नई दिल्ली। जैसे-जैसे बजट 2026 पास आ रहा है, आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता साफ है। क्या टैक्स कम होंगे या रोजाना के खर्चे और बढ़ेंगे? मॉर्गन स्टेनली की एक हालिया रिपोर्ट सरकार की संभावित स्ट्रैटेजी के बारे में जरूरी संकेत देती है, जो टैक्स राहत पर सतर्क नजरिए और लंबे समय की ग्रोथ पर ज्यादा ध्यान देने का संकेत देती है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रिपोर्ट बताती है कि बजट 2026 में इनकम टैक्स में बड़ी कटौती की संभावना नहीं है। पिछले बजट में, पर्सनल इनकम टैक्स में कटौती से टैक्स कलेक्शन पर असर पड़ा था, जिससे ग्रोथ उम्मीद से काफी कम हो गई थी। रेवेन्यू पर और दबाव से बचने के लिए सरकार बड़े टैक्स राहत के बजाय छोटे एडजस्टमेंट—जैसे स्लैब में मामूली बदलाव, रिबेट को ठीक करना, या सीमित छूट—का विकल्प चुन सकती है।

महंगाई और रोजाना के खर्चों पर असर
कम टैक्स कलेक्शन और ज्यादा खर्च की जरूरतों के साथ, सरकार दूसरे रेवेन्यू ऑप्शन देख सकती है। इसमें सब्सिडी या इनडायरेक्ट लेवी में बदलाव शामिल हो सकते हैं, जिससे ज़रूरी चीज़ों की कीमतों पर असर पड़ सकता है। पेट्रोल और डीजल पर राहत के कोई मजबूत संकेत नहीं हैं, जबकि अगर सब्सिडी को कम किया जाता है तो बिजली, गैस और कुछ सर्विसेज पर कीमतों का हल्का दबाव पड़ सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल खर्च पर फोकस
मॉर्गन स्टेनली ने बताया है कि बजट 2026 में कैपिटल खर्च को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। मुख्य फोकस एरिया में सड़कें, रेलवे, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, पानी की सप्लाई, हेल्थकेयर और शिक्षा शामिल हो सकते हैं। हालांकि इससे घर के खर्च तुरंत कम नहीं हो सकते हैं, लेकिन यह समय के साथ पब्लिक सर्विसेज़ और जीवन की क्वालिटी में काफी सुधार कर सकता है।
नौकरियों और MSMEs को बढ़ावा
रिपोर्ट MSMEs और रोज़गार पैदा करने के लिए पॉलिसी सपोर्ट की ओर भी इशारा करती है। आसान क्रेडिट, स्किल डेवलपमेंट की पहल और डिजिटल क्षमताओं के लिए सपोर्ट छोटे बिज़नेस को बढ़ने और नई नौकरियां बनाने में मदद कर सकता है, जिससे इनडायरेक्टली घर की इनकम मज़बूत होगी।
क्या सस्ता या महंगा हो सकता है?
सस्ता हो सकता है:
- देश में बने सामान
- इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक प्रोडक्ट
- सस्ते घर
महंगा हो सकता है:
- पेट्रोल और डीज़ल
- फर्टिलाइज़र (सब्सिडी में कटौती हो सकती है)
- लग्ज़री और इंपोर्टेड चीज़ें
बजट 2026 के पॉपुलिस्ट होने के बजाय समझदारी भरा होने की उम्मीद है। आम आदमी के लिए बड़ी टैक्स राहत कम हो सकती है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर, नौकरियों और सोशल सर्विस पर ज़्यादा खर्च से लंबे समय तक फायदे और आर्थिक स्थिरता मिल सकती है।
