भोपाल। भोपाल जिले की बैरसिया विधानसभा सीट से भाजपा विधायक विष्णु खत्री का वेयर हाउस सरकारी कार्रवाई के घेरे में आया है। गुरुवार 2 अप्रैल को इस वेयर हाउस को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। इस घटना से प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर सत्ता पक्ष के विधायक से जुड़ा मामला है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दरअसल, सरकारी गेहूं खरीदी शुरू होने से पहले ही विधायक के वेयर हाउस में 6,522 क्विंटल अवैध गेहूं का स्टॉक जमा पाया गया था। प्रशासन की छापेमारी में लगभग 5,000 से 6,500 क्विंटल गेहूं बिना वैध दस्तावेजों के मिला, जिससे कालाबाजारी की आशंका जताई गई है। वेयर हाउस को ब्लैक लिस्ट करने के साथ-साथ संबंधित सहकारी समिति के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई है।
मप्र में गेहूं खरीदी में गड़बड़ी
मध्य प्रदेश में इस वर्ष (2026) गेहूं खरीदी में मुख्य रूप से खरीदी की तारीखों में बार-बार बदलाव और बारदानों (बोरों) की कमी को लेकर गंभीर अव्यवस्था और गड़बड़ी की खबरें सामने आई हैं। सरकार ने खरीदी शुरू करने की तारीख को तीन बार आगे बढ़ाया है, जिससे किसान परेशान हैं और बिचौलियों को सस्ते दाम पर फसल बेचने को मजबूर हैं।
मुख्य गड़बड़ियां और समस्याएं
तारीखों में बार-बार बदलाव: गेहूं खरीदी की तारीख पहले 16 मार्च तय थी, जिसे बढ़ाकर 1 अप्रैल और अब 10 से 15 अप्रैल कर दिया गया है।
10 अप्रैल से खरीदी: इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के 24 जिलों में।
15 अप्रैल से खरीदी: चंबल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के शेष 31 जिलों में।
बारदाने (बोरों) का संकट: सरकार ने जूट और प्लास्टिक बोरों की कमी का हवाला दिया है। विपक्ष का आरोप है कि जूट की आपूर्ति में कमी के पीछे पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल) के युद्ध का बहाना बनाया जा रहा है, जबकि यह कुप्रबंधन का नतीजा है।
भ्रष्टाचार के आरोप: मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि एक भाजपा विधायक के वेयरहाउस में अवैध रूप से 12,000 बारदाने और 500 टन गेहूं पकड़ा गया है, जबकि आम किसानों को बारदाने नहीं मिल रहे हैं।
किसानों को आर्थिक नुकसान: सरकारी खरीदी टलने के कारण किसान मंडियों में गेहूं 2100-2200 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बेचने को मजबूर हैं, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2625 रुपए (बोनस सहित) तय किया गया है।
मिलावट की खबरें: जबलपुर जैसे जिलों में पिछले समय के दौरान सरकारी खरीदी में गेहूं के साथ मिट्टी और पत्थर मिलाने के मामले भी सामने आए हैं, जिसमें वेयरहाउस ऑपरेटरों पर एफआईआर दर्ज की गई है।
वर्तमान स्थिति और विरोध: देरी के कारण करीब 60% किसान डिफॉल्टर होने की कगार पर हैं, क्योंकि वे बैंकों का कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं। भारतीय किसान संघ और विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और आंदोलन की चेतावनी दी है।
राजनीतिक आरोप
कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि राज्य में कई रसूखदार नेताओं और विधायकों के अपने वेयरहाउस हैं, जिनका उपयोग वे अनाज के भंडारण और व्यापार के लिए करते हैं।
सामान्य तौर पर, मध्य प्रदेश में कृषि प्रधान राज्य होने के कारण कई विधायक और नेता कृषि व्यवसाय से जुड़े हैं, और उनके निजी या पारिवारिक स्वामित्व में वेयरहाउस होना एक आम बात है।
