वॉशिंगटन। आर्टेमिस II (Artemis II) नासा (NASA) का एक ऐतिहासिक मिशन है, जिसे 2 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह 50 से अधिक वर्षों (1972 के अपोलो 17 के बाद) में चंद्रमा के पास जाने वाला पहला मानवयुक्त मिशन है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ये रिकार्ड
दूरी का रिकॉर्ड: 6 अप्रैल 2026 को, आर्टेमिस II के चालक दल ने पृथ्वी से 248,655 मील (लगभग 4,00,000 किमी) की दूरी पार कर अपोलो 13 द्वारा बनाए गए 54 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया।
चंद्रमा के सबसे करीब: मिशन ने 7 अप्रैल 2026 को चंद्रमा के सबसे करीबी बिंदु (लगभग 4,700 मील या 7,600 किमी की दूरी) को छुआ।
पृथ्वी की ओर वापसी: चंद्रमा के पीछे के हिस्से (Far Side) से गुजरने के बाद अंतरिक्ष यान अब सुरक्षित रूप से पृथ्वी की ओर लौट रहा है।
मिशन का विवरण
उद्देश्य: यह एक 10-दिवसीय “लूनर फ्लाईबाई” मिशन है। इसका मुख्य लक्ष्य चंद्रमा पर उतरना नहीं, बल्कि अंतरिक्ष यात्रियों के लिए गहरे अंतरिक्ष (Deep Space) में जीवन रक्षक प्रणालियों और ओरियन अंतरिक्ष यान की क्षमताओं का परीक्षण करना है।
रॉकेट और यान: इसे नासा के सबसे शक्तिशाली रॉकेट स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) के जरिए फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था। अंतरिक्ष यात्री ओरियन (Orion) कैप्सूल में सवार हैं।
चालक दल (Crew)
इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जिनमें कई “पहली बार” होने वाली उपलब्धियां जुड़ी हैं।
रीड वाइजमैन (Reid Wiseman): कमांडर (USA)
विक्टर ग्लोवर (Victor Glover): पायलट (गहरे अंतरिक्ष मिशन पर जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति)
क्रिस्टिना कोच (Christina Koch): मिशन स्पेशलिस्ट (चंद्रमा के करीब जाने वाली पहली महिला)
जेरेमी हैनसन (Jeremy Hansen): मिशन स्पेशलिस्ट (कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के पहले यात्री जो चंद्रमा तक पहुंचे)
आगे क्या होगा?
आर्टेमिस II की सफलता आर्टेमिस III मिशन का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिसका लक्ष्य 2028 तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मनुष्यों (पहली महिला और पहले अश्वेत व्यक्ति सहित) को उतारना है।
