भोपाल। मध्य प्रदेश में श्रम विभाग का नाम जल्द ही बदला जा सकता है। इसका नाम बदलकर श्रम शक्ति विभाग किया जा सकता है। विभाग की भविष्य की चुनौतियों और बदलती कार्यबल जरूरतों को पूरा करने के लिए यह बदलाव से भी गुजरने वाला है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्रक्रिया अभी शुरुआती स्टेज में है और इसे फाइनल होने में समय लगेगा। सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत चल रही है।
इससे पहले, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विभाग की समीक्षा बैठक में बदलाव का सुझाव दिया था, यह देखते हुए कि नाम बदलना इसका बस एक छोटा सा पहलू है।
मेंटल हेल्थ जैसे मॉडर्न मुद्दों पर भी विचार किया जा रहा है। लेबर वर्कफोर्स से जुड़ी नई असलियतें सामने आ रही हैं, जैसे यह पक्का करना कि वर्कर तय टाइम फ्रेम में काम करें और काम बांटने की स्ट्रेटेजी का रिव्यू करना।
इस काम का मकसद डिपार्टमेंट को मॉडर्न हालात के हिसाब से फिर से बनाना और इसे नए लेबर कोड के साथ अलाइन करना है। सूत्रों ने कहा कि यह पहल समाज की ज़रूरतों के हिसाब से पॉजिटिव असर डालने के लिए डिजाइन की गई है।
डिपार्टमेंट का नाम बदलकर श्रम शक्ति करने का एक फॉर्मल प्रपोजल बनाया गया है और इसे मंजूरी के लिए विभागीय मंत्री प्रहलाद पटेल को भेजा जाएगा। प्लान से वाकिफ एक अधिकारी ने कहा कि लेबर डिपार्टमेंट शब्द का ट्रेडिशनल मतलब सिर्फ फिजिकल लेबरर्स के लिए है, लेकिन आज लेबर की डेफिनिशन बड़ी है, स्किल्ड प्रोफेशनल्स भी शामिल हैं।

मप्र में श्रम शक्ति
श्रमिक कल्याण और नई नीतियां (2025):
श्रम संहिता 2025 (Labour Codes): 21 नवंबर 2025 से लागू नए लेबर कोड के तहत, नौकरी खोने वाले श्रमिकों को 15 दिनों की मजदूरी के बराबर ‘पुनः कौशल निधि’ मुआवजा और सामाजिक सुरक्षा का अधिकार मिलेगा।
श्रम शक्ति नीति 2025: इस नई नीति का उद्देश्य अगले 5 वर्षों में महिला श्रम भागीदारी को 35% तक बढ़ाना है। यह नीति गिग वर्कर्स (Zomato, Swiggy आदि) के लिए पेंशन और बीमा जैसे लाभ सुनिश्चित करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।
ई-श्रम पोर्टल: ई-श्रम पंजीकरण के माध्यम से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल लाभ प्रदान किए जा रहे हैं।
सहायता योजनाएं: मध्य प्रदेश सरकार ने संबल योजना के तहत हजारों श्रमिक परिवारों को करोड़ों की सहायता राशि सीधे बैंक खातों में स्थानांतरित की है।
न्यूनतम मजदूरी दरें (अप्रैल 2024 – मार्च 2025):
मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल 2024 से संशोधित न्यूनतम वेतन दरें प्रभावी हैं:
अकुशल (Unskilled): लगभग 11,850 - 12,150 प्रति माह।
अर्द्धकुशल (Semi-skilled): लगभग 12,846 - 13,146 प्रति माह।
कुशल (Skilled): लगभग 14,569 -14,869 प्रति माह।
उच्च कुशल (Highly Skilled): लगभग 16,194 - 16,494 प्रति माह।
(नोट: न्यूनतम मजदूरी में परिवर्तनशील महंगाई भत्ता शामिल है जो 31 मार्च 2025 तक लागू है)।
प्रमुख पहल:
श्रमोदय विद्यालय: श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए विशेष विद्यालय।
डिजिटल पारदर्शिता: श्रम कल्याण मंडल द्वारा 97% से अधिक सहायता राशि ऑनलाइन प्रदान की जा रही है।
- प्रमुख सांख्यिकीय आंकड़े (PLFS 2023-24 और 2025 अनुमान)
बेरोजगारी दर: मध्य प्रदेश में बेरोजगारी दर 1.6% दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत (3.2%) से काफी कम है।
श्रम शक्ति भागीदारी दर (LFPR): राज्य की महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और यह 2017-18 से राष्ट्रीय अनुमानों से ऊपर बनी हुई है।
कार्यबल जनसंख्या अनुपात (WPR): अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान शहरी क्षेत्रों में कार्यबल भागीदारी बढ़कर 53.1% हो गई है, जो पिछली तिमाही के 52.2% से अधिक है।
- क्षेत्रीय वितरण (Working Population Sector-wise)
मध्य प्रदेश की अधिकांश श्रम शक्ति कृषि और प्राथमिक क्षेत्रों पर निर्भर है।
कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन: 59.8%
सेवा क्षेत्र (Services): 21.9%
निर्माण (Construction): 11.1%
- न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ता (2024-25)
मध्य प्रदेश सरकार ने 1 अक्टूबर 2024 से 31 मार्च 2025 तक की अवधि के लिए परिवर्तनशील महंगाई भत्ते (VDA) में 50 प्रति माह की वृद्धि की है।
कुल महंगाई भत्ता (VDA): 2275 प्रति माह या 87.50 प्रतिदिन देय है।
न्यूनतम वेतन: अकुशल श्रमिकों के लिए 1450 और कुशल श्रमिकों के लिए 1750 (2019 आधार पर) के पुनरीक्षित वेतन दरों को अद्यतन किया गया है।
- सरकारी योजनाएं और पहल
मुख्यमंत्री जन सेवा/संबल योजना: दिसंबर 2025 में मुख्यमंत्री द्वारा 7227 श्रमिक परिवारों के खातों में 160 करोड़ की सहायता राशि सीधे ट्रांसफर की गई है।
श्रम शक्ति नीति 2025: नई नीति ‘श्रम की गरिमा’ और डिजिटल पारदर्शिता पर केंद्रित है, जिसमें 29 श्रम कानूनों को 4 संहिताओं (Codes) में समेकित किया गया है।
स्किलिंग (Skilling): PMKVY के तहत लाखों युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है, और औद्योगिक क्षेत्रों में आधुनिक श्रम कल्याण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
