–राजधानी में तीन प्रमुख चौराहे प्रतिबंधित
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में धरना-प्रदर्शन और आंदोलन को लेकर पुलिस प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। पॉलिटेक्निक चौराहा, आकाशवाणी चौराहा और किलोल पार्क चौराहे सहित इनके बीच के निर्धारित क्षेत्रों में धरना, प्रदर्शन, हड़ताल और पुतला दहन जैसी गतिविधियों पर दो महीने के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। पुलिस आयुक्त संजय कुमार की ओर से 19 अक्टूबर को जारी आदेश के मुताबिक, यह प्रतिबंध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत लागू किया गया है।
इस फैसले के बाद राजधानी में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के आंदोलन को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि, फिलहाल आदेश का आधार यातायात व्यवस्था, आम नागरिकों की सुविधा और आपातकालीन सेवाओं की निर्बाध आवाजाही बताया गया है।
तीन प्रमुख चौराहों पर लागू होगा प्रतिबंध
पुलिस प्रशासन के आदेश के अनुसार, पॉलिटेक्निक चौराहा, आकाशवाणी चौराहा और किलोल पार्क चौराहा तथा इनके मध्य स्थित निर्धारित क्षेत्रों में आंदोलन संबंधी गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी। इन स्थानों पर धरना-प्रदर्शन, हड़ताल, आंदोलन और पुतला दहन जैसे कार्यक्रम आयोजित करने पर रोक लगाई गई है।
ये इलाके राजधानी के महत्वपूर्ण मार्गों से जुड़े हैं। यहां प्रदर्शन होने पर यातायात बाधित होने और आम लोगों को परेशानी होने की आशंका को प्रशासन ने फैसले का प्रमुख आधार बताया है।
एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की आवाजाही पर विशेष जोर
पुलिस प्रशासन के मुताबिक, पॉलिटेक्निक चौराहे से जुड़े मार्ग एयरपोर्ट, हमीदिया अस्पताल और गांधी मेडिकल कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंचने के लिए उपयोग किए जाते हैं। इन रास्तों पर जाम लगने से एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य जरूरी सेवाओं को परेशानी हो सकती है।
प्रशासन का कहना है कि आपातकालीन सेवाओं में देरी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। इसी वजह से प्रमुख चौराहों और उनके बीच के क्षेत्रों में प्रदर्शन संबंधी गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया गया है।
धारा 163 के तहत जारी हुआ आदेश
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत सक्षम कार्यपालक मजिस्ट्रेट या संबंधित अधिकृत अधिकारी कुछ परिस्थितियों में सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर सकते हैं। भोपाल में जारी आदेश के बारे में रिपोर्टों में बताया गया है कि इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है और इसकी अवधि दो महीने निर्धारित की गई है।
आदेश से प्रभावित व्यक्ति या संगठन नियमानुसार सक्षम प्राधिकारी के समक्ष छूट के लिए आवेदन कर सकते हैं। किसी कार्यक्रम की अनुमति या छूट मिलने की स्थिति संबंधित आदेश और प्रशासनिक निर्णय पर निर्भर करेगी।
