इंफाल। मणिपुर में 7 अप्रैल को हिंसा का एक नया दौर शुरू हुआ है, जिससे स्थिति एक बार फिर तनावपूर्ण हो गई है। ताजा हिंसा की शुरुआत बिष्णुपुर जिले में एक संदिग्ध रॉकेट और बम हमले से हुई, जिसमें दो मासूम बच्चों की मौत हो गई।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हिंसा की वर्तमान स्थिति और घटनाएं
बिष्णुपुर में हमला: मंगलवार सुबह संदिग्ध कुकी उग्रवादियों द्वारा एक घर पर किए गए रॉकेट हमले में दो बच्चों की जान चली गई और उनकी मां घायल हो गईं।
विरोध प्रदर्शन और तोड़फोड़: बच्चों की मौत के बाद इंफाल घाटी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिस थानों में तोड़फोड़ की और तेल टैंकरों में आग लगा दी।
सुरक्षा बलों के साथ झड़प: CRPF कैंप पर भीड़ के हमले और उसके बाद सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 2 लोगों की मौत और लगभग 20 लोगों के घायल होने की खबर है।
अपहरण की घटना: उखरुल-इम्फाल रोड पर बंदूकधारियों ने महिलाओं और बच्चों सहित 20 से अधिक नागा नागरिकों का अपहरण कर लिया है, जिसका आरोप कुकी उग्रवादियों पर लगाया गया है।
सरकार के प्रतिबंध और सुरक्षा उपाय
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मणिपुर सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं।
कर्फ्यू: बिष्णुपुर और इंफाल सहित संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है।
इंटरनेट बैन: इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थोबल, काकचिंग और बिष्णुपुर सहित 5 जिलों में इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाओं को तीन दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है।
जांच: ताजा बम हमले की जांच NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को सौंप दी गई है।
मुख्य कारण
यह हिंसा मई 2023 से चले आ रहे जातीय संघर्ष का हिस्सा है, जो मुख्य रूप से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच है। मैतेई समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति (ST) के दर्जे की मांग और कुकी समुदाय द्वारा इसके विरोध को इस दीर्घकालिक अशांति की मुख्य वजह माना जाता है।
मणिपुर हिंसा में अब तक हुई मौतें
मणिपुर में 3 मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में अब तक 250 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। सरकारी आंकड़ों (नवंबर 2024 तक) के अनुसार 258 मौतों की पुष्टि की गई है। हिंसा के कारण 60,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। 2024 और 2025 में भी छुटपुट हिंसा जारी रही।
मणिपुर हिंसा में मौतों का वर्षवार विवरण (अनुमानित):
2023-2024 (मई 2023 – नवंबर 2024)
हिंसा की शुरुआत के बाद से अब तक सबसे अधिक मौतें (250-258 से अधिक) इसी अवधि में हुईं। 2023 में ही हिंसा का मुख्य दौर रहा, जिसमें कई लोग मारे गए।
2025 (जनवरी-अप्रैल): 2025 में भी हिंसा की घटनाएं कम होने के बावजूद जारी रहीं, जिसमें रॉकेट हमलों सहित अन्य हिंसक घटनाओं में जानें गई।
मुख्य तथ्य:
समुदाय: हिंसा मैतेई और कुकी समुदायों के बीच है।
स्थिति: राज्य के पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों में बफर जोन बना है और लगातार हिंसा के कारण आम जनजीवन प्रभावित है।
प्रशासन: नवंबर 2024 तक हिंसा में तेजी के बाद सुरक्षा बल तैनात है।
मणिपुर में शांति बहाली के प्रयास
मणिपुर में शांति बहाली के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान स्थिति (अप्रैल 2026) के अनुसार, सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ समुदायों के बीच संवाद स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है।
- सुरक्षा और कानून व्यवस्था
सुरक्षा बलों की तैनाती: राज्य में शांति बनाए रखने के लिए CRPF की अतिरिक्त बटालियनों और पुलिस बलों की सैकड़ों कंपनियों को तैनात किया गया है।
संयुक्त सर्च ऑपरेशन: सेना, CRPF और मणिपुर पुलिस द्वारा उग्रवादियों के खिलाफ और अवैध हथियारों की बरामदगी के लिए संयुक्त तलाशी अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं।
सीमा सुरक्षा: म्यांमार सीमा पर अवैध आवाजाही रोकने के लिए बाड़ (Fencing) लगाने का काम तेजी से किया जा रहा है।
- संवाद और राजनीतिक पहल
समुदायों से वार्ता: गृह मंत्रालय और केंद्र सरकार की टीमें मैतेई और कुकी-जो समुदायों के नेताओं के साथ लगातार बातचीत कर रही हैं ताकि विवादों का समाधान निकाला जा सके।
त्रिपक्षीय समझौते: शांति के लिए सरकार एक एक्शन प्लान और त्रिपक्षीय समझौते पर काम कर रही है, ताकि हिंसा में शामिल समूहों को मुख्यधारा में लाया जा सके।
उच्च स्तरीय बैठकें: मुख्यमंत्री और केंद्रीय नेतृत्व के बीच शांति और विकास के रोडमैप पर नियमित चर्चा हो रही है।
- मानवीय और सामाजिक सहायता
आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति: आम लोगों को राहत देने के लिए उचित दरों पर सामान उपलब्ध कराने हेतु मोबाइल वैन और केंद्रीय पुलिस कल्याण केंद्र खोले गए हैं।
राजमार्गों को खोलना: बातचीत के सकारात्मक परिणाम के रूप में कुकी जो काउंसिल ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 को खोलने का निर्णय लिया है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला सुधरी है।
इन प्रयासों के बावजूद, राज्य के कुछ हिस्सों में छिटपुट हिंसा और बम विस्फोट जैसी घटनाएं अब भी शांति प्रक्रिया के सामने चुनौती बनी हुई हैं।
मणिपुर में हिंसा में निशाने पर जवान
मणिपुर में हालिया हिंसा के दौरान सुरक्षा बलों और जवानों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है। अप्रैल 2026 की ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, बिष्णुपुर जिले में एक गुस्साई भीड़ ने CRPF कैंप पर हमला कर दिया, जिसके बाद हुई जवाबी फायरिंग में कुछ लोगों की मौत हुई और कई घायल हो गए।
जवानों को निशाना बनाए जाने की प्रमुख घटनाएं
सुरक्षा बलों पर हमला (अप्रैल 2026): बिष्णुपुर के मोइरांग ट्रोंगलाओबी में भीड़ द्वारा अर्धसैनिक बल (CRPF) के कैंप पर हमला किया गया। इसके अतिरिक्त, चुराचांदपुर में CRPF के वाहन को जलाने के प्रयास की खबरें भी सामने आई हैं।
सेना की चौकी पर फायरिंग (मार्च 2026): 25-26 मार्च 2026 को संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने फौलजांग क्षेत्र में भारतीय सेना की एक चौकी पर गोलीबारी की, जिसके जवाब में सेना और CRPF ने करीब 30 मिनट तक मुठभेड़ की।
BSF जवान के घर पर हमला: रिपोर्टों के अनुसार, एक BSF जवान के घर पर रॉकेट से हमला किया गया, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
असम राइफल्स पर घात लगाकर हमला (सितंबर 2025): बिष्णुपुर के नामबोल इलाके में असम राइफल्स के वाहन पर अज्ञात आतंकवादियों (संभावित रूप से PLA के मैतै उग्रवादी) द्वारा हमला किया गया था, जिसमें 2 जवान शहीद हुए और 5 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।
