नई दिल्ली। अमेरिका—ईरान के बीच जंग के चलते वैश्विक मार्केट में तेल की बढ़ती कीमतों और पेट्रोल-डीजल की ज्यादा कीमतों को लेकर बढ़ते डर के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपए प्रति लीटर कम कर दी है। एक्साइज ड्यूटी में कटौती का मतलब है कि अब पेट्रोल पर लेवी 3 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर जीरो है। हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि फ्यूल के रिटेल रेट कम करने का कोई ऐलान नहीं किया गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार तेल कंपनियों का ज्यादा नुकसान उठा रही है, जो पेट्रोल के लिए लगभग 24 रुपए/लीटर और डीजल के लिए 30 रुपए/लीटर है। उन्होंने कहा कि एक्सपोर्ट टैक्स इसलिए लगाया गया है, क्योंकि पेट्रोल और डीजल की इंटरनेशनल कीमतें आसमान छू रही हैं और विदेशी देशों को एक्सपोर्ट करने वाली किसी भी रिफाइनरी को एक्सपोर्ट टैक्स देना होगा।
उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, “सरकार ने अपने टैक्स रेवेन्यू पर भारी असर डाला है ताकि तेल कंपनियों का बहुत ज्यादा नुकसान (पेट्रोल के लिए लगभग 24 रुपए/लीटर और डीजल के लिए 30 रुपए/लीटर) कम हो सके, जबकि इंटरनेशनल कीमतें आसमान छू रही हैं। साथ ही, एक्सपोर्ट टैक्स लगाया गया है, क्योंकि पेट्रोल और डीजल की इंटरनेशनल कीमतें आसमान छू रही हैं और विदेशी देशों को एक्सपोर्ट करने वाली किसी भी रिफाइनरी को एक्सपोर्ट टैक्स देना होगा।”
क्या एक्साइज ड्यूटी में कटौती से रिटेल कीमत कम होगी?
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने भी इस कदम की तारीफ करते हुए कहा कि सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया, ताकि OMCs कच्चा तेल खरीदना बंद न करें और देश में फ्यूल की कमी न हो। उन्होंने कहा, “हमने देश में ATF की अवेलेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए इसके एक्सपोर्ट पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी है। सीतारमण ने आगे कहा कि इस कदम से कंज्यूमर्स को कीमतों में बढ़ोतरी से सुरक्षा मिलेगी।
देश में नहीं लगेगा लाकडाउन
सरकार ने गुरुवार को भरोसा दिलाया कि भारत के पास अभी 60 दिनों की खपत के लिए कच्चा तेल और फ्यूल का स्टॉक है। सरकार ने यह भी कहा कि घरों के लिए LPG की कोई कमी नहीं है, और फ्यूल के एक्स्ट्रा घरेलू प्रोडक्शन के साथ-साथ नॉन-वेस्ट एशियन सप्लायर्स से कार्गो आने से सप्लाई की स्थिति में सुधार हो रहा है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि लॉकडाउन के बारे में सभी अफवाहें झूठी हैं, और नागरिकों से शांत रहने और घबराने की अपील नहीं की।
पेट्रोल—डीजल का गणित
पेट्रोल और डीजल की कीमतों का गणित मुख्य रूप से कच्चे तेल (Crude Oil) की अंतरराष्ट्रीय कीमतों, विनिमय दर (Exchange Rate), और सरकार द्वारा लगाए गए विभिन्न करों (Taxes) पर निर्भर करता है। भारत में 27 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार, कीमतों का मुख्य ढांचा इस प्रकार है।
- कीमत निर्धारण के मुख्य घटक
एक लीटर ईंधन की रिटेल कीमत को इन हिस्सों में बांटा जा सकता है।
बेस प्राइस (Base Price): यह वह कीमत है जिस पर तेल कंपनियां (OMCs) अंतरराष्ट्रीय बाजार से तेल खरीदती हैं और उसे रिफाइन करती हैं।
सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी (Central Excise Duty): केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला निश्चित कर। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की है और डीजल पर इसे घटाकर शून्य कर दिया है।
डीलर कमीशन (Dealer Commission): पेट्रोल पंप मालिकों को दिया जाने वाला प्रति लीटर लाभांश।
वैट (VAT): राज्य सरकारें अपनी जरूरत के अनुसार वैट या सेल्स टैक्स लगाती हैं, जिसके कारण अलग-अलग राज्यों (जैसे बिहार में 106.95 रुपए और दमन में 92.37 रुपए) में कीमतें अलग होती हैं।
- टैक्स का बोझ
भारत में पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत का लगभग 55% हिस्सा केवल टैक्स (केंद्र + राज्य) होता है।
यदि बेस प्राइस 35 रुपए है, तो टैक्स और कमीशन मिलाकर इसकी कीमत 95-100 रुपए के पार पहुंच जाती है।
वर्तमान में ईंधन GST के दायरे से बाहर है, लेकिन इसे 28% स्लैब में लाने पर विचार होता रहता है।
- कच्चे तेल का प्रभाव
$1 का अंतर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में $1 प्रति बैरल की बढ़ोतरी होने पर भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम लगभग 50-60 पैसे प्रति लीटर बढ़ सकते हैं।
- पेट्रोल बनाम डीजल: तकनीकी गणित
विशेषता पेट्रोल डीजल
ऊर्जा घनत्व कम अधिक (प्रति लीटर ~43.18 MJ)
माइलेज कम अधिक (बेहतर थर्मल दक्षता)
रखरखाव लागत कम अधिक
टैक्स स्ट्रक्चर अधिक एक्साइज ड्यूटी कम/शून्य एक्साइज ड्यूटी (वर्तमान स्थिति)
पेट्रोल-डीजल पर कितना कमा रही सरकार वर्षवार
पेट्रोल और डीजल पर टैक्स के जरिए केंद्र और राज्य सरकारों की कमाई पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर पेट्रोल-डीजल पर टैक्स लगाकर लगभग 36 लाख करोड़ रुपए की कमाई की है।
प्रति लीटर टैक्स का गणित (अप्रैल 2025 के आंकड़े)
दिल्ली के उदाहरण से समझें तो 94.77 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल पर टैक्स और अन्य शुल्क इस प्रकार थे।
बेस प्राइस: 52.84 रुपए
केंद्र सरकार (एक्साइज ड्यूटी): 21.90 रुपए
राज्य सरकार (VAT): 15.40 रुपए
डीलर कमीशन: 4.43 रुपए
वर्षवार और कुल कमाई के आंकड़े
कुल 5 वर्ष (2019-2024): केंद्र और राज्य सरकारों की कुल आय लगभग 36 लाख करोड़ रुपए रही।
वित्तीय वर्ष 2023-24: पेट्रोलियम क्षेत्र से केंद्र और राज्यों को 7.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक का टैक्स राजस्व प्राप्त हुआ।
9 महीने की अवधि (हालिया): एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, सरकार को पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स से 9 महीनों में 5.45 लाख करोड़ रुपए मिले।
ऐतिहासिक वृद्धि: पिछले 9 वर्षों में पेट्रोल से सरकार की सालाना कमाई 2,550 करोड़ रुपए से बढ़कर 9,350 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।
हालिया बदलाव (मार्च 2026)
मार्च 2026 की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है।
पेट्रोल: टैक्स 13 रुपए से घटाकर 3 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया।
डीजल: 10 रुपए प्रति लीटर की ड्यूटी पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।
