नई दिल्ली। दुनिया की नजरें वेस्ट एशिया में चल रहे बड़े झगड़े पर टिकी हैं। सभी देश अपने-अपने डिप्लोमैटिक तरीकों के हिसाब से बैलेंस्ड तरीके से जवाब दे रहे हैं। भारत भी खाड़ी देशों में 10 मिलियन भारतीयों की सुरक्षा को एक्टिव रूप से पक्का कर रहा है, और पिछले 48 घंटों में PM नरेंद्र मोदी ने आठ खाड़ी देशों से बात की है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इस बीच, कांग्रेस नेता भारत सरकार के रवैये, खासकर खामेनेई की मौत पर उसकी चुप्पी की आलोचना कर रहे हैं। BJP कैंप ने भी इतिहास के कुछ पन्ने पलटकर कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिश की है।
सवाल यह है कि जब 2011 में NATO की बमबारी में लीबिया के तानाशाह गद्दाफी को मारा गया था, तब UPA सरकार चुप क्यों थी? उस समय भारत के भी लीबिया के साथ मजबूत रिश्ते थे। असल में, ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई को US और इज़राइल के जॉइंट ऑपरेशन में मार दिया गया था।
खामेनेई के साथ एकजुटता दिखाने के लिए देश भर के अलग-अलग शहरों में शिया मुसलमानों के प्रदर्शनों का धार्मिक आधार हो सकता है, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने सीधे तौर पर भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। ईरान के साथ भारत के अच्छे रिश्तों का हवाला देते हुए, इंसानियत की दुहाई दी जा रही है। मुस्लिम समुदाय का राजनीतिक पहलू भी इसमें शामिल है।
BJP के सीनियर नेताओं का कहना है कि यह अंदरूनी राजनीति का मामला नहीं है जिस पर कांग्रेस या दूसरी विपक्षी पार्टियों के साथ सीधी राजनीतिक बहस की ज़रूरत हो, बल्कि कांग्रेस पार्टी को पीछे मुड़कर देखना चाहिए और सच समझना चाहिए।
BJP सूत्रों का कहना है कि जब 2011 में NATO की बमबारी से भागते समय लीबिया के तानाशाह गद्दाफी को मार दिया गया था, तो UPA सरकार ने कोई कमेंट नहीं किया था। न तो उसने कोई शोक संदेश जारी किया और न ही कोई रिएक्शन दिया। उस समय, भारत के लीबिया के साथ मज़बूत रिश्ते थे, और UPA सरकार के ताकतवर मंत्री प्रणब मुखर्जी समेत सात मंत्रियों ने 2004 से 2007 के बीच लीबिया का दौरा किया था।
क्या तब UPA सरकार गलत थी, या अब मोदी सरकार गलत है? भाजपा नेताओं का कहना है कि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को नजरअंदाज कर राजनीति में शामिल होना सही नहीं है।
कैसे मारा गया था गदृाफी
लीबिया के पूर्व तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी की मृत्यु 20 अक्टूबर 2011 को उनके गृहनगर सिरते (Sirte) में हुई थी। उनके शासन के 42 वर्षों का अंत ‘अरब स्प्रिंग’ के दौरान हुए एक गृहयुद्ध और नाटो (NATO) के सैन्य हस्तक्षेप के बाद हुआ।
मौत की परिस्थितियां
पकड़े जाना: गद्दाफी सिरते से भागने की कोशिश कर रहे थे, जब उनके काफिले पर नाटो के विमानों ने हमला किया। वह घायल अवस्था में एक नाले (ड्रैनेज पाइप) में छिपे हुए पाए गए, जहां विद्रोहियों ने उन्हें पकड़ लिया।
यातना और हत्या: पकड़े जाने के बाद उनके साथ गंभीर मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया। वीडियो फुटेज और रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें विद्रोहियों द्वारा सड़कों पर घसीटा गया और अंततः सिर या पेट में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई।
विवाद: आधिकारिक तौर पर लीबिया की अंतरिम सरकार (NTC) ने दावा किया था कि वह क्रॉसफ़ायर में मारे गए, लेकिन मानवाधिकार संगठनों (जैसे Human Rights Watch) ने इसे एक “युद्ध अपराध” और “न्यायेतर हत्या” (Extrajudicial Killing) करार दिया।
हालिया घटनाक्रम (गद्दाफी परिवार)
सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की हत्या: गद्दाफी के सबसे प्रमुख बेटे और उनके उत्तराधिकारी माने जाने वाले सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की हाल ही में फरवरी 2026 में जिंटान (Zintan) शहर में उनके घर पर अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई है। वह फिर से राजनीति में सक्रिय होने की कोशिश कर रहे थे।
गद्दाफी का शासनकाल (1969-2011)
गदृाफी ने 1969 में मात्र 27 साल की उम्र में तख्तापलट कर सत्ता हासिल की थी। उनके शासन में लीबिया ने तेल भंडार के कारण काफी आर्थिक प्रगति की और अफ्रीका के सबसे अमीर देशों में शामिल हुआ, लेकिन उन पर मानवाधिकारों के उल्लंघन और तानाशाही के गंभीर आरोप भी रहे।
