भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सीनियर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का राज्यसभा का टर्म तीन महीने बाद 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है। वह दूसरे टर्म के राज्यसभा MP हैं। वह तीसरे टर्म के लिए चुनाव नहीं लड़ेंगे। दिग्विजय सिंह ने खुद इसकी पुष्टि की।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मंगलवार को भोपाल के समन्वय भवन में एक सवाल के जवाब में दिग्विजय सिंह ने कहा, यह मेरे हाथ में नहीं है। पार्टी फैसला करती है, लेकिन मैं एक बात कहना चाहता हूं। मैं अपनी सीट खाली कर रहा हूं। सूत्रों से पता चलता है कि दिग्विजय सिंह ने पार्टी लीडरशिप को इस फैसले के बारे में बता दिया है। अब पांच सीनियर नेता राज्यसभा की दौड़ में बताए जा रहे हैं।
राज्य में 2028 में विधानसभा चुनाव होंगे। सूत्रों के मुताबिक, दिग्विजय ने पार्टी हाईकमान से कहा है कि वह अपना पूरा समय मध्य प्रदेश को देना चाहते हैं। वह इस साल मई से लेकर अगले ढाई साल तक, यानी विधानसभा चुनाव तक, अलग-अलग चरणों में राज्य का दौरा करके कांग्रेस के लिए ज़मीन तैयार करेंगे। बताया जाता है कि दिग्विजय बड़ी सभाओं और भीड़भाड़ वाले इवेंट्स के बजाय विधानसभा और ब्लॉक लेवल पर छोटी मीटिंग्स करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, दिग्विजय ने अपनी स्ट्रैटेजी का खुलासा नहीं किया है।

अनुसूचित जाति के नेता को राज्यसभा भेजने की मांग
कांग्रेस पार्टी के अंदर राज्यसभा सीट को लेकर अंदरूनी खींचतान शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दिग्विजय को चिट्ठी लिखकर राज्यसभा में अनुसूचित जातियों को प्रतिनिधित्व देने की मांग की है। अहिरवार ने लेटर में कहा कि दिग्विजय ने हाल ही में भोपाल डिक्लेरेशन से जुड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसी शेड्यूल्ड कास्ट/शेड्यूल ट्राइब के मुख्यमंत्री बनने की संभावना पर जो खुशी जताई, वह सोशल जस्टिस के प्रति उनके कमिटमेंट को दिखाता है। इसी भावना के मुताबिक, अब शेड्यूल्ड कास्ट को राज्यसभा में भी मौके मिलने चाहिए।
अब राज्यसभा का गणित
दिग्विजय के मना करने के बाद खाली होने वाली राज्यसभा सीट पर कई बड़े MP की नजर है। पूर्व CM कमलनाथ, PCC चीफ़ जीतू पटवारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व मंत्री और CWC मेंबर कमलेश्वर पटेल और पूर्व MP मीनाक्षी नटराजन राज्यसभा सीट की रेस में हैं। कमलनाथ को ट्रेज़रर पद के साथ-साथ राज्यसभा भेजने पर भी चर्चा चल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजे जाने की संभावना है।
पार्टी के अंदर कमलनाथ को नेशनल ट्रेजरर बनाने और उन्हें राज्यसभा भेजकर सेंट्रल पॉलिटिक्स में एक्टिव रोल देने पर भी चर्चा चल रही है। कमलनाथ केंद्र सरकार में कई अहम पदों पर रह चुके हैं, जिनमें सेंट्रल मिनिस्टर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, सेंट्रल मिनिस्टर ऑफ़ अर्बन डेवलपमेंट, सेंट्रल मिनिस्टर ऑफ़ पार्लियामेंट्री अफेयर्स, सेंट्रल मिनिस्टर ऑफ़ स्टेट फॉर एनवायरनमेंट एंड फॉरेस्ट्स (इंडिपेंडेंट चार्ज), और सेंट्रल मिनिस्टर ऑफ़ टूरिज़्म (एडिशनल चार्ज) शामिल हैं। वह लगातार नौ बार छिंदवाड़ा से लोकसभा MP रहे हैं।
कमलनाथ दिसंबर 2018 से मार्च 2020 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। वह मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रेसिडेंट भी रह चुके हैं। वह कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के मेंबर भी हैं और पार्टी के सीनियर स्ट्रैटेजिस्ट में से एक माने जाते हैं।
कहीं न कहीं पार्टी पर दबाव बनाने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पॉलिटिक्स में जो कहा जाता है, वह हमेशा नहीं होता। दिग्विजय की मौजूदा एक्टिविज्म को देखें, चाहे वह RSS को लेकर उनके ट्वीट हों या मध्य प्रदेश में लगभग खत्म हो चुके दलित एजेंडे को फिर से जिंदा करने की उनकी कोशिश, यह पार्टी पर दबाव बनाने की कोशिश है। वह जब तक पॉलिटिक्स में हैं, मेनस्ट्रीम में बने रहना चाहते हैं। कांग्रेस में आई नई पीढ़ी उनकी राह में रुकावट बन रही है। इस बीच, राहुल गांधी का रवैया भी उन्हें पीछे खींच रहा है।
