भोपाल। डेडलाइन खत्म होने के एक हफ्ते से ज्यादा समय बाद भी मध्य प्रदेश के एक भी प्राइवेट स्कूल ने डायरेक्टोरेट ऑफ पब्लिक इंस्ट्रक्शन (DPI) के तय पोर्टल पर अपना फीस स्ट्रक्चर अपलोड नहीं किया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दरअसल, मध्य प्रदेश निजी स्कूल (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) एक्ट, 2017 के तहत सभी प्राइवेट स्कूलों को एकेडमिक सेशन शुरू होने से 90 दिन पहले फीस स्ट्रक्चर अपलोड करना जरूरी है। 2026-27 सेशन 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होने वाला है, इसलिए स्कूलों को 1 जनवरी तक DPI पोर्टल (dpimp.in) पर पिछले तीन सालों के ऑडिटेड अकाउंट के साथ फीस डिटेल्स अपलोड करनी थीं।
मनमानी फीस बढ़ोतरी और मुनाफाखोरी पर लगेगी लगाम
पोर्टल 1 अक्टूबर, 2025 को अपलोड करने के लिए खोला गया था। फीस रेगुलेशन एक्ट राज्य सरकार ने उन प्राइवेट स्कूलों पर लगाम लगाने के लिए लागू किया था, जो हर साल मनमाने ढंग से फीस बढ़ाते थे और भारी मुनाफे के लिए पेरेंट्स को लूटते थे।
क्लास के हिसाब से डिटेल देना जरूरी
एक्ट के मुताबिक, क्लास के हिसाब से फीस का डिटेल में ब्योरा देना जरूरी है, जिसमें ट्यूशन फीस, लैबोरेटरी फीस, ट्रांसपोर्ट फीस और दूसरे चार्ज शामिल हैं। स्कूलों को पिछले एकेडमिक साल की तुलना में फीस में हुई बढ़ोतरी के बारे में भी बताना होगा। ये नियम प्राइमरी से लेकर हायर सेकंडरी लेवल तक सभी प्राइवेट स्कूलों पर लागू होते हैं, चाहे वे MPBSE, CBSE, ICSE या किसी दूसरे एग्जामिनेशन बोर्ड से जुड़े हों या नहीं।
…तो देना होगा पांच गुना जुर्माना
पिछले एकेडमिक सेशन में मध्य प्रदेश के कुल 34,806 प्राइवेट स्कूलों में से सिर्फ 10,333 ने ही पोर्टल पर फीस की जानकारी अपलोड की थी, जो स्कूल ऐसा नहीं करते हैं, उन्हें पोर्टल फीस का पांच गुना जुर्माना देना होगा, जो स्टूडेंट की संख्या के आधार पर 1,000 रुपए से 5,000 रुपए तक हो सकता है, साथ ही जुर्माना भी देना होगा। हालांकि, देरी के लिए किसी भी स्कूल पर जुर्माना नहीं लगाया गया।
25000 से कम फीस वालों को मिली थी छूट
पिछले साल, राज्य सरकार ने 25,000 रुपए से कम सालाना फीस वाले स्कूलों को एक्ट के नियमों से छूट दी थी। ऐसे स्कूलों को 8 अगस्त, 2025 तक छूट के लिए एलिजिबिलिटी बताते हुए एफिडेविट अपलोड करना जरूरी था।
