वॉशिंगटन। अमेरिका—इजराइल और ईरान के बीच एक महीने से चल रहे युद्ध से वैश्विक स्तर पर जहां भूचाल मचा है वहीं वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित होने से कई देशों की अर्थव्यवस्था भी डगमगाने लगी है। शेयर बाजारों में आए दिन नित नए संकट खड़े हो रहे हैं, लेकिन दुनियाभर में मची उथल—पुथल के बीच कुछ लोगों की तिजोरी मालामाल हो रही है। इनके खजाने में अकूत राशि आ रही है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दरअसल, दुनिया में चल रहे विभिन्न युद्धों और भू-राजनीतिक तनावों का सीधा फायदा अमेरिकी रक्षा कंपनियों (Defense Contractors) और वहां के बिजनेसमैन को हो रहा है। यूक्रेन, गाजा और मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण अमेरिका का रक्षा उद्योग ‘ट्रिलियन-डॉलर’ का व्यवसाय बन गया है
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युद्ध से मुनाफाखोरी
रिकॉर्ड हथियार बिक्री: 2024 में वैश्विक हथियारों की बिक्री ने रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिसमें अमेरिकी कंपनियों का 50% से अधिक हिस्सा रहा। अमेरिकी रक्षा कंपनियों ने अकेले 2023 में 317 बिलियन डॉलर से अधिक के हथियार बेचे।
प्रमुख कंपनियां: लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin), आरटीएक्स (RTX – रेथियॉन), नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन (Northrop Grumman), बोइंग (Boeing) और जनरल डायनेमिक्स (General Dynamics) जैसी कंपनियां सबसे ज्यादा मुनाफा कमा रही हैं।
गाजा और यूक्रेन युद्ध: इजराइल-हमास युद्ध (2023-24) के बाद, अमेरिकी हथियारों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। RTX के बाजार मूल्य में 84% और लॉकहीड मार्टिन में 55% तक की वृद्धि देखी गई। यूक्रेन को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य सहायता के चलते भी रक्षा ठेकेदारों के ऑर्डर बुक भर गए हैं।
सट्टेबाजी और मार्केट उथल-पुथल: ऐसी रिपोर्टें हैं कि युद्ध के बयानों और सीजफायर की घोषणाओं का इस्तेमाल शेयर बाजार और तेल की कीमतों में सट्टेबाजी के लिए किया जा रहा है, जिससे कुछ निवेशक करोड़ों डॉलर कमा रहे हैं।
लॉबिंग और कॉन्ट्रैक्ट: ये कंपनियां अमेरिकी सरकार में भारी लॉबिंग करती हैं, जिसके बदले उन्हें अरबों डॉलर के सरकारी ठेके मिलते हैं।
यह ‘खेल’ कैसे काम करता है?
अमेरिकी प्रशासन द्वारा जब अन्य देशों को सैन्य सहायता या हथियार बेचने की मंजूरी दी जाती है, तो वह पैसा अंततः अमेरिकी रक्षा कंपनियों के पास ही वापस लौट आता है। इसे अक्सर ‘आपदा में अवसर’ के रूप में देखा जा रहा है, जहां संघर्ष बढ़ने से रक्षा फर्मों के स्टॉक की कीमतें और मुनाफा बढ़ता है।
अमेरिका—ईरान वॉर में अब तक कुल खर्च
वित्तीय खर्च (Financial Cost)
कुल अनुमानित खर्च: युद्ध के पहले 24 दिनों में अमेरिका का खर्च $25 बिलियन (लगभग 2.10 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंचने का अनुमान है।
दैनिक खर्च: अमेरिका इस युद्ध पर औसतन $1 बिलियन से $2 बिलियन (लगभग 8,400 से 16,800 करोड़ रुपए) प्रतिदिन खर्च कर रहा है।
शुरुआती लागत: पेंटागन के अनुसार, युद्ध के शुरुआती 6 दिनों में ही $11.3 बिलियन (लगभग 95,000 करोड़ रुपए) खर्च हो चुके थे।
हथियारों पर खर्च: केवल पहले 6 दिनों में आक्रामक हमलों के लिए उपयोग किए गए हथियारों (जैसे टॉमहॉक मिसाइलें) की लागत लगभग $5.5 बिलियन थी।
अतिरिक्त बजट की मांग: ट्रंप प्रशासन ने युद्ध जारी रखने के लिए अमेरिकी संसद से $200 बिलियन (लगभग 16.8 लाख करोड़ रुपए) के अतिरिक्त फंड की मांग की है।
जनहानि (Casualties)
अमेरिकी सैनिक: अब तक कम से कम 13 अमेरिकी सेवा सदस्य मारे गए हैं।
ईरानी पक्ष: रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में अब तक 3,300 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें लगभग 1,500 नागरिक शामिल हैं।
क्षेत्रीय प्रभाव: इजरायल, लेबनान, इराक और खाड़ी देशों में भी सैकड़ों लोगों की जान गई है।
आर्थिक प्रभाव (Economic Impact)
कच्चा तेल: युद्ध के कारण कच्चे तेल (Brent crude) की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
शेयर बाजार: वैश्विक अनिश्चितता के कारण भारतीय शेयर बाजार से लगभग 11 लाख करोड़ रुपए की निवेशक संपत्ति स्वाहा हो गई है।
