सतना। प्रदेश के विंध्य में आने वाले मैहर जिले में डालमिया सीमेंट के खिलाफ किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सीमेंट कंपनी को 3600 एकड़ उपजाऊ खेती की भूमि 40 साल की लीज पर दिए जाने के खिलाफ किसानों ने कूच किया। बुधवार को करो या मरो की लड़ाई का ऐलान करते हुए किसानों ने दर्जनों ट्रैक्टरों के साथ बड़ी रैली निकाली और पुरानी कृषि उपज मंडी में किसान महापंचायत कर मोर्चा खोल दिया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दरअसल, अमरपाटन और रामपुर बाघेलान तहसील अंतर्गत करीब 3600 एकड़ उपजाऊ खेती की जमीन के अधिग्रहण से जुड़ा है। जिला प्रशासन इस जमीन को डालमिया सीमेंट कंपनी को 40 साल की लीज पर देने की तैयारी में है, जिसका स्थानीय किसान कड़ा विरोध कर रहे हैं। महापंचायत में जुटे राष्ट्रीय किसान मोर्चा के प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने दो टूक कहा कि उपजाऊ जमीन किसी सीमेंट कंपनी को देना इलाके के किसानों के भविष्य के साथ अन्याय है। किसान किसी भी हालत में यह अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे।
ट्रैक्टर और बाइक से निकले किसान, लगाए नारे
महापंचायत में सैकड़ों किसान अपने ट्रैक्टर, चार पहिया और बाइक लेकर सड़कों पर उतरे। आक्रोशित किसानों ने मैहर ढाबा बायपास से लालपुर होकर अमरपाटन मेन रोड और पुरानी कृषि उपज मंडी तक एक बड़ी रैली निकाली। इस रैली के दौरान किसानों ने भूमि अधिग्रहण और प्रशासन के खिलाफ नारे लगाते हुए एजुटता का प्रदर्शन करते हुए आक्रोश जाहिर किया।
महापंचायत में सरकारी भ्रष्टाचार और अन्य मुदृों के खिलाफ भी उठी आवाज
सीमेंट कंपनी के लिए लीज पर उपजाउ भूमि का अधिग्रहण किए जाने के विरोध में किसानों ने आगे भी लड़ाई जारी रहने और हर हाल में ऐसे कदम के विरोध में एकजुटता का समर्थन किया। इस दौरान किसानों ने क्षेत्र में बिजली कटौती सहित विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ भी आवाज बुलंद की।
पुरानी कृषि उपज मंडी परिसर में दोपहर 1 बजे से 3:30 बजे तक किसान महापंचायत के बाद किसानों ने आवारा और जंगली जानवरों से फसलों को बचाने, दूध का सपोर्ट प्राइस 9 रुपए प्रति फैट तय करने, पेंडिंग पेमेंट, बिजली विभाग की मनमानी बिल वसूली, तहसीलों और सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार और बैंकों की मनमानी जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। महापंचायत में क्षेत्र के आसपास के बड़ी संख्या में किसान जुटे।
आंदोलन का रूप ले सकता है विरोध
क्षेत्र में निजी कंपनी के लिए 3600 एकड़ उपजाउ भूमि का 40 साल के लिए अधिग्रहण के विरोध में किसानों ने मोर्चा खोलते हुए जिस तरह एकजुटता दिखाई है, इससे आगे यह विरोध आंदोलन का रूप ले सकता है। बताया जाता है कि सतना और मैहर जिले में सीमेंट कंपनियों के प्रबंधन की मनमानी और शोषण के खिलाफ किसानों का एक बड़ा वर्ग प्रभावित है। ऐसे में यह विरोध आगे और बढ़ सकता है।
किसानों का कहना है कि सीमेंट कंपनियां किसानों को लालच दिखाकर मनमानी दामों पर जमीन अधिग्रहित कर लेती हैं, साथ ही उन्हें रोजगार भी नहीं दे रही हैं, जिससे कई किसान आज भी पीड़ित हैं। किसानों का कहना है कि सीमेंट कंपनियों की मनमानी और शोषण के खिलाफ प्रशासन द्वारा भी कार्रवाई करने के बजाय निजी कंपनियों को खुल छूट दी जाती है, जिससे किसान खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
इन जगहों पर भी विरोध में प्रदर्शन
डालमिया सीमेंट (Dalmia Cement) के खिलाफ किसानों और स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश मुख्य रूप से जबरन भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण प्रदूषण से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। हालिया घटनाक्रमों में मप्र और ओडिशा के क्षेत्रों में उग्र प्रदर्शन हुए हैं।
- मध्य प्रदेश (सतना/अमरपाटन)
महापंचायत और ट्रैक्टर रैली हाल ही में 25 फरवरी 2026 को सतना जिले के अमरपाटन में सैकड़ों किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकालकर महापंचायत की।
मुख्य कारण: ग्रामीण प्रशासन और सरकार द्वारा लगभग 3,100 से 3,600 एकड़ कृषि योग्य जमीन को कंपनी को 40 साल की लीज पर देने का विरोध कर रहे हैं।
मांगें: किसान जमीन देने के बदले 1.5 करोड़ रुपए प्रति एकड़ का मुआवजा और कंपनी में स्थायी नौकरी की मांग कर रहे हैं।
- ओडिशा (सुंदरगढ़/राजगांगपुर)
‘चक्का जाम’ और हाईवे ब्लॉकेड : ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में आदिवासी समुदाय लंबे समय से डालमिया सीमेंट के खदान विस्तार (Lanjiberna Stone Mine) का विरोध कर रहा है।
ताजा तनाव (फरवरी 2025): 25 फरवरी 2026 को लांझीबरना में कंपनी द्वारा माइनिंग का काम फिर से शुरू करने पर तनाव बढ़ गया, जिसके बाद भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
हाइवे जाम: 19 जनवरी 2026 को ग्रामीणों ने राउरकेला-संबलपुर बीजू एक्सप्रेसवे पर 12 घंटे का चक्का जाम किया था।
आरोप: प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति के और नकली हस्ताक्षर के जरिए उनकी पुश्तैनी जमीन हड़प रही है।
- अन्य प्रमुख मुद्दे
प्रदूषण और स्वास्थ्य: रिपोर्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश के कडपा जिले में लोकायुक्त ने कंपनी द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण और किसानों की फसलों के डूबने की जांच के आदेश दिए हैं।
कर्नाटक (गोकाक): यहां भी किसान उपजाऊ और सिंचित भूमि के अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं, उनका दावा है कि कंपनी ने पहले अधिग्रहित भूमि का उपयोग निर्धारित समय सीमा में नहीं किया है।
