भोपाल। देश में भ्रष्टाचार को लेकर आंदोलन होते रहे हैं। केंद्र सरकार के साथ मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की बात करती है, लेकिन मैदानी हकीकत इससे उलट है। मौजूदा सरकार के आंकड़े ही इसकी सच्चाई से पर्दा उठा रहे हैं। हालांकि, जांच एजेंसियां ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ समय—समय पर कार्रवाई करती हैं, लेकिन इसके बावजूद भ्रष्टाचार के मामलों में कमी नहीं आ रही है। हर दिन रिश्वतखोरी के मामले ट्रेप हो रहे हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दरअसल, मध्य प्रदेश में लोकायुक्त भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कसने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहा है। हर दूसरे दिन लोकायुक्त राज्य में कहीं न कहीं किसी कर्मचारी या अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ता है, लेकिन इसके बावजूद भ्रष्ट अधिकारी बाज नहीं आ रहे हैं और रिश्वतखोरी जारी है। लोकायुक्त पुलिस ने 2025 में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है, और की गई कार्रवाई के आंकड़े अब सामने आए हैं, जो वाकई चौंकाने वाले हैं।
हर महीने इतने भ्रष्ट अधिकारी पकड़े गए
2025 में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए 229 अधिकारियों और कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। औसतन, इसका मतलब है कि लोकायुक्त ने हर महीने 19 भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़ा, जिसमें कर्मचारी और अधिकारी दोनों शामिल हैं। भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सबसे ज़्यादा मामले राजस्व, पंचायत और ग्रामीण विकास विभागों से जुड़े थे। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी भी स्तर पर कोई नरमी नहीं बरती जा रही है।
एमपी में अपर कलेक्टर और तहसीलदार भी रिश्वत लेते पकड़े गए
लोकायुक्त के आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार सालों में ट्रैप मामलों की संख्या में उतार-चढ़ाव आया है, लेकिन कुल मिलाकर बढ़ोतरी हुई है। 2022 में 297 मामले, 2023 में 180, 2024 में 197 और 2025 में 229 ट्रैप मामले दर्ज किए गए। 2025 में दर्ज मामलों में 300 से ज़्यादा आरोपी शामिल थे, क्योंकि कई मामलों में एक से ज्यादा अधिकारी पकड़े गए थे। इन मामलों में कंप्यूटर ऑपरेटर, इंजीनियर, तहसीलदार और यहां तक कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी भी शामिल थे।
नैतिकता सिखाने वाले भी नहीं बेदाग
मध्य प्रदेश में नैतिकता सिखाने वाले शिक्षक भी रिश्वतखोरी के मामलों में पकड़े गए। यही नहीं शिक्षा, पुलिस और अन्य विभागों के अधिकारी भी लोकायुक्त के जाल में फंस रहे हैं। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े सरपंच, पंचायत सचिव और रोज़गार सहायकों को प्रमाण पत्र जारी करने और ऐसे ही अन्य कामों के बदले रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। SDM स्तर के अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया गया है।
