भोपाल। साइबर पुलिस की बार-बार दी गई सलाह और जागरूकता कैंपेन के बावजूद साइबर क्रिमिनल लोगों को ठगने में सफल हो रहे हैं। राजधानी भोपा में एक नए मामले में एक नेशनलाइज्ड बैंक के 61 साल के रिटायर्ड मैनेजर से साइबर फ्रॉड करने वालों ने शेयर मार्केट इन्वेस्टमेंट में ज्यादा रिटर्न का झांसा देकर 57 लाख रुपए ठग लिए। इस सिलसिले में शनिवार को मिसरोद पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!पीड़ित की पहचान पंकज श्रीवास्तव के तौर पर हुई है। पीड़ित सलैया इलाके का रहने वाला है और एक नेशनलाइज्ड बैंक का रिटायर्ड मैनेजर है। श्रीवास्तव ने पुलिस को बताया कि पिछले साल दिसंबर में उसे एक जान-पहचान वाले के जरिए शेयर ट्रेडिंग के लिए एक मोबाइल नंबर मिला।
उसने उस नंबर पर कॉल किया और उस अनजान आदमी ने ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग से जुड़ा होने का दावा करते हुए उसे ज्यादा रिटर्न का वादा किया।
श्रीवास्तव से दो ऑनलाइन अकाउंट खोलने के लिए एक ऐप डाउनलोड करने को कहा गया। एक इन्वेस्टमेंट डिपॉजिट के लिए और दूसरा जो प्रॉफिट दिखाएगा। समय के साथ श्रीवास्तव ने कई किश्तों में अकाउंट में 57 लाख रुपए ट्रांसफर किए, लेकिन जब उनका बैलेंस खत्म हो गया, तो उन्होंने देखा कि दोनों अकाउंट में जीरो बैलेंस दिख रहा था।
जब उन्होंने पहले इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों पर कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की, तो वे बंद मिले। यह महसूस करते हुए कि उनके साथ धोखा हुआ है श्रीवास्तव ने साइबर क्राइम ब्रांच से संपर्क किया, जहां जीरो FIR दर्ज की गई और केस मिसरोद पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर कर दिया गया। मिसरोद पुलिस स्टेशन इंचार्ज रतनलाल सिंह परिहार ने कहा कि मोबाइल नंबरों और बैंक ट्रांज़ैक्शन डिटेल्स के आधार पर आरोपियों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
ऐसे दिया धोखा
धोखेबाजों ने श्रीवास्तव को भरोसा दिलाया कि उनका पैसा सिर्फ ज्यादा मुनाफे वाली कंपनियों में ही इन्वेस्ट किया जाएगा और दावा किया कि ज्यादा इन्वेस्टमेंट से ज्यादा रिटर्न मिलेगा। भरोसे पर भरोसा करके श्रीवास्तव ने इन्वेस्टमेंट अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करना शुरू कर दिया। साथ ही, दूसरे अकाउंट में इन्वेस्टमेंट और मुनाफे दोनों को दिखाते हुए बैलेंस बढ़ता हुआ दिखा, जिससे उनका भरोसा और बढ़ गया।

मप्र में ऑनलाइन ठगी के मामले
मध्य प्रदेश (MP) में ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के आंकड़ों में पिछले कुछ वर्षों में भारी वृद्धि देखी गई है। मध्य प्रदेश विधानसभा और पुलिस विभाग द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वर्षवार स्थिति।
ऑनलाइन ठगी के प्रमुख आंकड़े (वर्षवार)
वर्ष दर्ज साइबर अपराध के मामले ठगी गई अनुमानित राशि (करोड़ में)
2021 10,131 1,054 करोड़ (2021 से जुलाई 2025 के बीच कुल)
2022 1,021 (IT Act के तहत) उपलब्ध नहीं
2023 927 (कुल साइबर मामले) 44.26 करोड़
2024 1,082 (कुल साइबर केस) 93.60 करोड़ (कुछ रिपोर्टों में 463 करोड़)
2025 (जुलाई तक) 511 मामले 251 करोड़ (शुरुआती 4 महीनों में)
कुल नुकसान: मई 2021 से जुलाई 2025 के बीच प्रदेश के नागरिकों से लगभग 1,054 करोड़ रुपए की ठगी की गई है।
रिकवरी दर: ठगी गई राशि की रिकवरी काफी कम है। सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 1,054 करोड़ में से पुलिस केवल 1.94 करोड़ (लगभग 0.18%) ही पीड़ितों को वापस दिला पाई है।
अपराध का प्रकार: सबसे अधिक ठगी सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप) के माध्यम से होती है, जो कुल अपराधों का 37% से 53% हिस्सा है।
डिजिटल अरेस्ट: 2024 में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों में 130% की वृद्धि हुई, जिससे लोगों ने अकेले 12.60 करोड़ गंवाए।
युवा निशाने पर: साइबर ठगी के पीड़ितों में लगभग 65% से 76% युवा वर्ग के लोग हैं।
प्रमुख केंद्र: प्रदेश में इंदौर और भोपाल साइबर अपराध के सबसे बड़े हॉटस्पॉट बने हुए हैं।
मप्र में सबसे बड़े आनलाइन शेयर ट्रेडिंग के मामले
मध्य प्रदेश (MP) में हाल के वर्षों और 2026 की शुरुआत तक ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग से संबंधित कई बड़े धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। राज्य की पुलिस और एसटीएफ (STF) ने इन घोटालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है।
प्रमुख बड़े मामले (2025-2026)
2,283 करोड़ का अंतरराष्ट्रीय गिरोह (जून 2025): मध्य प्रदेश एसटीएफ ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 2,283 करोड़ के ऑनलाइन निवेश घोटाले का पर्दाफाश किया। ‘यारकर एफएक्स’ (Yarker FX) और ‘यारकर कैपिटल’ जैसी कंपनियों ने टेलीग्राम के जरिए 6% से 8% मासिक रिटर्न का लालच देकर देश भर के निवेशकों को ठगा। पुलिस ने करीब ₹90 करोड़ के लेनदेन को फ्रीज किया है।
इंदौर में 3.08 करोड़ की ठगी (2025): इंदौर पुलिस ने एक डॉक्टर से 3.08 करोड़ की शेयर ट्रेडिंग धोखाधड़ी के मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में पुलिस ने जांच के दौरान लगभग 112 बैंक खातों को ब्लॉक कर दिया है।
भोपाल में बुजुर्ग से 57 लाख की ठगी (जनवरी 2024 – जनवरी 2026): हाल ही में जनवरी 2026 में भोपाल के एक बुजुर्ग से फर्जी शेयर ट्रेडिंग स्कीम के नाम पर 57 लाख हड़प लिए गए। आरोपियों ने मुनाफे के झूठे वादों के साथ उनके खाते खाली कर दिए।
बिजनेसमैन से 47.29 लाख की धोखाधड़ी (नवंबर 2025): भोपाल के बैरागढ़ क्षेत्र में एक व्यवसायी को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर और एक फर्जी ऐप के जरिए निवेश कराकर 47 लाख से अधिक की ठगी की गई।
प्रोफेसर के साथ लाखों की ठगी (जनवरी 2026): भोपाल के एक निजी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर से फेसबुक पर मिले फर्जी स्टॉक मार्केट लिंक के जरिए लाखों रुपये ठग लिए गए।
पुलिस की हालिया कार्रवाई (जनवरी 2026)
मध्यप्रदेश पुलिस ने जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में ही फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स और ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
सावधानी के लिए उपाय:
यदि आप किसी भी ऑनलाइन ट्रेडिंग धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या आधिकारिक Cybercrime Portal पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
भारत में ऑनलाइन ठगी के मामले
भारत में ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में भारी उछाल आया है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 6 वर्षों (2020-2025) में भारतीयों को कुल 52,976 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।
वर्षवार वित्तीय नुकसान और शिकायतों की संख्या
वर्ष दर्ज शिकायतें (लगभग) कुल वित्तीय नुकसान (करोड़ रुपए में)
2025 21,77,524 19,812.96
2024 19,18,852 22,849.49
2023 13,10,361 7,463.20
2022 6,94,446 2,290.23
2021 2,62,846 551.65
2020 1,27,746 8.56
अपराध के प्रकार (2025): ऑनलाइन ठगी में सबसे बड़ा हिस्सा निवेश संबंधी धोखाधड़ी (Investment Schemes) का रहा, जो कुल नुकसान का 77% था। इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट (8%), क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी (7%) और सेक्सटॉर्शन (4%) प्रमुख रहे।
सर्वाधिक प्रभावित राज्य: वित्तीय नुकसान के मामले में महाराष्ट्र सबसे ऊपर रहा है। शिकायतों की संख्या के आधार पर उत्तर प्रदेश और कर्नाटक भी शीर्ष राज्यों में शामिल हैं।
बढ़ोतरी का कारण: 2021 से अब तक साइबर अपराध के मामलों में लगभग 400% की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बढ़ती डिजिटल पैठ और साइबर जागरूकता की कमी है।
सरकारी कार्रवाई: सरकार ने 2025 तक संदिग्ध लेनदेन को रोकने के लिए ‘फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर’ (FRI) जैसे तंत्र विकसित किए हैं, जिससे लगभग 660 करोड़ की ठगी रोकी जा सकी है।
भारत में आनलाइन शेयर ट्रेडिंग घोटाले
भारत में ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग घोटालों का जाल हाल के वर्षों में काफी बढ़ा है। जनवरी 2026 तक की रिपोर्टों के अनुसार, देश के कुछ सबसे बड़े और हालिया ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग स्कैम।
- पुणे का 22 करोड़ रुपए का सायबर फ्रॉड (जनवरी 2026)
पुणे में एक 85 वर्षीय सेवानिवृत्त उद्यमी से ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 22.03 करोड़ रुपए की ठगी की गई, जो शहर का अब तक का सबसे बड़ा सायबर फ्रॉड माना जा रहा है। जालसाजों ने उन्हें फर्जी ट्रेडिंग ऐप और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए ऊंचे रिटर्न का लालच दिया था। - कंबोडिया से जुड़ा 300 करोड़ रुपए का रैकेट (जनवरी 2026)
दिल्ली पुलिस ने हाल ही में एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार कंबोडिया से जुड़े थे। यह गिरोह 300 करोड़ के फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग रैकेट का संचालन कर रहा था। इसमें व्हाट्सएप और फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइटों का उपयोग करके लोगों को फंसाया जाता था। - दक्षिण मुंबई का 11 करोड़ रुपए का घोटाला (जनवरी 2026)
मुंबई के एक व्यवसायी को व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी ट्रेडिंग ऐप के माध्यम से मात्र एक महीने के भीतर 11 करोड़ का चूना लगाया गया। - हैदराबाद और नोएडा के बड़े मामले
हैदराबाद (जनवरी 2026): तीन अलग-अलग पीड़ितों से कुल 7.3 करोड़ की ठगी हुई, जिसमें एक व्यक्ति ने अकेले 3.4 करोड़ खो दिए। एक अन्य मामले में मैनेजमेंट प्रोफेशनल को 1.26 करोड़ का नुकसान हुआ।
नोएडा (जनवरी 2026): शेयर बाजार में निवेश के नाम पर एक व्यक्ति से 12 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया, जिसमें पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
- ऐतिहासिक बड़े घोटाले
यद्यपि ऑनलाइन फ्रॉड वर्तमान में अधिक सक्रिय हैं, भारत के शेयर बाजार इतिहास के सबसे बड़े व्यवस्थित घोटालों में ये शामिल हैं:
हर्षद मेहता घोटाला (1992): लगभग 5,000 करोड़ का मनी मार्केट घोटाला, जो नकली बैंक रसीदों पर आधारित था।
केतन पारेख घोटाला (2001): circular trading के माध्यम से किया गया एक बड़ा वित्तीय फ्रॉड।
स्कैमर्स का तरीका (Modus Operandi):
आजकल के ऑनलाइन स्कैमर्स मुख्य रूप से इन तरीकों का उपयोग करते हैं।
व्हाट्सएप और फेसबुक: ‘वीआईपी ग्रुप’ या ‘फ्री ट्रेडिंग टिप्स’ के नाम पर विज्ञापन देकर लोगों को जोड़ना।
फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स: ये ऐप (जैसे INSECG, CHS-SES, SAAI) असली पोर्टल्स की तरह दिखते हैं और डिजिटल वॉलेट में फर्जी मुनाफा दिखाते हैं।
निकासी पर रोक: जब पीड़ित पैसा निकालने की कोशिश करता है, तो उससे ‘टैक्स’ या ‘कमीशन’ के नाम पर और पैसे मांगे जाते हैं।
सावधानी: SEBI ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे केवल पंजीकृत मध्यस्थों के माध्यम से ही निवेश करें और सोशल मीडिया पर मिलने वाले असत्यापित निवेश संदेशों से बचें। किसी भी सायबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल National Cybercrime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें।
