भोपाल। उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र में जमीन के स्थायी अधिग्रहण के लिए लाए गए लैंड पूलिंग एक्ट को आखिरकार सरकार ने वापस ले लिया है। विधायकों और भारतीय किसान संघ के लगातार विरोध के बाद शहरी विकास और आवास विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। इससे पहले, 17 नवंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भारतीय किसान संघ के अधिकारियों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री आवास पर एक बैठक हुई थी। इस बैठक में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद थे।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बैठक के बाद किसान संघ के अधिकारियों ने दावा किया था कि लैंड पूलिंग एक्ट वापस ले लिया जाएगा। हालांकि, उस समय मुख्यमंत्री की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। दो दिन बाद 19 नवंबर को सरकार ने एक संशोधन आदेश जारी किया। इसमें कहा गया था कि स्थायी भूमि अधिग्रहण अब भवन निर्माण के लिए नहीं होगा, बल्कि केवल सड़कों और नालियों जैसे बुनियादी विकास कार्यों के लिए होगा। हालांकि, भारतीय किसान संघ और कांग्रेस पार्टी ने इस संशोधन पर भी आपत्ति जताई और पूरे एक्ट को पूरी तरह से वापस लेने पर ज़ोर दिया।
दरअसल, गत 15 दिसंबर को उज्जैन उत्तर से बीजेपी विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर लैंड पूलिंग एक्ट को पूरी तरह से वापस लेने की मांग की। विधायक ने चेतावनी दी कि अगर एक्ट वापस नहीं लिया गया तो वह किसानों के विरोध प्रदर्शन में शामिल हो जाएंगे। ठीक अगले दिन, 16 दिसंबर को सरकार ने लैंड पूलिंग एक्ट को पूरी तरह से वापस लेने का आदेश जारी कर दिया। इस तरह, मुख्यमंत्री और किसान संगठनों के बीच बैठक के 29 दिन बाद सरकार ने यह फैसला लिया, जिससे सिंहस्थ क्षेत्र में लैंड पूलिंग एक्ट खत्म हो गया।
विवाद की जड़?
लैंड पूलिंग एक्ट के तहत सरकार विकास परियोजनाओं के लिए किसानों से ज़मीन अधिग्रहित करती है, फिर उस क्षेत्र का विकास करती है और उसका एक हिस्सा मालिकों को प्लॉट या विकसित ज़मीन के रूप में वापस कर देती है। सरकार का दावा है कि इससे किसानों को उनकी ज़मीन का बेहतर दाम मिलता है और शहर के लिए नियोजित विकास सुनिश्चित होता है। हालांकि, उज्जैन में किसानों को इस एक्ट पर आपत्ति यह थी कि ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया स्वैच्छिक नहीं लग रही थी, और यह साफ़ नहीं था कि उन्हें कब और कितनी विकसित ज़मीन मिलेगी। सिंहस्थ कुंभ मेले और महाकाल लोक कॉरिडोर से जुड़े इलाकों में ज़मीन की कीमतें बहुत ज़्यादा हैं, जिससे किसानों को बड़े नुकसान का डर है। कुछ गांवों में बिना सही सहमति के सर्वे और नोटिस जारी होने की खबरें भी सामने आई हैं। इन वजहों से उज्जैन में लैंड पूलिंग एक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, याचिकाएं और चुने हुए प्रतिनिधियों पर दबाव बढ़ गया है।
