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मोबाइल फोन पर रील या गाना बजाने पर लगाया प्रतिबंध, रेलवे का सख्त निर्देश
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!नई दिल्ली। ट्रेन में सफर के दौरान मोबाइल फोन के स्पीकर पर तेज आवाज में गाने सुनना, वीडियो देखना या सोशल मीडिया रील चलाना अब भारी पड़ सकता है। सहयात्रियों को परेशान करने वाले ऐसे व्यवहार पर रेलवे अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है। दक्षिण रेलवे ने अपने मंडलों को यात्रियों के बीच जागरूकता अभियान चलाने और नियमों की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।
रेलवे की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक, उपद्रव करने वाले यात्री पर ₹1,000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है। परिस्थितियों के अनुसार उसे ट्रेन या रेलवे परिसर से हटाने और टिकट या पास जब्त करने की कार्रवाई भी हो सकती है। यदि कोई यात्री अधिकृत रेलवे कर्मचारी के वैध निर्देश के बावजूद उपद्रव जारी रखता है, तो छह महीने तक की साधारण कैद, ₹5,000 तक जुर्माना या दोनों सजाएं संभव हैं।
दक्षिण रेलवे ने क्यों जारी किए निर्देश?
दक्षिण रेलवे के चेन्नई स्थित मुख्यालय की वाणिज्य शाखा ने 6 अक्टूबर 2026 को पत्र जारी कर संबंधित मंडलों को यात्रियों को जागरूक करने के निर्देश दिए थे। इस पत्र में कहा गया कि रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में मोबाइल स्पीकर पर गाने या अन्य ऑडियो चलाने से सहयात्रियों की सुविधा प्रभावित होती है।
रेलवे ने निर्देश दिया कि यात्रियों को सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से स्थानीय भाषाओं, हिंदी और अंग्रेजी में नियमों की जानकारी दी जाए। साथ ही स्टेशनों और ट्रेनों में जागरूकता संबंधी नोटिस और स्टिकर लगाए जाएं। संबंधित मंडलों को 20 अक्टूबर 2026 तक क्रियान्वयन रिपोर्ट भेजने को कहा गया था।
किन कामों पर हो सकती है कार्रवाई?
- रेलवे के निर्देशों का उद्देश्य यात्रियों को ऐसी गतिविधियों से रोकना है जिनसे दूसरों को परेशानी होती है।
- मोबाइल स्पीकर पर तेज आवाज में गाने बजाना।
- बिना ईयरफोन के वीडियो या रील चलाकर सहयात्रियों को परेशान करना।
- ट्रेन के डिब्बे में जोर-जोर से फोन पर बात करना।
- अधिकृत कर्मचारी की चेतावनी के बावजूद उपद्रव जारी रखना।
ध्यान देने वाली बात यह है कि मोबाइल पर वीडियो देखना या गाना सुनना अपने-आप में अपराध नहीं है। कार्रवाई का आधार परिस्थितियों के अनुसार उपद्रव और दूसरों को होने वाली परेशानी है।
रेलवे एक्ट की धारा 145 में क्या प्रावधान है?
दक्षिण रेलवे के निर्देश में रेलवे अधिनियम की धारा 145(2)(a) का संदर्भ दिया गया है। जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) अधिनियम, 2026 के तहत संशोधित प्रावधानों के अनुसार, उपद्रव करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध निर्धारित कार्रवाई की जा सकती है।
ऐसे मामले में ₹1,000 तक जुर्माना और रेलवे परिसर से हटाए जाने की कार्रवाई संभव है। लागू परिस्थितियों में टिकट या पास भी जब्त किया जा सकता है।
यदि यात्री को अधिकृत रेलवे कर्मचारी कानूनी रूप से उपद्रव बंद करने का निर्देश देता है और वह फिर भी ऐसा करता रहता है, तो छह महीने तक की साधारण कैद, ₹5,000 तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान लागू हो सकता है।
जुर्माना कौन लगा सकता है?
दक्षिण रेलवे के सर्कुलर के अनुसार, रेलवे अधिनियम के प्रावधानों के तहत टिकट परीक्षक यानी टिकट एग्जामिनर के पद से नीचे नहीं होने वाले सक्षम वाणिज्यिक कर्मचारी ₹1,000 तक का जुर्माना लगा सकते हैं।
हालांकि, कार्रवाई लागू कानून और संबंधित अधिकारी के अधिकारों के अनुसार ही की जाएगी।
क्या यह नियम पूरे भारत में लागू है?
दक्षिण रेलवे का 6 अक्टूबर का सर्कुलर उसके संबंधित मंडलों के लिए जारी किया गया था। उत्तर रेलवे और पश्चिम रेलवे ने भी यात्रियों को जागरूक करने और ऐसी गतिविधियों को रोकने के कदम उठाने की बात कही।
इसलिए खबर को केवल दक्षिण रेलवे तक सीमित एक नए कानून के रूप में समझना सही नहीं होगा। रेलवे अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई का आधार उपद्रव और लागू कानूनी शर्तें हैं, जबकि अलग-अलग रेलवे जोनों के जागरूकता अभियान उनके अपने निर्देशों के अनुसार चलाए जा सकते हैं।
यात्रियों के लिए रेलवे की सलाह
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि मोबाइल पर गाने सुनते या वीडियो देखते समय ईयरफोन का इस्तेमाल करें। फोन को साइलेंट या वाइब्रेशन मोड पर रखें, बातचीत धीमी आवाज में करें और रात के समय सो रहे यात्रियों की सुविधा का विशेष ध्यान रखें।
ट्रेन में यात्रा करते समय बुजुर्गों, बच्चों और अन्य सहयात्रियों की सुविधा का ध्यान रखना सभी यात्रियों की जिम्मेदारी है।
ये हो सकती है कार्रवाई
ट्रेन में मोबाइल स्पीकर पर तेज आवाज में गाने, वीडियो या रील चलाकर दूसरों को परेशान करने पर रेलवे अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है। उपद्रव की स्थिति में ₹1,000 तक जुर्माना और हटाए जाने की कार्रवाई संभव है। चेतावनी के बाद भी उपद्रव जारी रहने पर छह महीने तक की साधारण कैद या ₹5,000 तक जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं।
