नई दिल्ली/भोपाल। देश में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू करने को लेकर राज्यों में होड़ मची हुई है। केंद्र में सत्तारुढ़ भाजपा समान नागरिक संहिता को अपने चुनावी घोषणा पत्र में प्राथमिकता में रखा है। इसके तहत चुनावी राज्यों में UCC लागू करने का संकल्प दोहराया जा रहा है। हालांकि, इसके पहले भाजपा शासित उत्तराखंड, गोवा में यूसीसी लागू हो चुका है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!गुजरात में इसके लागू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। अब मध्य प्रदेश में भी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गृह विभाग को अगले 6 महीनों के भीतर विधेयक का मसौदा (Draft) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का लक्ष्य दिवाली 2026 तक इसे राज्य में प्रभावी बनाना है।
विशेषज्ञ समिति का गठन: उत्तराखंड और गुजरात के मॉडलों का अध्ययन करने के लिए जल्द ही एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई जाएगी।
समान नागरिक नियम: इसके लागू होने से शादी, तलाक, संपत्ति के अधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में सभी धर्मों के लिए एक समान कानून होगा।
महिलाओं के अधिकार: बेटियों को पिता की संपत्ति में बेटों के बराबर हक मिलेगा और बहु-विवाह पर रोक लग सकती है।
लिव-इन रिलेशनशिप: लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए जिला प्रशासन के पास पंजीकरण अनिवार्य किया जा सकता है।
आदिवासियों को रियायत: मध्य प्रदेश की बड़ी जनजातीय आबादी को देखते हुए, आदिवासियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जा सकता है ताकि उनकी परंपराएं प्रभावित न हों।
राज्य सरकार इसे आगामी मानसून सत्र (2026) में पेश करने की रणनीति बना रही है। विपक्ष (कांग्रेस) ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे बिना सामाजिक सहमति के उठाया गया कदम बताया है।

मध्य प्रदेश में UCC से जुड़े मुख्य बिंदु:
तैयारियां तेज: कैबिनेट की बैठक में सीएम ने मंत्रियों को UCC के मसौदे (Draft) पर काम करने और उत्तराखंड व गुजरात के मॉडलों का अध्ययन करने का निर्देश दिया है।
6 महीने में बिल: सरकार की योजना आगामी मानसून सत्र में या जल्द ही एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर 6 महीने के भीतर विधानसभा में UCC बिल पेश करने की है।
क्या बदलेगा: UCC लागू होने पर सभी धर्मों के लिए शादी, तलाक, संपत्ति के अधिकार और गोद लेने के नियम एक समान हो जाएंगे, जिससे पर्सनल लॉ खत्म हो जाएंगे।
चुनौतियां: राज्य में बड़ी आदिवासी आबादी है, इसलिए उनकी पारंपरिक प्रथाओं को ध्यान में रखकर ही ड्राफ्ट तैयार करना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
वर्तमान स्थिति: उत्तराखंड ने फरवरी 2024 (लागू: 2025) में इसे पास किया था, और गुजरात ने मार्च 2026 में यूसीसी बिल को मंजूरी दी है। हालांकि, विपक्षी कांग्रेस ने इसे “ध्यान भटकाने वाली रणनीति” बताते हुए सभी हितधारकों से परामर्श करने की मांग की है।
मुख्य प्रावधान (उत्तराखंड मॉडल के अनुसार)
विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य।
बहुविवाह (Polygamy) और हलाला जैसी प्रथाओं पर रोक।
बेटों और बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार।
लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण।
अनुसूचित जनजातियों (ST) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
UCC लागू करने वाले राज्य
पूर्ण रूप से लागू करने वाले राज्य
उत्तराखंड: यह स्वतंत्रता के बाद UCC लागू करने वाला भारत का पहला राज्य है। उत्तराखंड में यह कानून 27 जनवरी 2025 से लागू हो गया है।
गोवा: यहां पुर्तगाली शासन के समय से ही ‘पुर्तगाली नागरिक संहिता, 1867’ के रूप में UCC लागू है। गोवा भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ सभी धर्मों के लिए एक ही पारिवारिक कानून (Common Family Law) लंबे समय से चला आ रहा है।
गुजरात: गुजरात विधानसभा ने 25 मार्च 2026 को UCC विधेयक पारित कर दिया है। इसके साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद UCC लागू करने वाला दूसरा राज्य बन गया है।
प्रक्रियाधीन (जल्द लागू होने वाले) राज्य
मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि मध्य प्रदेश जल्द ही उत्तराखंड और गुजरात के बाद UCC लागू करने वाला तीसरा राज्य बनेगा। सरकार इसे दिवाली 2026 तक लागू करने का लक्ष्य लेकर चल रही है और इसके लिए मसौदा (Draft) तैयार करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
असम: असम सरकार भी UCC के ड्राफ्ट पर काम कर रही है और इसे जल्द ही राज्य में लागू करने की तैयारी में है।
राजस्थान: यहां भी UCC लागू करने की संभावनाओं और ड्राफ्ट पर विचार किया जा रहा है।
क्या है UCC
UCC (समान नागरिक संहिता) का अर्थ है भारत के सभी नागरिकों के लिए एक समान व्यक्तिगत कानून (personal law) होना, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के हों। वर्तमान में, विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे मामलों के लिए अलग-अलग धर्मों के अपने अलग कानून (जैसे हिंदू मैरिज एक्ट या मुस्लिम पर्सनल लॉ) हैं।
UCC की मुख्य विशेषताएं और उद्देश्य
समानता: इसका मुख्य उद्देश्य सभी धर्मों के लिए एक समान नियम बनाना है, ताकि कानूनी प्रक्रिया सरल और निष्पक्ष हो सके।
लैंगिक न्याय (Gender Justice): UCC का उद्देश्य महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार प्रदान करना है, विशेष रूप से तलाक और संपत्ति के बंटवारे के मामलों में।
संवैधानिक आधार: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को निर्देश देता है कि वह पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करे।
कवर किए जाने वाले विषय: इसमें विवाह, तलाक, गोद लेना (adoption), विरासत और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे विषय शामिल हैं।
