वॉशिंगटन। दूसरे कार्यकाल में अपनी नीतियों को लेकर दुनियाभर में खलबली मचाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विरोध में स्वर तेज होता जा रहा है। ट्रंप द्वारा पहले दुनियाभर के देशों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ, वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को गिरफ्तारी और ईरान पर हमले के खिलाफ अब अमेरिका में भी उनके खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!शनिवार 28 मार्च 2026 को अमेरिका के सभी 50 राज्यों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ “नो किंग्स” (No Kings) आंदोलन के तहत व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए हैं। आयोजकों के अनुसार, इस आंदोलन में लगभग 90 लाख लोग सड़कों पर उतरे, जो कि आधुनिक अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े नागरिक विद्रोहों में से एक माना जा रहा है।
प्रदर्शनों के मुख्य कारण
ईरान के साथ युद्ध: लोग ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष और उसमें हो रही अमेरिकी जनहानि का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
सख्त आव्रजन (Immigration) नीतियां: हाल ही में ‘ऑपरेशन मेट्रो सर्ज’ के दौरान संघीय एजेंटों द्वारा अमेरिकी नागरिकों की कथित हत्याओं और सख्त निर्वासन नीतियों को लेकर जनता में भारी गुस्सा है।
महंगाई और अर्थव्यवस्था: आसमान छूती ईंधन की कीमतों और बढ़ती जीवन यापन लागत (Cost of Living) के लिए सरकार के फैसलों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
लोकतंत्र और तानाशाही का डर: प्रदर्शनकारी “नो किंग्स” (कोई राजा नहीं) के नारों के साथ ट्रंप के शासन के तरीके को “तानाशाही” करार दे रहे हैं और लोकतंत्र बचाने की अपील कर रहे हैं।
प्रदर्शनों की मुख्य बातें
विशाल स्तर: अमेरिका भर में 3,100 से अधिक स्थानों पर रैलियां आयोजित की गईं, जिनमें न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डी.सी., शिकागो और लॉस एंजिल्स जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बे भी शामिल थे।
वैश्विक समर्थन: अमेरिका के अलावा यूरोप, लैटिन अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के कई शहरों में भी ट्रंप विरोधी प्रदर्शन देखे गए।
प्रमुख हस्तियां: न्यूयॉर्क और अन्य जगहों पर रॉबर्ट डी नीरो जैसी मशहूर हस्तियों और कई दिग्गजों (Veterans) ने भी इन रैलियों में हिस्सा लिया।
व्हाइट हाउस ने इन प्रदर्शनों को “ट्रंप डिरेंजमेंट थेरेपी सेशंस” कहकर खारिज कर दिया है। यह “नो किंग्स” श्रृंखला का तीसरा और अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन था।
