नई दिल्ली। बढ़ती आबादी पर लगाम लगाने के लिए चीन ने कुछ दशक पहले “वन चाइल्ड पॉलिसी” लागू की थी। अब चीन को इसका पछतावा हो रहा है। चीन में फर्टिलिटी रेट तेजी से घट रहा है। औरतें सिर्फ एक बच्चा पैदा करने पर जोर देती हैं। लेकिन, चीन ने अब फर्टिलिटी रेट बढ़ाने के लिए एक नई स्ट्रेटेजी अपनाई है। चीन ने हर औरत के लिए दो बच्चों का टारगेट रखा है। इसे पाने के लिए चीन की सरकार ने कंडोम पर टैक्स लगाया है। इसके अलावा, बर्थ कंट्रोल पिल्स पर भी एक्स्ट्रा टैक्स लगाया गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!टैक्स 1 जनवरी से लागू
चीन ने कंडोम और बर्थ कंट्रोल पिल्स पर 13 परसेंट का भारी टैक्स लगाने का ऐलान किया है। यह नियम 1 जनवरी, 2026 से लागू होगा। लेकिन, ऐसा करने वाला चीन पहला देश नहीं है। इससे पहले, सिंगापुर और साउथ कोरिया समेत कई देशों ने फर्टिलिटी रेट बढ़ाने की कोशिश की है, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ।
नॉन-गवर्नमेंटल ऑर्गनाइज़ेशन “द कन्वर्सेशन” की एक रिपोर्ट के मुताबिक, “चीन में, कंडोम के एक पैकेट की कीमत 50 युआन (लगभग $7) है। वहीं, एक महीने की गर्भ निरोधक गोली की कीमत 130 युआन ($19) है।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि 13 फीसदी टैक्स बढ़ने से भी चीनी नागरिकों की जेब पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। इसमें बस कुछ डॉलर खर्च होंगे। चीन में, 18 साल तक के बच्चे को पालने में 538,000 युआन (77,000 डॉलर) का खर्च आता है। इसलिए, कंडोम और बर्थ कंट्रोल पिल्स की कीमत काफी कम है।
फर्टिलिटी रेट बढ़ाने की कोशिशें
चीन का मकसद देश का फर्टिलिटी रेट 2.1 तक बढ़ाना है। चीन ने नेशनल चाइल्ड केयर प्रोग्राम के लिए 90 बिलियन युआन (लगभग $12.7 बिलियन) का बजट रखा है। इस प्रोग्राम के तहत, तीन साल से कम उम्र के बच्चों को लगभग 3,600 युआन (500 डॉलर) मिलेंगे।
चीन में ये है संकट
चीन एक गंभीर जनसांख्यिकीय संकट (Demographic Crisis) का सामना कर रहा है, जहाँ जन्म दर अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर बनी हुई है।
प्रमुख आँकड़े और वर्तमान स्थिति (2026)
घटती जनसंख्या: 2024 में लगातार तीसरे वर्ष गिरावट के बाद 2026 में भी चीन की कुल जनसंख्या में गिरावट जारी रहने की संभावना है।
ऐतिहासिक रूप से कम जन्म दर: चीन की प्रजनन दर (Fertility Rate) गिरकर लगभग 1.0 रह गई है, जो 2.1 की आवश्यक प्रतिस्थापन दर (Replacement Rate) से काफी कम है।
बुजुर्ग आबादी: चीन की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है। अनुमान है कि 2050 तक हर 1.6 कामगारों पर एक रिटायर्ड व्यक्ति होगा।
जनसंख्या संकट के मुख्य कारण
पालन-पोषण का उच्च खर्च: चीन बच्चों को पालने के मामले में दुनिया के सबसे महंगे देशों में से एक है। शिक्षा और आवास की बढ़ती लागत युवाओं को परिवार बढ़ाने से रोक रही है।
सामाजिक बदलाव: आधुनिक चीनी समाज में युवा देर से शादी कर रहे हैं या अविवाहित रहने का विकल्प चुन रहे हैं।
एक-बच्चा नीति का प्रभाव: दशकों तक चली ‘एक-बच्चा नीति’ (1980-2015) ने पारिवारिक संरचना और लोगों की मानसिकता को स्थायी रूप से बदल दिया है।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम (2025-2026)
चीन की सरकार ने जन्म दर बढ़ाने के लिए अब तक के सबसे व्यापक उपाय शुरू किए हैं।
वित्तीय प्रोत्साहन: 2026 में सरकार जन्म दर बढ़ाने के उपायों पर लगभग 180 बिलियन युआन ($25.8 बिलियन) खर्च कर सकती है।
राष्ट्रीय शिशु सब्सिडी: 3 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सालाना लगभग 3,600 युआन ($500) की सब्सिडी दी जा रही है।
चिकित्सा सहायता: गर्भावस्था और प्रसव के दौरान सभी चिकित्सा खर्चों (IVF सहित) को पूरी तरह से कवर करने और “शून्य खर्च” सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
नया गर्भनिरोधक कर (Contraceptive Tax): 1 जनवरी, 2026 से चीन ने कंडोम और जन्म नियंत्रण की गोलियों पर 13% मूल्य वर्धित कर (VAT) लागू किया है, ताकि जन्म दर को प्रोत्साहित किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों के बावजूद कार्यबल (Workforce) में कमी और आर्थिक मंदी चीन के लिए एक दीर्घकालिक चुनौती बनी रहेगी।
