भोपाल। मध्य प्रदेश में जल्द ही पुलिस भर्ती बोर्ड के जरिए जवानों की भर्ती की जाएगी। इसको लेकर शासन स्तर पर कार्यवाही ने रफ्तार पकड़ लिया है। सबकुछ ठीकठाक रहा तो इस पर जल्द ही अमल होना शुरू हो जाएगा।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के करीब चार महीने बाद गृह विभाग ने पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने का प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को भेजा है। इसके बाद अब वित्त और विधि विभाग की मंजूरी मिलते ही मामले को कैबिनेट में लाने की कोशिशें चल रही हैं।
राज्य में पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने की लंबे समय से चल रही प्रक्रिया में तब तेजी आई जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर CM आवास पर हुए एक कार्यक्रम में बोर्ड बनाने की घोषणा की। यह प्रस्ताव शुरू में PHQ में तैयार किया गया था और एडमिनिस्ट्रेटिव अप्रूवल न मिलने के कारण इसे रोक दिया गया था। हालांकि, CM की घोषणा के बाद बंद फाइल को फिर से खोला गया और प्रस्ताव तैयार किया गया। खबर है कि 100 दिन की सोच-विचार के बाद गृह विभाग ने अब इसे GAD को भेज दिया है। इसमें रिक्रूटमेंट बोर्ड के स्ट्रक्चरल प्रोसेस और ज़िम्मेदारियों के बारे में डिटेल में बताया गया है।
GAD, गृह मंत्रालय के प्रस्ताव पर विधि विभाग और वित्त विभाग से भी सुझाव मांग सकता है, जैसा कि आमतौर पर होता है। रिक्रूटमेंट बोर्ड बनाने का प्रपोज़ल फिर मंज़ूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। कैबिनेट से मंज़ूरी मिलने पर, पुलिस रिक्रूटमेंट बोर्ड बनाने की फॉर्मल घोषणा की जाएगी। राज्य में पुलिस कांस्टेबल और सब-इंस्पेक्टर की भर्ती का सिस्टम 2012 में शिवराज सिंह चौहान सरकार के दौरान बदला गया था।
पहले, पुलिस हेडक्वार्टर की रिक्रूटमेंट और सिलेक्शन ब्रांच के तहत हर ज़िले में एक कमेटी बनाई जाती थी। इसमें शुरू में एक फिजिकल एग्जाम होता था, जिसमें से लगभग 10 परसेंट कैंडिडेट रिटन एग्जाम के लिए चुने जाते थे। रिटन एग्जाम में सफल कैंडिडेट को फिर इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता था। इन तीनों एग्जाम के लिए अलग-अलग कमेटी बनाई गई थीं। बाद में सरकार ने रिटन एग्जाम की ज़िम्मेदारी व्यापम (अब स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड) को सौंप दी।
अन्य राज्यों से पीछे है मध्य प्रदेश
PHQ अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस रिक्रूटमेंट बोर्ड बनाने में दक्षिण भारत के राज्य मध्य प्रदेश से आगे हैं। तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश समेत कई दक्षिण भारतीय राज्यों में पुलिस रिक्रूटमेंट बोर्ड कई दशकों से चल रहे हैं। उत्तर प्रदेश और गुजरात में पहले ही पुलिस रिक्रूटमेंट बोर्ड बन चुके हैं। इन बोर्ड के ज़रिए लाखों पुलिसवालों की भर्ती हुई है।
सीएम की घोषणा पर होगा अमल, बन रही बिल्डिंग
मुख्यमंत्री के पुलिस रिक्रूटमेंट बोर्ड बनाने की घोषणा से एक साल पहले ही पुलिस हेडक्वार्टर ने तैयारी शुरू कर दी थी। श्यामला हिल्स इलाके में पुलिस रिक्रूटमेंट बोर्ड के लिए हेडक्वार्टर बिल्डिंग का कंस्ट्रक्शन चल रहा है। बिल्डिंग का निर्माण पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन कर रहा है। जुलाई 2026 तक कंस्ट्रक्शन पूरा होने की उम्मीद है। बिल्डिंग की कुल लागत 19.88 करोड़ होगी। बिल्डिंग का कुल बिल्ट-अप एरिया 6,748 स्क्वायर मीटर से ज़्यादा होगा।
