भोपाल। मध्य प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) में बाघों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। 4 अप्रैल 2026 की शाम को मटकुली वन परिक्षेत्र के नयाखेड़ा बीट में एक 4 माह के बाघ शावक का शव बरामद हुआ है। इस घटना के साथ ही पिछले 9 महीनों में कुल 5 बाघों की मौत का मामला सामने आया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मौत का कारण
वन विभाग की प्राथमिक जांच और घटनास्थल के निरीक्षण के अनुसार, शावक की मौत बाघों के आपसी संघर्ष (Territorial Fight) में हुई है। घटनास्थल पर नर और मादा बाघों के पदचिह्न मिले हैं। साथ ही, घटना के समय इलाके में दो बाघों के जोर-जोर से दहाड़ने की आवाजें सुनी गई थीं। शावक के शरीर पर चोट के निशान भी पाए गए हैं।
वनरक्षक और अन्य कर्मचारियों ने रात भर इलाके की निगरानी की और 5 अप्रैल को अधिकारियों की मौजूदगी में शव का पंचनामा व पोस्टमार्टम किया गया।
पिछले 9 महीनों में 5 मौतें
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में पिछले कुछ समय से बाघों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। हालिया शावक की मौत को मिलाकर पिछले 9 महीनों में यहां 5 बाघ अपनी जान गंवा चुके हैं।
हालिया अन्य मामले
मार्च 2026 के अंत में एक रेडियो कॉलर वाली बाघिन की मौत का मामला भी चर्चा में रहा था, जिसमें शिकार और बिजली के करंट की आशंका के चलते 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा
मध्य प्रदेश, जिसे ‘टाइगर स्टेट’ का दर्जा प्राप्त है, वहां साल 2025-26 के दौरान बाघों की लगातार हो रही मौतें (विशेषकर शावकों की) वन्यजीव विशेषज्ञों और संरक्षणवादियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं।
मप्र में 2025 में 55 बाघों की मौत
मध्य प्रदेश (MP) में हाल के वर्षों में बाघों की मृत्यु के आंकड़े चिंताजनक रहे हैं।
साल 2025 राज्य के लिए सबसे घातक रहा, जहां 55 बाघों की मौत दर्ज की गई, जो 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ शुरू होने के बाद से अब तक का सर्वाधिक वार्षिक आंकड़ा है।
मध्य प्रदेश में बाघों की मृत्यु: वर्षवार आंकड़े
वर्ष बाघों की मृत्यु (संख्या) मुख्य बिंदु
2026 (अब तक) 09 जनवरी में ही 7 बाघों की मौत दर्ज हुई।
2025 55 अब तक का रिकॉर्ड उच्चतम स्तर; 11 मौतें अप्राकृतिक थीं।
2024 46 निरंतर वृद्धि का संकेत।
2023 45 संरक्षण प्रयासों के बावजूद संख्या में बढ़ोतरी।
2022 43 अखिल भारतीय बाघ गणना के अनुसार MP में 785 बाघ थे।
2021 34 5 साल के आंकड़ों में तुलनात्मक रूप से कम।
मौतों के मुख्य कारण
आधिकारिक रिपोर्टों और वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, इन मौतों के पीछे कई कारण रहे हैं।
प्राकृतिक कारण: वृद्धावस्था और आपसी क्षेत्रीय लड़ाई (Territorial Fights)।
अप्राकृतिक कारण: शिकार (Poaching), खेतों में अवैध इलेक्ट्रिक फेंसिंग (करंट), जहर देना और सड़क/रेल दुर्घटनाएं।
संरक्षण की कमी: कई मौतें टाइगर रिजर्व के बाहर उन क्षेत्रों में हुईं जहाँ सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है।
मप्र में 785 बाघ
2022 की गणना के अनुसार, मध्य प्रदेश 785 बाघों के साथ भारत का “टाइगर स्टेट” बना हुआ है। वर्तमान में राज्य में 9 टाइगर रिजर्व हैं, जिनमें कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और हाल ही में घोषित माधव नेशनल पार्क शामिल हैं।
