नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने जनवरी 2025 से अब तक 30.2 करोड़ संदिग्ध IRCTC अकाउंट बंद कर दिए हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 10 दिसंबर को लोकसभा में यह घोषणा की। टिकट ब्लैक मार्केटिंग को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। जालसाज तत्काल टिकट बुक करने और उन्हें ज्यादा कीमत पर बेचने के लिए फेक ID बनाने के लिए बॉट और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते थे। इससे असली यात्रियों को टिकट नहीं मिल पाते थे।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!65% कन्फर्म तत्काल टिकट के मामलों में सुधार
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे ने फेक अकाउंट को रोकने के लिए एंटी-बॉट सॉल्यूशन लागू किए हैं, जो ट्रैफिक को फिल्टर करते हैं और असली यात्रियों को आसान टिकट बुकिंग का अनुभव देते हैं। तत्काल टिकट बुकिंग में गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सरकार ने आधार-बेस्ड OTP वेरिफिकेशन सिस्टम भी शुरू किया है।
इस सिस्टम को ऑनलाइन बुकिंग में सिस्टमैटिक तरीके से लागू किया गया है और 4 दिसंबर, 2025 तक यह 322 ट्रेनों में चालू था। केंद्र सरकार का दावा है कि इस कदम से इन ट्रेनों में कन्फर्म तत्काल टिकटों की उपलब्धता में लगभग 65% सुधार हुआ है।
तत्काल टिकट काउंटरों पर OTP सिस्टम लागू
इसी तरह रेलवे ने रिजर्वेशन काउंटरों पर भी तत्काल टिकटों के लिए OTP सिस्टम लागू किया है, जिसे दिसंबर 2025 तक 211 ट्रेनों में लागू किया गया था। मंत्री ने बताया कि संदिग्ध टिकट बुकिंग से जुड़े कई PNR की पहचान की गई है और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट की गई है।
कई लेयर सिक्योरिटी लेयर
रेलवे के टिकटिंग और साइबर सिस्टम को सुरक्षित करने के लिए, डिपार्टमेंट कई सिक्योरिटी लेयर का इस्तेमाल करता है, जिसमें नेटवर्क फायरवॉल, इंट्रूज़न प्रिवेंशन सिस्टम, एप्लीकेशन डिलीवरी कंट्रोलर और वेब एप्लीकेशन सिक्योरिटी शामिल हैं।
साइबर अटैक रोकने के लिए लगातार मॉनिटरिंग
रेल मंत्री वैष्णव ने यह भी बताया कि CERT-In-एम्पैनल्ड ऑडिट एजेंसियां रेलवे के रिज़र्वेशन सिस्टम का रेगुलर सिक्योरिटी ऑडिट करती हैं। इसके अलावा टिकटिंग सिस्टम से जुड़े इंटरनेट ट्रैफिक पर CERT-In और NCIIPC लगातार नजर रखते हैं, ताकि किसी भी साइबर अटैक का समय पर पता लगाया जा सके और उसे रोका जा सके।
