नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद को बताया कि 2016 से अब तक देश में 11 एयरलाइंस बंद हो चुकी हैं। नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि इन एयरलाइंस के बंद होने की मुख्य वजहें फाइनेंशियल दबाव, एयरक्राफ्ट की कमी (एयरक्राफ्ट की उपलब्धता) और इंटरनल मैनेजमेंट के मुद्दे थे। हालांकि, उनके जवाब में पिछले 11 सालों में बंद हुई एयरलाइंस का जिक्र नहीं था।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि भारत का एविएशन सेक्टर डीरेगुलेटेड (सरकारी कंट्रोल से बाहर) है, जहां एयरलाइंस पूरी तरह से कमर्शियल बेसिस पर काम करती हैं। इसलिए, कंपनियों का ऑपरेशन और फाइनेंशियल फैसले मार्केट की स्थितियों पर निर्भर करते हैं। उन्होंने कहा कि एविएशन सेक्टर में भारत सरकार की भूमिका इंडस्ट्री में बैलेंस बनाए रखने और यात्रियों के हित में नीतियां बनाने तक ही सीमित है।
सरकार ने यह भी कहा कि भारत के एविएशन सेक्टर में एयरलाइंस के मर्जर और कंसोलिडेशन का ट्रेंड तेजी से उभरा है। उदाहरण के लिए, एयर एशिया इंडिया को एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ मर्ज कर दिया गया है। टाटा SIA एयरलाइंस लिमिटेड, जो पहले विस्तारा ब्रांड के तहत काम करती थी, अब पूरी तरह से एयर इंडिया के साथ मर्ज हो गई है।

किंगफिशर पर 380.51 करोड़ बकाया
इससे साफ पता चलता है कि छोटी और मीडियम साइज की एयरलाइंस के लिए भारतीय एविएशन सेक्टर में टिके रहना मुश्किल होता जा रहा है, जबकि बड़े ग्रुप अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं। बंद हो चुकी एयरलाइंस के बकाया के बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री मोहोल ने कहा कि किंगफिशर एयरलाइंस पर एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) का कुल 380.51 करोड़ बकाया है। इसमें 175.30 करोड़ मूलधन और 205.11 करोड़ ब्याज शामिल है।
केंद्रीय मंत्री मोहाल ने कहा कि जेट एयरवेज और गोफर्स्ट पर कोई बकाया नहीं है। दूसरी ओर, ट्रूजेट पर 0.03 करोड़ बकाया है। इस एयरलाइन ने फरवरी 2022 में ऑपरेशन बंद कर दिया। किंगफिशर एयरलाइंस 2012 में बंद हो गई। जेट एयरवेज ने फाइनेंशियल दिक्कतों के बाद 2019 में ऑपरेशन बंद कर दिया। गोफर्स्ट को भी फाइनेंशियल दिक्कतों के कारण 2024 में ऑपरेशन बंद करना पड़ा।
एयरलाइंस बंद होने के मुख्य कारण
- भारी कर्ज और कमजोर फाइनेंस
एयरलाइन बिजनेस में मुनाफा बहुत कम होता है
कई कंपनियां ज्यादा विस्तार (expansion) के लिए कर्ज ले लेती हैं
जब कमाई कम और खर्च ज्यादा होता है, कंपनी डूब जाती है यही कारण कई भारतीय एयरलाइंस के साथ हुआ। - महंगा ईंधन (Fuel Cost)
एविएशन फ्यूल कुल खर्च का 30–40% होता है
कीमत बढ़ते ही एयरलाइंस का घाटा बढ़ जाता है - जबरदस्त प्रतिस्पर्धा (Competition)
सस्ती टिकट के लिए कंपनियां आपस में कीमत कम करती रहती हैं
इससे कमाई घटती है और नुकसान बढ़ता है - बाहरी संकट (COVID, युद्ध आदि)
कोरोना के दौरान फ्लाइट्स बंद, आय लगभग शून्य
लेकिन खर्च (सैलरी, लीज, मेंटेनेंस) चलता रहा इसी वजह से दुनिया भर में कई एयरलाइंस बंद हुईं। - खराब मैनेजमेंट
जरूरत से ज्यादा विमान खरीदना
गलत रूट प्लानिंग
खर्च कंट्रोल न कर पाना, गलत फैसले कंपनी को जल्दी नुकसान में ले जाते हैं। - लीज पर विमान और भुगतान की समस्या
ज्यादातर एयरलाइंस विमान किराए (lease) पर लेती हैं
पैसे न देने पर विमान वापस ले लिए जाते हैं - मांग में बदलाव
यात्री या तो सस्ती फ्लाइट चुनते हैं या प्रीमियम
बीच वाली (mid-level) एयरलाइंस को नुकसान होता है - सरकारी टैक्स और नियम
भारत में एविएशन फ्यूल पर ज्यादा टैक्स
एयरपोर्ट चार्ज और नियमों का खर्च, इससे ऑपरेशन महंगा हो जाता है। - कैश फ्लो की कमी
एयरलाइंस को रोज पैसा चाहिए
टिकट बिक्री घटते ही तुरंत संकट आ जाता है - मर्जर या बंद होना
कुछ एयरलाइंस पूरी तरह बंद नहीं होतीं
बल्कि दूसरी कंपनी में मिल जाती हैं या रीब्रांड हो जाती हैं
भारत के उदाहरण
भारत में भी कई एयरलाइंस बंद हुईं, जैसे:
Jet Airways
Go First
Air Costa
Air Odisha
यानी एयरलाइन बिजनेस बहुत जोखिम भरा है, क्योंकि:
खर्च बहुत ज्यादा
मुनाफा बहुत कम
और ऊपर से संकट (COVID, fuel price, competition)
इसलिए छोटी गलती भी एयरलाइन को बंद कर सकती है।
