भोपाल। मध्य प्रदेश में लोकायुक्त पुलिस द्वारा फाइल किए गए लगभग 1,123 केस स्पेशल कोर्ट में निपटारे के लिए पेंडिंग हैं। इसके अलावा, 979 क्रिमिनल केस पुलिस द्वारा जांच के दायरे में हैं। मार्च 2025 में लोकायुक्त को दी गई शिकायत के बाद पूर्व चीफ सेक्रेटरी इकबाल सिंह बैंस और आजीविका मिशन के पूर्व CEO ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ कोई क्रिमिनल केस दर्ज नहीं किया गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!यह बात राज्य सरकार द्वारा बुधवार को कांग्रेस MLA प्रताप ग्रेवाल के उठाए गए एक सवाल के जवाब में राज्य विधानसभा में दिए गए लिखित जवाब में कही गई।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधानसभा में जानकारी दी कि जनवरी 2022 से जनवरी 2026 तक, स्पेशल कोर्ट ने 462 केस में आरोपियों को सज़ा दी और 270 केस में बरी कर दिया। 2025 में स्पेशल कोर्ट में कुल 1106 केस पेंडिंग थे। 2018 से जनवरी 2026 तक पावर के गलत इस्तेमाल के लिए करीब 236 क्रिमिनल केस रजिस्टर किए गए।
MLA ग्रेवाल ने बताया कि 2018-19 से जनवरी 2026 तक लोकायुक्त पुलिस को 37,967 शिकायतें मिलीं। इनमें से पुलिस ने 3,716 शिकायतों पर केस रजिस्टर किया, जो सिर्फ 9.77% है और बाकी 34,251 शिकायतों को खारिज कर दिया। 2018 से जनवरी 2026 तक 2,041 क्रिमिनल केस रजिस्टर किए गए।
चार साल बाद पेश की गईं चार्जशीट
2024 में स्पेशल कोर्ट में पेश की गई 176 चार्जशीट में से ज़्यादातर 2012 और 2017 के बीच रजिस्टर किए गए केस थे। औसतन, क्रिमिनल केस रजिस्टर होने के चार साल बाद कोर्ट में चार्जशीट पेश की गईं।
शिकायतें और FIR
MLA ग्रेवाल के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने जवाब में बताया कि लोकायुक्त पुलिस को 2019-20 में सबसे ज़्यादा शिकायतें (5,493) मिलीं, और 2024-25 में सबसे कम शिकायतें (4,183) मिलीं। सबसे ज्यादा केस, 378, 2019 में और सबसे कम केस, 152, 2020 में दर्ज किए गए।
2024 में लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज किए गए 236 क्रिमिनल केस में से 16 केस मिली शिकायतों के आधार पर दर्ज किए गए। जनवरी 2007 में फाइल की गई शिकायत पर 17 साल बाद अगस्त 2024 में क्रिमिनल केस दर्ज किया गया और 13 साल बाद जून 2024 में, यानी 11 नवंबर को फाइल की गई शिकायत पर क्रिमिनल केस दर्ज किया गया।
क्या है मामला
मध्य प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार, वर्तमान में पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और आजीविका मिशन के पूर्व सीईओ ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ लोकायुक्त में कोई FIR (प्राथमिकी) दर्ज नहीं है।
मामले के मुख्य बिंदु
जांच की स्थिति: मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें प्राप्त हुई थीं, लेकिन लोकायुक्त संगठन की जांच में अब तक कोई ठोस साक्ष्य (तथ्य) नहीं मिले हैं, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज की जा सके।
विभाग की भूमिका: रिपोर्टों के अनुसार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा लोकायुक्त को जांच के लिए आवश्यक जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जिसके कारण जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है।
शिकायत का आधार: यह मामला आजीविका मिशन में पोषण आहार वितरण, परिवहन और गुणवत्ता में लगभग 500 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसकी शिकायत पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने की थी।
अन्य जांचें: हालांकि लोकायुक्त में FIR नहीं है, लेकिन आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने पहले ललित मोहन बेलवाल और अन्य के खिलाफ मिशन में अवैध नियुक्तियों और वित्तीय अनियमितताओं के लिए अलग से मामला दर्ज किया था।
