नई दिल्ली। ईरान पर इजराइल-US हमले ने एक नई जंग छेड़ दी है, जो धीरे-धीरे बढ़ रही है। जवाबी कार्रवाई में, ईरान ने मिडिल ईस्ट में कई US बेस पर मिसाइलें दागी हैं। कुवैत, कतर, दुबई और सऊदी अरब में ईरानी हमले हुए हैं, जिसके बाद इजराइल और US को जवाब देना पड़ा है। यह अंदाज़ा लगाना मुश्किल है कि यह युद्ध कब तक चलेगा और कितना गंभीर होगा।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दूसरी ओर, डर है कि ईरान इन हमलों का इस्तेमाल डिप्लोमैटिक तरीके से होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के लिए कर सकता है, जो दुनिया के तेल इंपोर्ट का लगभग 40% हिस्सा है। अगर यह रास्ता बंद हो जाता है, तो इससे न केवल भारत सहित दुनियाभर में कच्चे तेल की सप्लाई में दिक्कत होगी, बल्कि इस रास्ते से भारत के एक्सपोर्ट पर भी असर पड़ेगा।
भारत के लिए यह कितना बड़ा नुकसान
एक रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव से भारत के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट के दसवें हिस्से से ज्यादा को खतरा हो सकता है। भारत के लिए, यह डेवलपमेंट एनर्जी सिक्योरिटी से कहीं ज्यादा बड़ा रिस्क है। भारत के तीन बड़े सप्लायर इसी रास्ते से क्रूड ऑयल भेजते हैं, जबकि तेल के अलावा कई दूसरे जरूरी ट्रेड रूट भी इसी रास्ते से होते हैं।
$47 बिलियन से ज़्यादा का एक्सपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने समुद्री रास्ते पर निर्भर खाड़ी देशों को क्रूड ऑयल के अलावा लगभग $47.6 बिलियन का दूसरा सामान एक्सपोर्ट किया है। यह भारत के कुल नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का लगभग 13.2 प्रतिशत है, और तेल को छोड़कर भारत का कुल समुद्री रास्ते का एक्सपोर्ट लगभग $360.2 बिलियन है। अगर समुद्री रास्ते पर असर पड़ता है, तो यह एक बड़ा नुकसान हो सकता है।
भारत के एक्सपोर्ट में सबसे बड़ा हिस्सा यूनाइटेड अरब अमीरात का है, जिसकी एक्सपोर्ट वैल्यू $28.5 बिलियन है, इसके बाद सऊदी अरब का $11.7 बिलियन है। दूसरे मार्केट में इराक ($2.8 बिलियन), कुवैत ($2.1 बिलियन), कतर ($1.7 बिलियन), और ईरान ($1.25 बिलियन) शामिल हैं।
बढ़ सकता है खर्च, बढ़ेगी महंगाई
ईरान और ओमान के बीच मौजूद होर्मुज स्ट्रेट, दुनिया का सबसे बिजी समुद्री चोकपॉइंट है, जो बड़ी मात्रा में कार्गो ट्रेड के साथ-साथ ग्लोबल एनर्जी शिपमेंट का एक बड़ा हिस्सा भी हैंडल करता है। इस रूट पर कोई भी रुकावट, भले ही वह टेम्पररी हो, माल ढुलाई की लागत बढ़ा सकती है, शिपमेंट में देरी कर सकती है, और एशिया-यूरोप ट्रेड को कम कर सकती है।
भारत इन रूट से कौन सी चीजें एक्सपोर्ट करता है?
भारत इस रूट से कई खाड़ी देशों को इंजीनियरिंग सामान, जेम्स और ज्वेलरी, खाने के प्रोडक्ट, केमिकल और कंस्ट्रक्शन मटीरियल भेजता है, जो सभी समुद्री रूट पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। इसलिए, यह युद्ध न सिर्फ तेल बल्कि दूसरे ट्रेड पर भी असर डाल सकता है।
US—Iran War: भारत के लिए बड़ा खतरा
28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद मध्य पूर्व (West Asia) में तनाव चरम पर है
। भारत के लिए यह स्थिति न केवल कूटनीतिक बल्कि आर्थिक और मानवीय दृष्टि से भी एक बड़ा खतरा है।
- ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई (Energy Security)
तेल की कीमतों में उछाल: भारत अपनी तेल जरूरतों का 80-85% आयात करता है। युद्ध की स्थिति में ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100-$130 प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम 200 डॉलर के पार पहुंचने की आशंका है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): भारत का लगभग 50% कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है। यदि ईरान इस मार्ग को बाधित करता है, तो भारत की ‘ऑयल लाइफलाइन’ कट सकती है।
- भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा
90 लाख भारतीयों पर संकट: खाड़ी देशों (UAE, सऊदी अरब, कतर आदि) में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं। ईरान द्वारा इन देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमलों (जैसे अबू धाबी और रियाद पर मिसाइल हमले) ने उनकी सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।
रेमिटेंस में गिरावट: इन प्रवासियों द्वारा भेजा जाने वाला धन (Remittance) भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार है, जो युद्ध के कारण प्रभावित हो सकता है।
- रणनीतिक और व्यापारिक निवेश
चाबहार बंदरगाह: भारत ने ईरान के चाबहार पोर्ट में भारी निवेश किया है ताकि मध्य एशिया तक पहुँच बनाई जा सके। युद्ध इस प्रोजेक्ट को ठप कर सकता है।
निर्यात पर असर: भारत से होने वाला लगभग $1.2 बिलियन का बासमती चावल और चाय का निर्यात बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना है।
- कूटनीतिक संतुलन (Diplomatic Tightrope)
भारत के इज़राइल और अमेरिका के साथ मजबूत सामरिक संबंध हैं, लेकिन ईरान के साथ उसके ऐतिहासिक और रणनीतिक हित जुड़े हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से संयम (Restraint) बरतने और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपील की है।
भारत सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र में रहने वाले अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है और दूतावासों को हाई अलर्ट पर रखा है।
