नई दिल्ली। भारत में कॉर्पोरेट विविधता को लेकर भले ही लाख दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। आलम यह है कि देश में ज्यादातर कंपनियां पांच से भी कम संख्या में दिव्यांग लोगों को रोजगार देती हैं। यह एक गंभीर वास्तविकता है कि भारत में कॉर्पोरेट विविधता की चर्चाओं के बावजूद विकलांग व्यक्तियों (पीडब्यूडी) का कार्यबल में प्रतिनिधित्व अभी भी बहुत कम है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भारत की 2011 की जनगणना में 2.86 करोड़ लोग दिव्यांग थे। कई अध्ययनों के अनुसार, भारत में निजी क्षेत्र की कुल वर्कफोर्स में विकलांगों की हिस्सेदारी एक फीसदी से भी कम बनी हुई है। अधिकांश कंपनियां केवल कानूनी अनुपालन (जैसे सीएसआर) के लिए सीमित भर्तियां करती हैं। एनसीपीईडीपी जैसी संस्थाएं इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने का काम कर रही हैं। हालांकि, सच्ची विविधता तब आएगी, जब कंपनियां विकलांगता को ‘चैरिटी’ के बजाय ‘प्रतिभा’ (टैलेंट) के रूप में देखेंगी।

अवसंरचनात्मक बाधाएं
कई कार्यालय परिसर आज भी विकलांगों के अनुकूल नहीं हैं। रैंप, विशेष शौचालय और एक्सेसिबल सॉफ्टवेयर की कमी उन्हें मुख्यधारा से बाहर रखती है।
मानसिकता और पूर्वाग्रह
अधिकतर नियोक्ताओं के बीच यह गलत धारणा है कि विकलांग कर्मचारी कम उत्पादक होते हैं या उनके लिए बुनियादी ढांचे में बदलाव करना बहुत महंगा होगा।
कौशल का अभाव
सुलभ शिक्षा और प्रशिक्षण के अभाव के कारण कई विकलांग उम्मीदवार बाजार की मांग के अनुसार कौशल हासिल नहीं कर पाते हैं।
सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदम
नया कानून: दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 सरकारी नौकरियों में 4 फीसदी आरक्षण अनिवार्य करता है और निजी क्षेत्र को अपनी कार्यनीति में समावेशिता शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
डिजिटल अवसर: ‘वर्क फ्रॉम होम’ के बढ़ते चलन ने विकलांगों के लिए रोजगार के नए रास्ते खोले हैं, क्योंकि इससे आने-जाने की समस्या कम हुई है।
समावेशी कंपनियां: ‘सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट’ और ‘इनेबल इंडिया’ जैसे संगठन इंनेबल इंडिया के माध्यम से कंपनियों को विकलांगों को नियुक्त करने और प्रशिक्षित करने में मदद कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश में दिव्यांगों के रोजगार की स्थिति
मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में दिव्यांगों के लिए कुल 34,558 से 37,000 तक पद आरक्षित हैं। जून 2025 तक की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से लगभग 19,627 से 21,000 पद अभी भी खाली हैं।
हालिया नियुक्तियां: 2024-25 के विशेष भर्ती अभियानों के तहत रिकॉर्ड प्रगति देखी गई है, जिसमें 23,000 से अधिक दिव्यांगों को रोजगार मिलने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, अन्य रिपोर्टों के अनुसार 48 सरकारी विभागों में हाल के समय में केवल 2,610 दिव्यांगों को ही नई नियुक्तियां मिल पाई हैं।
मध्य प्रदेश में विभाग-वार स्थिति
स्कूल शिक्षा विभाग: 15,000 से अधिक आरक्षित पदों में से 6,709 पद खाली हैं।
जनजातीय कार्य विभाग: 4,858 पदों में से 2,743 पद रिक्त हैं।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग: 3,752 पदों में से 3,488 पद अभी भी खाली हैं।
सरकारे के दावे : सरकार ने रोजगार में 6% आरक्षण का प्रावधान किया है, लेकिन कई बार भर्ती प्रक्रियाओं में देरी या स्पष्ट नीति की कमी के कारण पद भरने में समस्या आती है।
