नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की विजयपुर विधानसभा सीट को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी को बरकरार रखते हुए मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट में मुकेश मल्होत्रा का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने दलीलें पेश कीं, जिसके बाद अदालत ने मल्होत्रा को राहत दी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सुप्रीम कोर्ट की दो प्रमुख शर्तें
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की डबल बेंच ने मल्होत्रा को विधायक के रूप में जारी रखने की अनुमति तो दी है, लेकिन अंतिम फैसला आने तक ये पाबंदियां भी लगाई हैं।
वोटिंग राइट नहीं
मुकेश मल्होत्रा फिलहाल राज्यसभा के लिए मतदान नहीं कर सकेंगे। ऐसे में अब मुकेश जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए वोट नहीं डाल पाएंगे।
वेतन पर रोक
जब तक कोर्ट इस मामले में अपना अंतिम निर्णय नहीं सुना देता, तब तक उन्हें विधायक के रूप में मिलने वाला वेतन और भत्ते नहीं दिए जाएंगे। वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने बताया कि अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
विधायक बोले-मैं जनता की लड़ाई लड़ता रहूंगा
सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद विधायक मल्होत्रा ने वीडियो जारी कर कहा-सुप्रीम कोर्ट ने जो सम्मानजनक फैसला दिया है, उससे मैं संतुष्ट हूं। ये विजयपुर की जनता के एक-एक मत की जीत है। पूर्व मंत्री रावत आरोप लगा रहे थे कि मैंने केस छिपाए हैं। मैंने कोई केस नहीं छिपाए। हालांकि, उनके वकीलों ने मेरे अधिकार शिथिल करा दिए हैं। हमें क्षेत्र के विकास के लिए जो विधायक निधि मिलती है, वो पैसा हमें नहीं मिलेगा। मुझे वेतन भी नहीं मिलेगा, लेकिन फर्क नहीं पड़ता। मैं जनता और क्षेत्र के विकास के लिए संघर्ष करता रहूंगा। सदन में भी प्रश्न उठाता रहूंगा।
सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए दिया था 15 दिन का वक्त
गौरतलब है कि एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने क्रिमिनल केस छिपाने के चलते मल्होत्रा का चुनाव शून्य घोषित करते हुए भाजपा नेता रामनिवास रावत को विजेता माना था। इसके तुरंत बाद मल्होत्रा ने हाईकोर्ट में ही एक आवेदन देकर अपील करने के लिए समय मांगा था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मुकेश मल्होत्रा के पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए 15 दिन का समय था।
