ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक बड़े साइबर फ्रॉड केस में एक मंदिर के सचिव से 2.52 करोड़ रुपए की ठगी हुई। जानकारी के मुताबिक, पीड़ित को करीब 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया था। ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने फ्रॉड के मुख्य आरोपी और किंगपिन को ग्वालियर से ही गिरफ्तार किया है, जिसकी पहचान उदय राज विनाग्या के तौर पर हुई है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!पीड़ित, रामकृष्ण आश्रम के सचिव स्वामी सुप्रितानंद, साइबर क्रिमिनल्स के निशाने पर थे, जिन्होंने उनसे फोन कॉल और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए ठगी की। इससे पहले, पुलिस ने इस मामले में 17 और आरोपियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन मास्टरमाइंड अभी भी फरार था।
पुलिस ने कहा कि ठगी गई रकम में से 1.30 करोड़ रुपए से ज्यादा उदय राज विनाग्या के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किए गए थे। हालांकि, इसके बावजूद पुलिस उसे लंबे समय तक गिरफ्तार नहीं कर पाई। बाद में कोर्ट ने धीमी जांच पर कड़ी नाराजगी जताई और क्राइम ब्रांच से जवाब देने को कहा।
कोर्ट की सख्त कार्रवाई के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी करण विनाग्या से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि उदय राज किंगपिन था और उसे ठगी के पैसे का एक बड़ा हिस्सा मिला था।
ASP क्राइम सुमन गुर्जर ने बताया कि उदय राज असल में उज्जैन जिले के नागदा का रहने वाला है। वह अपने वकील से मिलने ग्वालियर आया था और यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है और उसके बताए ठिकानों पर और आरोपियों को गिरफ्तार करने और ठगी के पैसे रिकवर करने के लिए रेड की जा रही है।
पुलिस ने बताया कि उदय राज ने ठगी के पैसे निकालने और उन्हें अलग-अलग जगहों पर बांटने के लिए अपने एजेंट का इस्तेमाल किया। पुलिस उदय राज और उसके परिवार वालों के बैंक अकाउंट भी चेक कर रही है। उसकी मां हेमलता के अकाउंट में बड़े ट्रांजैक्शन मिले हैं। पुलिस अब उसकी बिजनेस एक्टिविटीज, उसने कितने बैंक अकाउंट इस्तेमाल किए, उसकी प्रॉपर्टीज़ कहां हैं और साइबर फ्रॉड में कितने लोग शामिल थे, यह पता लगाने की कोशिश कर रही है।
देश में तेजी से बढ़े डिजिटल अरेस्ट के मामले
भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में भारी उछाल देखा गया है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और गृह मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्षवार डिजिटल अरेस्ट के मामले बढ़ते जा रहे हैं।
डिजिटल अरेस्ट के वर्षवार आंकड़े (2022-2025)
वर्ष दर्ज मामलों की संख्या वित्तीय नुकसान (अनुमानित)
2022 39,925 मामले 91.14 करोड़
2023 60,000 मामले 339 करोड़
2024 1,23,672 मामले 1,935.51 करोड़
2025 17,718 मामले (शुरुआती दो महीनों में) 210.21 करोड़ (शुरुआती दो महीनों में)
तेजी से वृद्धि: 2022 से 2024 के बीच डिजिटल अरेस्ट के मामलों में 310% से अधिक की वृद्धि हुई है।
आर्थिक प्रभाव: जालसाजों ने अब तक डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से देश भर में लगभग 3,000 करोड़ रुपए की ठगी की है।
साइबर अपराध का हिस्सा: वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, कुल साइबर धोखाधड़ी के नुकसान का लगभग 8% हिस्सा अकेले डिजिटल अरेस्ट घोटालों से आता है।
कार्रवाई: 2024 में सरकार ने इन घोटालों से जुड़े 83,000 से अधिक व्हाट्सएप अकाउंट्स को ब्लॉक किया और अब तक कुल 11.14 लाख से अधिक सिम कार्ड ब्लॉक किए जा चुके हैं।
ये भी जानना जरूरी है…
भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी (जैसे CBI, ED, या पुलिस) वीडियो कॉल के जरिए किसी को गिरफ्तार नहीं करती है। यदि आप ऐसी किसी घटना का शिकार होते हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन ‘1930’ पर रिपोर्ट करें।
मप्र में तेजी से बढ़ रहे मामले
मध्य प्रदेश (मप्र) में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों में पिछले तीन वर्षों में भारी वृद्धि देखी गई है। राज्य सरकार द्वारा विधान सभा में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्षवार यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है।
मप्र में डिजिटल अरेस्ट के आंकड़े
वर्ष दर्ज के ठगी गई कुल राशि मुख्य प्रभावित शहर
2023 01 96,968 भोपाल
2024 26 12.60 करोड़+ इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर
2025 17 (जून तक) 77.57 लाख (जून तक) भोपाल
तेजी से बढ़ते मामले: 2023 की तुलना में 2024 में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में 130% की वृद्धि दर्ज की गई।
2025 की स्थिति: अकेले इंदौर में 2025 के दौरान साइबर अपराध के 72 बड़े मामले दर्ज किए गए, जिनमें डिजिटल अरेस्ट के मामले भी शामिल थे। भोपाल में जून 2025 तक 17 डिजिटल अरेस्ट के मामले सामने आए थे।
हालिया मामले (जनवरी 2026): जनवरी 2026 में ग्वालियर में एक रिटायर्ड अधिकारी से 1.12 करोड़ की ठगी और रामकृष्ण मिशन के सचिव के साथ 2.53 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।
रिकवरी दर: ठगी गई राशि की रिकवरी काफी चुनौतीपूर्ण रही है। 2024 में वसूली गई राशि कुल ठगी का केवल 5.74% ही थी।
सावधानी में ही समाधान
कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से गिरफ्तारी नहीं करती है। साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें।
