल प्रेसिडेंट बने थे, लेकिन नबीन उनसे भी कम उम्र के हैं। 1980 में जन्मे नबीन ने इतनी कम उम्र में खुद को साबित किया है।
नितिन नबीन जैसे युवा लीडर को टॉप ऑर्गेनाइज़ेशनल पद पर नियुक्त करना यह दिखाता है कि BJP अब पूरी तरह से “नेक्स्ट-जेन” लीडरशिप पर फोकस कर रही है। BJP अब 2029 और उसके बाद के भारत की कल्पना कर रही है। इसके अलावा, RSS भी इस बात की वकालत करता रहा है कि BJP को भविष्य की लीडरशिप पर फोकस करना चाहिए।
45 साल के व्यक्ति को पार्टी की कमान सौंपकर BJP ने यह साफ कर दिया है कि वह नए लीडर्स को बढ़ावा देने पर फोकस कर रही है। नितिन नबीन को ऑर्गेनाइज़ेशनल और सरकारी दोनों भूमिकाओं का बहुत अनुभव है, यही वजह है कि पार्टी ने उन्हें एक्टिंग प्रेसिडेंट नियुक्त किया है। नितिन नबीन युवा, एग्रेसिव हैं और नई पीढ़ी की भाषा समझते हैं। इसके अलावा, उन्होंने युवाओं को पार्टी से जोड़ने की कला में महारत हासिल की है। वे BJP युवा मोर्चा के नेशनल जनरल सेक्रेटरी के तौर पर काम कर चुके हैं। वर्किंग प्रेसिडेंट के तौर पर उनकी नियुक्ति से युवाओं में नई एनर्जी आएगी।
युवा कार्यकर्ताओं को संदेश
नितिन नबीन को नियुक्त करके BJP ने अपने वर्कर्स को सीधा मैसेज दिया है। नितिन नबीन को भले ही राजनीति विरासत में मिली हो, लेकिन उन्होंने अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत ABVP से की थी। उन्हें वर्किंग प्रेसिडेंट नियुक्त करके BJP ने यह साफ कर दिया है कि BJP में कोई भी प्रेसिडेंट का पद संभाल सकता है, बशर्ते वे पार्टी के लिए सच्ची लगन और ईमानदारी से काम करें।
नितिन नबीन ने अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत ABVP से की, युवा मोर्चा के जनरल सेक्रेटरी और छत्तीसगढ़ के इंचार्ज के तौर पर काम किया। उन्हें बिहार में पांच बार MLA और राज्य सरकार में मंत्री के तौर पर भी अनुभव है। नितिन नबीन को एक्टिंग प्रेसिडेंट नियुक्त करने से पार्टी नेताओं में यह भरोसा पैदा होगा कि अगर वे पार्टी के लिए काम करते रहेंगे, तो वे टॉप पोजीशन तक पहुंच सकते हैं।
इतने सालों तक राजनीति में रहने के बावजूद, नितिन नबीन ने अपनी बेदाग इमेज बनाए रखी है। वह लो प्रोफ़ाइल रहने में यकीन रखते हैं, कोई भड़काऊ बयान या भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगाते। माना जा रहा है कि BJP टॉप पोस्ट के लिए ऐसे ही किसी व्यक्ति की तलाश में थी। पार्टी संगठन को मज़बूत करने और भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों को आकार देने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। नितिन नबीन की नियुक्ति को बिहार की राजनीति में BJP के संगठनात्मक विस्तार के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
कायस्थ समुदाय को साधने की रणनीति
नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर BJP ने कायस्थ समुदाय को एक राजनीतिक संदेश दिया है। नितिन नबीन कायस्थ समुदाय से हैं। जनसंघ से लेकर BJP तक, कायस्थ समुदाय ने पार्टी का कोर वोट बैंक बनाया है। कायस्थ समुदाय को सबसे ज़्यादा पढ़ा-लिखा वर्ग माना जाता है। BJP ने देश के बुद्धिजीवी वर्ग और अपने पारंपरिक वोटरों को ध्यान में रखते हुए नितिन नबीन को टॉप संगठनात्मक पद सौंपा है।
जातिगत समीकरणों को संभालने के अलावा, नितिन “सबका साथ” वाली छवि भी बनाए रखते हैं। कायस्थ समुदाय के वोटर हिंदी पट्टी के शहरी इलाकों में अहम भूमिका निभाते हैं, और नितिन नबीन की उन पर मज़बूत पकड़ मानी जाती है। कायस्थ समुदाय भले ही संख्या में कम हो, लेकिन उनकी बौद्धिक मौजूदगी, प्रशासनिक असर और शहरी लीडरशिप में उनकी भूमिका हमेशा से अहम रही है। नितिन नबीन ने न सिर्फ़ इस भूमिका को निभाया है, बल्कि इसे मज़बूत भी किया है। नितिन नबीन का शांत स्वभाव, संतुलित बयानबाज़ी और बिना किसी विवाद के काम करने की पहचान उन्हें कायस्थ समुदाय के लिए एक स्वाभाविक और स्वीकार्य नेता बनाती है।
पश्चिम बंगाल में कायस्थ वोटर बहुत अहम माने जाते हैं। इसलिए, नितिन नबीन के ज़रिए पश्चिम बंगाल को एक पॉलिटिकल मैसेज देने की कोशिश की गई है, जिससे कायस्थ वोटरों का भरोसा जीतकर बंगाल में कमल को सत्ता में लाने की उम्मीद है। 2020 में बिहार में BJP के तीन कायस्थ MLA थे, जिनमें से दो को पार्टी ने टिकट नहीं दिया था, लेकिन नितिन नबीन अकेले ऐसे थे जिन पर पार्टी ने भरोसा जताया। इसलिए, नितिन नबीन बंगाल चुनाव में BJP के लिए एक बड़ा तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं।
BJP और RSS की पसंद
नितिन नबीन RSS और BJP की विचारधारा से गहराई से जुड़े हुए हैं। उनके पिता, नवीन किशोर सिन्हा, जनसंघ के ज़रिए BJP में शामिल हुए और पटना से सात बार MLA रहे। पिता की मौत के बाद, नितिन ने अपने पिता की विरासत संभाली, लेकिन अपनी पार्टी पर कभी भी भाई-भतीजावाद का दाग नहीं लगने दिया। नितिन नबीन ने अपना पॉलिटिकल करियर RSS की स्टूडेंट विंग ABVP से शुरू किया और बाद में BJP युवा मोर्चा में शामिल हो गए।
उन्होंने अपनी मेहनत और काबिलियत से यह जगह बनाई है। इसलिए, उन्हें RSS और BJP दोनों की टॉप लीडरशिप का पसंदीदा माना जाता है। उनका RSS बैकग्राउंड है और BJP ऑर्गनाइज़ेशन में काम करने का अनुभव है। 2014 के बाद उन्हें पॉलिटिकल पहचान मिली। उन्हें नरेंद्र मोदी और अमित शाह का पसंदीदा माना जाता है, इसीलिए उन्हें पार्टी का वर्किंग प्रेसिडेंट बनाया गया था। नितिन नबीन एक ऐसा ही नाम हैं, एक ऐसा चेहरा जिन्होंने न सिर्फ कॉन्फिडेंस के साथ अपनी सीटें जीती हैं, बल्कि शहरी और पढ़े-लिखे वोट बैंक के बीच भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
संगठन और सरकार दोनों का अनुभव
नितिन नबीन को पावर और ऑर्गनाइज़ेशन दोनों में पॉलिटिकल अनुभव है। बिहार में रोड कंस्ट्रक्शन मिनिस्टर के तौर पर, उन्हें अपने “नितिन गडकरी” स्टाइल के काम के लिए तारीफ मिली है। रोड कंस्ट्रक्शन मिनिस्टर के तौर पर भी उनकी इमेज मजबूत हुई है। वह एक ऐसे मिनिस्टर हैं जो फाइलों के पीछे नहीं छिपते बल्कि ज़मीन पर काम करके दिखाना चाहते हैं। MLA के तौर पर उन्होंने पटना की बांकीपुर सीट को BJP का गढ़ बनाए रखा और शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा और पुष्पम प्रिया चौधरी जैसे हाई-प्रोफाइल उम्मीदवारों को हराया। नितिन नबीन अपने पिता की पारंपरिक सीट से लगातार पांच बार MLA रहे हैं। पिछली बार की तरह इस बार भी वे नीतीश कुमार सरकार में मंत्री हैं।
BJP ने जिन भी राज्यों में उन्हें संगठन की ज़िम्मेदारियां दीं, वहां उन्होंने एक्टिव भूमिका निभाई। इससे यह संकेत मिला कि पार्टी उन्हें बिहार से बाहर भी एक बड़े नेता के तौर पर देखती है। नितिन नबीन की सबसे बड़ी कामयाबी 2023 छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव रही। जब उन्हें छत्तीसगढ़ का इंचार्ज बनाया गया, तो वहां भूपेश बघेल की सरकार को बहुत मज़बूत माना जा रहा था। नितिन नबीन ने वहां निराश कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकी। उन्होंने बूथ लेवल पर माइक्रो-मैनेजमेंट किया और महतारी वंदन योजना जैसी स्ट्रेटेजी लागू कीं। इसका नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस का अभेद्य किला ढह गया। इस जीत ने उन्हें PM मोदी और अमित शाह का भरोसेमंद बना दिया।
