नई दिल्ली। भारत के 10 सबसे अमीर मंदिरों की संपत्ति 9 लाख करोड़ से ज्यादा पहुंच गई है। ग्लोबल वेल्थ इंडेक्स-2026 के अनुसार, तिरुपति बालाजी मंदिर 3.38 लाख करोड़ की संपत्ति के साथ दुनिया का तीसरा सबसे अमीर धर्मस्थल बन चुका है। इसके पास मौजूद संपत्ति साइप्रस, आइसलैंड और एस्टोनिया जैसे देशों की जीडीपी से भी अधिक है। यहां हर दिन औसतन 1 से 5 करोड़ का चढ़ावा आता है, जिसमें 17 मार्च को एक दिन में 4.88 करोड़ की राशि चढ़ाई गई थी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!पद्मनाभस्वामी मंदिर का अनमोल खजाना
केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर प्राचीन खजाने के मामले में सबसे अमीर है। इसकी संपत्ति का 99′ हिस्सा ‘प्राचीन खजानेÓ के रूप में है, जिसमें सोने की मूर्तियां, सिक्के और हीरे शामिल हैं। आज इसकी बाजार मूल्य 2 लाख करोड़ से अधिक है और इसे सरकार और सुप्रीम कोर्ट द्वारा संरक्षण मिल रहा है।

संपत्ति में बढ़ोतरी का कारण
तिरुपति की संपत्ति में पिछले 2 सालों में 35′ की वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण सोने की कीमतों में बढ़ोतरी है। 2 साल पहले सोने का मूल्य 65 हजार प्रति 10 ग्राम था जो अब 1.50 लाख है। इस तरह से तिरुपति मंदिर की संपत्ति में काफी इज़ाफा हुआ है। पद्मनाभस्वामी की संपत्ति 100′ और जगन्नाथ पुरी मंदिर की 50′ बढ़ी है।
मंदिरों का नकद दान और निवेश
इन मंदिरों में नकद दान में केवल 10 से 12′ की बढ़ोतरी हुई है। तिरुपति मंदिर की आय का एक बड़ा हिस्सा 11 टन सोने के भंडार से मिलने वाले ब्याज से आता है, जो देश के विभिन्न बैंकों में जमा है।
जगन्नाथ पुरी मंदिर की विशाल संपत्तियां
जगन्नाथ पुरी मंदिर के पास 60 हजार एकड़ से अधिक जमीन है, जो ओडिशा के 30 में से 24 जिलों में फैली हुई है। इसके अलावा, 6 राज्यों में मंदिर की 395 एकड़ जमीन मौजूद है। मंदिर की संपत्तियों का कुल मूल्य 1.2 लाख करोड़ तक पहुंचता है।
राम मंदिर में दान की बाढ़
राम मंदिर में रोजाना एक करोड़ से ज्यादा का दान मिल रहा है। पिछले दो वर्षों में अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की स्थिति में तेजी से बदलाव आया है। इस मंदिर की आय का मुख्य स्रोत दान और बैंक डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज है। यहां की अचल संपत्तियों में 70 एकड़ का मुख्य परिसर और अन्य अधिग्रहित भूमि शामिल है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की भव्य संरचना की निर्माण लागत 1,800 करोड़ से अधिक है, जो इसे 6,000 से 8,000 करोड़ तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त है।
