तेहरान/वॉशिंगटन। 28 मार्च 2026। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध को लगभग एक महीना (29 दिन) पूरा हो चुका है। वर्तमान में कोई भी पक्ष स्पष्ट रूप से “विजेता” नहीं बना है, और युद्ध एक खतरनाक गतिरोध (Stalemate) की स्थिति में है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सैन्य और रणनीतिक स्थिति
शुरुआत और बड़े हमले: यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए बड़े हमलों से शुरू हुआ था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का दावा किया गया है।
अमेरिका का पलड़ा: अमेरिका और इजरायल ने ईरान के हवाई क्षेत्र पर अपना दबदबा बनाया हुआ है और उसके परमाणु ठिकानों (जैसे बुशहर) और सैन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है।
ईरान का प्रतिरोध: भारी नुकसान के बावजूद ईरान पीछे नहीं हटा है। उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को आंशिक रूप से बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हैं।
नुकसान का आकलन
जान-माल की हानि: एक महीने में ईरान में लगभग 1,900 से अधिक लोग मारे गए हैं। अमेरिका के भी कम से कम 13 सैनिक इस युद्ध में अपनी जान गंवा चुके हैं।
आर्थिक प्रभाव: यह युद्ध अमेरिका के लिए बहुत महंगा साबित हो रहा है, जिसका प्रतिदिन का खर्च लगभग 7,000 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ने से कई देशों में महंगाई का खतरा बढ़ गया है।
शांति की कोशिशें और मौजूदा रुख
ट्रंप का प्रस्ताव: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को एक 15-सूत्रीय शांति योजना भेजी है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम बंद करने के बदले प्रतिबंधों में ढील देने की बात कही गई है।
ईरान की शर्तें: ईरान ने इस प्रस्ताव को “अनुचित” बताते हुए खारिज कर दिया है और अपनी 6 प्रमुख शर्तें रखी हैं।
ताजा स्थिति: ट्रंप ने हाल ही में ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को कुछ समय के लिए रोकने (Pause) का संकेत दिया है ताकि बातचीत का रास्ता निकल सके, लेकिन युद्ध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
संक्षेप में अमेरिका सैन्य रूप से अधिक शक्तिशाली दिख रहा है, लेकिन ईरान का “सहने की क्षमता” और होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण उसे युद्ध में बनाए हुए है।

इजराइल ने क्या पाया, क्या खोया
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच इस सीधे युद्ध को एक महीना पूरा हो चुका है। इस एक माह के दौरान इजराइल ने नुकसान के बजाय दुश्मन देशों पर ज्यादा कामयाबी हासिल की है।
इजराइल ने क्या पाया
शीर्ष नेतृत्व का खात्मा: युद्ध की शुरुआत में ही इजराइल और अमेरिका ने ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ (Operation Roaring Lion) के तहत ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य कमांडरों को मार गिराया, जिससे ईरानी शासन को गहरा झटका लगा।
परमाणु और सैन्य बुनियादी ढांचे की तबाही: इजराइल ने ईरान के नतांज़ (Natanz) परमाणु संयंत्र, मिसाइल उत्पादन केंद्रों और रक्षा औद्योगिक स्थलों पर सटीक हमले किए हैं।
मिसाइल खतरे में कमी: अमेरिकी आकलनों के अनुसार, ईरान की मिसाइल मारक क्षमता में लगभग 90% की गिरावट आई है। युद्ध के पहले हफ्ते में रोजाना होने वाले 90 मिसाइल हमलों की तुलना में अब यह औसत घटकर 10 मिसाइल प्रतिदिन रह गया है।
रणनीतिक सप्लाई लाइन का कटना: इजराइल ने ईरान के उत्तरी ‘बंदर अंजली’ बंदरगाह को निशाना बनाकर ईरान और रूस के बीच सैन्य और बुनियादी वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है।
इजराइल ने क्या खोया (Losses)
नागरिक और बुनियादी ढांचे की क्षति: ईरान ने जवाबी कार्रवाई में तेल अवीव और यरूशलेम जैसे घनी आबादी वाले इलाकों को क्लस्टर बमों और मिसाइलों से निशाना बनाया, जिससे रिहायशी इमारतों को नुकसान पहुँचा और नागरिक हताहत हुए।
नया युद्ध मोर्चा (यमन की एंट्री): युद्ध के एक महीने पूरे होने पर यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजराइल पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे इजराइल के दक्षिण में एक नया मोर्चा खुल गया है।
आर्थिक बोझ और वैश्विक दबाव: युद्ध के कारण इजराइल की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा है। पर्यटन और निवेश में गिरावट आई है, और वैश्विक तेल कीमतों में उछाल (ब्रेंट क्रूड $115 के पार) के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से युद्ध विराम का दबाव बढ़ रहा है।
अमेरिका के साथ वैचारिक मतभेद: हालांकि दोनों सहयोगी हैं, लेकिन अमेरिका द्वारा ईरान को दिए गए ’15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव’ और इजराइल द्वारा हमलों को तेज करने की जिद के बीच कूटनीतिक दरारें दिखाई दी हैं।
निष्कर्ष: सैन्य दृष्टिकोण से इजराइल ने ईरान की आक्रामक क्षमता को काफी हद तक पंगु बना दिया है, लेकिन क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक मोर्चे पर उसे भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
