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UCC लागू करने का समय आ गया: सुप्रीम कोर्ट

aaptak.news28@gmail.com March 10, 2026
ucc supreeme court of india

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार 10 मार्च 2026 को कहा कि देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने का समय आ गया है। इस पर फैसला करना पार्लियामेंट का काम है, कोर्ट का नहीं। कोर्ट शरिया कानून, 1937 के कुछ सेक्शन को रद्द करने की मांग वाली एक पिटीशन पर सुनवाई कर रहा था, जिन पर मुस्लिम महिलाओं के साथ भेदभाव करने का आरोप था।

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CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा, “अगर शरिया कानून के सेक्शन रद्द कर दिए जाते हैं, तो मुस्लिम कम्युनिटी में प्रॉपर्टी के बंटवारे को लेकर कोई साफ कानून नहीं होगा। इससे कानूनी तौर पर खालीपन पैदा हो सकता है।”

कोर्टरूम LIVE:

CJI: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से बार-बार यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के लिए कहा है। अलग-अलग कम्युनिटी के अलग-अलग नियम होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम सीधे किसी कानून को गैर-कानूनी घोषित कर सकते हैं।”

पिटीशनर के वकील प्रशांत भूषण: कोर्ट यह घोषित कर सकता है कि मुस्लिम महिलाओं को पुरुषों के बराबर प्रॉपर्टी राइट्स मिलने चाहिए। अगर शरिया कानून के कुछ सेक्शन रद्द किए जाते हैं, तो ऐसे मामलों में इंडियन सक्सेशन एक्ट लागू किया जा सकता है।

बेंच: इस मुद्दे का परमानेंट सॉल्यूशन यूनिफॉर्म सिविल कोड है। लेकिन इसे लागू करने का फैसला पार्लियामेंट को लेना होगा। यह एक पॉलिसी मैटर है, और कानून बनाना पार्लियामेंट का अधिकार है।

1937 का शरिया कानून मुस्लिम फैमिली मामलों पर लागू होता है

1937 का शरिया कानून, जिसे मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट भी कहा जाता है, ब्रिटिश राज के दौरान बनाया गया एक कानून है। इसका मकसद यह पक्का करना था कि इस्लामिक कानून, यानी शरिया कानून, भारत में मुसलमानों के पर्सनल और फैमिली मामलों पर लागू हो।

इससे पहले, अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग परंपराएं थीं, जिससे अलग-अलग फैसले होते थे। इस कानून के लागू होने के बाद, शादी से जुड़े मामलों में शरिया कानून को वैलिड माना गया। (निकाह), तलाक, गुजारा भत्ता, विरासत (यानी प्रॉपर्टी का बंटवारा), वक्फ (वक्फ) और परिवार से जुड़े दूसरे मामले।

इसका मतलब है कि अगर किसी मुस्लिम परिवार में प्रॉपर्टी या शादी का झगड़ा होता है, तो कोर्ट शरिया कानून के आधार पर फैसला कर सकता है। हालांकि, यह कानून सिर्फ निजी मामलों पर लागू होता है।

चोरी, हत्या या दूसरे क्रिमिनल मामलों में देश का आम कानून लागू होता है। इस कानून पर समय-समय पर बहस होती रही है, खासकर महिलाओं के अधिकारों को लेकर, क्योंकि कुछ मामलों में महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार नहीं दिए जाते हैं।

सिर्फ उत्तराखंड में UCC लागू

अभी उत्तराखंड भारत का अकेला ऐसा राज्य है, जहां UCC लागू है। इसे वहां 28 जनवरी, 2025 को लागू किया गया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास पर इसकी घोषणा की। UCC लागू होने से राज्य में पांच नियम सख्ती से लागू हो गए। धार्मिक रीति-रिवाजों के बावजूद शादी का रजिस्ट्रेशन जरूरी है। 60 दिनों के अंदर रजिस्ट्रेशन न कराने पर 20000 रुपए तक का जुर्माना लग सकता है। शादी के लिए लड़कों की जरूरी उम्र 21 साल और लड़कियों की 18 साल है।

शादी और तलाक के कानून सभी समुदायों पर एक जैसे लागू होंगे। इसका मतलब है कि अलग-अलग धर्मों के लिए अब अलग-अलग कानून नहीं होंगे। लिव-इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है। अपनी पहचान छिपाने या धोखे से लिव-इन रिलेशनशिप में रहने पर जेल हो सकती है। बेटों और बेटियों को परिवार की प्रॉपर्टी पर बराबर अधिकार होगा।

UCC क्या है

UCC का अर्थ है यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code), जिसे हिंदी में समान नागरिक संहिता कहा जाता है। यह एक ऐसा प्रस्तावित कानून है जो भारत के सभी नागरिकों के लिए, उनके धर्म, जाति या समुदाय की परवाह किए बिना, व्यक्तिगत मामलों में एक समान नियम लागू करने की बात करता है।

UCC के मुख्य पहलू

एक समान कानून: इसके लागू होने पर विवाह, तलाक, संपत्ति का उत्तराधिकार (विरासत), और बच्चा गोद लेने जैसे मामलों में सभी धर्मों के लिए एक ही नियम होगा।

संवैधानिक आधार: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में इसका उल्लेख ‘राज्य के नीति निर्देशक तत्वों’ के अंतर्गत किया गया है, जो कहता है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।

उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य कानूनी जटिलताओं को कम करना, लैंगिक समानता लाना (विशेषकर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा) और देश में एकता को बढ़ावा देना है।

वर्तमान स्थिति:

गोवा: भारत का एकमात्र ऐसा राज्य रहा है जहाँ पुर्तगाली शासन के समय से ही एक समान नागरिक संहिता लागू है।

उत्तराखंड: आजादी के बाद UCC लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। उत्तराखंड विधानसभा ने फरवरी 2024 में इसे पारित किया और जनवरी 2025 से यह राज्य में प्रभावी हो गया है।

राष्ट्रीय स्तर: वर्तमान में केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच इस पर विचार-विमर्श जारी है। हाल ही में 10 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकारों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि UCC ही इसका स्थायी समाधान है।

UCC किन—किन देशों में लागू है

समान नागरिक संहिता (UCC) दुनिया के कई आधुनिक और धर्मनिरपेक्ष देशों में लागू है, जहां सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और विरासत जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक ही कानून होता है।

दुनिया के वे प्रमुख देश जहां UCC या उससे मिलते-जुलते कानून लागू हैं।

प्रमुख लोकतांत्रिक देश

अमेरिका (USA): यहां सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून हैं।

फ्रांस (France): यहां 19वीं सदी की शुरुआत से ही ‘नेपोलियन कोड’ लागू है, जो धर्म की परवाह किए बिना सभी के लिए समान है।

कनाडा (Canada): यहां भी धर्मनिरपेक्ष नागरिक कानून प्रचलित हैं।

जर्मनी (Germany): यहां भी एक एकीकृत नागरिक संहिता (Civil Code) लागू है।

अन्य यूरोपीय देश: रूस, पोलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लक्जमबर्ग जैसे देशों में भी समान नागरिक संहिता है।

प्रमुख मुस्लिम बहुल देश
कई मुस्लिम देशों ने भी अपने कानूनों में सुधार कर समान या लगभग समान नागरिक संहिता अपनाई है।

तुर्की (Turkey): 1920 के दशक में आधुनिकीकरण के बाद यहां धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता लागू की गई।

ट्यूनीशिया (Tunisia): यहां विवाह, तलाक और विरासत में पुरुषों और महिलाओं के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने वाला कानून है।

मलेशिया, इंडोनेशिया, और मिस्र (Egypt): इन देशों में भी व्यक्तिगत कानूनों को काफी हद तक संहिताबद्ध (Codify) किया गया है।

पाकिस्तान और बांग्लादेश: यहां मुस्लिम पारिवारिक कानूनों को संहिताबद्ध किया गया है जो पूरी मुस्लिम आबादी पर समान रूप से लागू होते हैं, हालांकि भारत की तरह यहाँ अलग-अलग समुदायों के लिए कुछ भिन्नताएं हो सकती हैं।

भारत की स्थिति

गोवा: यह भारत का एकमात्र राज्य रहा है, जहां पुर्तगाली शासन के समय से ही गोवा नागरिक संहिता (UCC) लागू है।

उत्तराखंड: फरवरी 2024 में कानून पारित कर उत्तराखंड स्वतंत्रता के बाद UCC लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है।

गुजरात: गुजरात भी इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है और इसके लागू होने के बाद वह दूसरा राज्य बन सकता है।

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