हेल्थ डेस्क। वैज्ञानिकों ने ‘रेसिस्टेंट हाइपरटेंशन’ (resistant hypertension)—यानी ऐसा हाई ब्लड प्रेशर जिस पर सामान्य दवाएं बेअसर रहती हैं उसके लिए कुछ क्रांतिकारी नए इलाजों की खोज की है। इनमें सबसे प्रमुख Baxdrostat नामक एक नई दवा और साल में दो बार लगने वाले इंजेक्शन हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हालिया शोधों और क्लिनिकल ट्रायल्स के अनुसार, ये नए विकल्प उन करोड़ों लोगों के लिए उम्मीद की किरण हैं, जिनका बीपी 3 या उससे ज्यादा दवाओं के बाद भी कंट्रोल नहीं होता।
- Baxdrostat: सीधे हॉर्मोन पर हमला
यह एक नई श्रेणी की दवा है जो शरीर में एल्डोस्टेरोन (aldosterone) हॉर्मोन के उत्पादन को रोकती है।
कैसे काम करती है: एल्डोस्टेरोन शरीर में नमक और पानी को रोककर बीपी बढ़ाता है। यह दवा सीधे इसे बनने से रोकती है।
परिणाम: क्लिनिकल ट्रायल (Bax24) में देखा गया कि इस दवा से सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में 10 से 15 पॉइंट तक की कमी आई।
फायदा: यह उन मरीजों में भी कारगर पाई गई है जिन पर पारंपरिक इलाज फेल हो चुके थे।
- साल में सिर्फ दो इंजेक्शन
वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे मरीजों को रोज गोली खाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
Zilebesiran: यह एक प्रायोगिक इंजेक्शन है जिसे साल में केवल दो बार (हर 6 महीने में) लगाने से बीपी साल भर कंट्रोल रह सकता है।
फायदा: उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो दवा खाना भूल जाते हैं या जिन्हें दिन भर में कई गोलियां लेनी पड़ती हैं।
- अन्य आधुनिक विकल्प
Aprocitentan (Tryvio): मार्च 2024 में FDA द्वारा अनुमोदित यह पहली ऐसी नई दवा है जो ‘एंडोथेलिन पाथवे’ पर काम करती है, जो जिद्दी बीपी के लिए जिम्मेदार होता है।
Lorundrostat: यह एक और नई दवा है, जिसने ट्रायल के दौरान बीपी को औसतन 15 पॉइंट तक कम किया।
रीनल डिनरवेशन (Renal Denervation): यह एक छोटी सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें किडनी की उन नसों को रेडियो तरंगों से निष्क्रिय किया जाता है जो दिमाग को बीपी बढ़ाने का संकेत भेजती हैं।
दुनियाभर में बीपी के 140 करोड़ मरीज
दुनियाभर में हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के मरीजों की संख्या में पिछले कुछ दशकों में भारी वृद्धि हुई है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 130 करोड़ से 140 करोड़ के बीच लोग इस गंभीर स्थिति से जूझ रहे हैं।
वैश्विक स्थिति (Global Stats)
कुल मरीज: अनुमानित 140 करोड़ लोग हाइपरटेंशन से ग्रस्त हैं। 2020 तक के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया की लगभग एक-तिहाई वयस्क आबादी इसकी चपेट में थी।
तेजी से वृद्धि: पिछले 30 वर्षों में हाइपरटेंशन के मामलों में 97% से अधिक की वृद्धि देखी गई है, यानी मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।
अज्ञानता: दुनिया भर में आधे से अधिक लोग इस बात से अनजान हैं कि उन्हें हाई बीपी है। केवल 5 में से 1 व्यक्ति ही इसे सही ढंग से नियंत्रित कर पा रहा है।
मृत्यु दर: उच्च रक्तचाप के कारण हर साल दुनिया भर में लगभग 85 लाख लोगों की मौत होती है।
भारत में स्थिति
मरीजों की संख्या: भारत में लगभग 18.8 करोड़ से 22 करोड़ हाई बीपी के मरीज हैं।
प्रमुख कारण: भारतीय लोगों में नमक का अत्यधिक सेवन (औसतन 10 ग्राम प्रतिदिन, जबकि WHO 5 ग्राम की सलाह देता है) इसका एक बड़ा कारण है।
क्षेत्रीय प्रभाव: भारत और चीन जैसे एशियाई देशों में दुनिया के आधे से अधिक हाइपरटेंशन के मरीज रहते हैं।
बीपी के मानक (नई गाइडलाइंस 2025/26)
हालिया चिकित्सा दिशानिर्देशों के अनुसार सामान्य और उच्च बीपी की श्रेणियां इस प्रकार हैं।
श्रेणी सिस्टोलिक (ऊपरी) डायस्टोलिक (निचला)
सामान्य 120 mmHg से कम 80 mmHg से कम
प्री-हाइपरटेंशन 120 – 139 mmHg 80 – 89 mmHg
हाइपरटेंशन (स्टेज 1) 130 – 139 mmHg 80 – 89 mmHg
हाइपरटेंशन (स्टेज 2) 140 mmHg या अधिक 90 mmHg या अधिक
मेडिकल इमरजेंसी 180 mmHg से ऊपर 120 mmHg से ऊपर
