भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले चार सालों में लोकायुक्त संगठन ने 1,379 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जांच कर रहा है। मामलों में 20.97 करोड़ रुपए वसूलने के बावजूद 134 मामले अभियोजन की मंजूरी के लिए लंबित हैं। 39 मामलों में शुरुआती कार्रवाई शुरू हो गई है, और 208 मामलों में कोर्ट में चालान फाइल पेश किए गए हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत के एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2022-23 से लोकायुक्त संगठन में 1,884 शिकायतें दर्ज की गई हैं, जबकि स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट में 1,063 क्रिमिनल केस रजिस्टर किए गए हैं। इन मामलों में शिकायत और जांच ब्रांच और तकनीकी शाखा ने इसी समय में 1,592 जांच पूरी करके उन्हें सुलझाया है। अभी, शिकायत और जांच शाखा में 1,291 और तकनीकी शाखा में 88 मामलों की जांच चल रही है, यानी कुल 1,379 मामले की जांच की जा रही है।
134 मामलों में अभियोजन की मंजूरी का इंतजार
लोकायुक्त संगठन ने विशेष पुलिस स्थापना द्वारा दर्ज किए गए 1,063 अपराधिक मामलों में से 393 मामलों में जांच कर ली गई है। इनमें से 134 मामलों में अभियोजन की की मंजूरी लंबित है। 39 मामलों में चार्जशीट की कार्रवाई शुरू हो चुकी है और 208 मामलों में कोर्ट में चालान फाइल किए जा चुके हैं। 12 मामले कोर्ट में बंद कर दिए गए हैं, जिनमें आरोपी की मौत या केस से डिस्चार्ज को इन्वेस्टिगेशन का आधार बनाया गया था। बाकी 670 मामलों में अभी इन्वेस्टिगेशन चल रही है।
153 मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई
सवाल के जवाब में यह भी बताया गया कि जांचे गए कुल मामलों में से शिकायत एवं जांच शाखा में 146 मामलों में और तकनीकी शाखा में 7 मामलों में यानी कुल 153 मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। शिकायतों और जांच के आधार पर, 20,97,17,905 रुपए की रकम वसूल की गई है।
विशेष लोकायुक्त पुलिस स्थापना द्वारा कोर्ट में फाइल किए गए 208 चालान में से 7 मामलों में आरोपियों को दोषी ठहराया गया। इन मामलों में सामान्य प्रशासन विभाग के सर्कुलर नंबर C-6-2/98/3/1, तारीख 26 मई, 1998 के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।
दरअसल, कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने विधानसभा के जरिए राज्य सरकार से पूछा कि 2022-23 से अब तक लोकायुक्त संगठन को कितने केस मिले, कितने केस सुलझाए गए और कितने अभी पेंडिंग हैं। साथ ही, कितने केस में दोषी पाए गए, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई प्रस्तावित की गई और पेंडिंग केस के तेजी से सॉल्यूशन के लिए सरकार ने क्या एक्शन प्लान और टाइमलाइन तय की है।

लोकायुक्त की कार्रवाई : प्रमुख मामले
मध्य प्रदेश लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। हालिया आंकड़ों और रिपोर्टों के अनुसार, पिछले 4 वर्षों में भ्रष्टाचार के मामलों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
छापेमारी और जांच: लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे 1,379 से अधिक व्यक्तियों के खिलाफ जांच की है। इन कार्रवाइयों में प्रदेश भर में हजारों ठिकानों पर दबिश दी गई।
प्रमुख मामले (2024-2025):
जी.पी. मेहरा (सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, PWD): अक्टूबर 2025 में हुई छापेमारी में 17 टन शहद, 2.6 किलो सोना, 36 लाख रुपये नकद और लग्जरी गाड़ियाँ बरामद हुईं।
धर्मेंद्र सिंह भदौरिया (सेवानिवृत्त आबकारी अधिकारी): इनके पास से 25 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति के दस्तावेज मिले।
गोवर्धनलाल मारू (सहकारी समिति प्रबंधक): नवंबर 2025 की छापेमारी में 4.69 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति का खुलासा हुआ।
विभागवार कार्रवाई: सबसे अधिक मामले राजस्व, पुलिस और लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़े रहे हैं, जहां रिश्वतखोरी और आय से अधिक संपत्ति के गंभीर मामले दर्ज किए गए।
