नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव रखा है। शाह ने सदन में इस आंकड़े और इसके पीछे के तर्कों के साथ स्पष्ट किया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अधिकतम सीमा (Upper Ceiling)
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि विधेयक में सीटों की अधिकतम संख्या 850 तय की गई है, लेकिन वर्तमान परिसीमन के बाद यह संख्या संभवतः 816 तक होगी।
सीटों का बंटवारा
प्रस्तावित योजना के अनुसार, 850 सीटों में से 815 सीटें राज्यों को और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों को आवंटित की जा सकती हैं।
महिला आरक्षण का आधार
यह विस्तार ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए किया जा रहा है। 850 सीटों की स्थिति में लगभग 283 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
जनसंख्या का तर्क
सरकार का कहना है कि यह वृद्धि देश की बढ़ती जनसंख्या और जनसांख्यिकीय बदलावों को बेहतर प्रतिनिधित्व देने के लिए आवश्यक है।
राज्यों की चिंता पर स्पष्टीकरण
दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं पर शाह ने आश्वासन दिया कि किसी भी राज्य की मौजूदा सीटों की संख्या कम नहीं की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि प्रत्येक राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या में आनुपातिक रूप से 50% तक की वृद्धि हो सकती है (उदाहरण के लिए, तमिलनाडु की 39 सीटें बढ़कर 58 और केरल की 20 सीटें 30 हो सकती हैं)।
क्रियान्वयन का समय
यह बदलाव 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू होने की उम्मीद है, जिसके लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग किया जा सकता है। यह प्रस्ताव 16 अप्रैल 2026 को संसद के विशेष सत्र के दौरान पेश किए गए 131वें संविधान संशोधन विधेयक का हिस्सा है।
देश में कुल सीटें
भारत में संसद के दोनों सदनों में वर्तमान सीटों की कुल संख्या 788 है। इसमें लोकसभा की 543 निर्वाचित सीटें और राज्यसभा की 245 सीटें शामिल हैं।
- लोकसभा (निचला सदन)
कुल निर्वाचित सीटें: 543।
आरक्षित सीटें: कुल 131 सीटें आरक्षित हैं, जिनमें से 84 अनुसूचित जाति (SC) और 47 अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए हैं।
अधिकतम क्षमता: संविधान के अनुसार अधिकतम 550 सदस्य हो सकते हैं।
- राज्यसभा (ऊपरी सदन)
कुल सीटें: 245
निर्वाचित सदस्य: 233 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। नामांकित सदस्य: 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा विभिन्न क्षेत्रों (कला, विज्ञान, साहित्य आदि) से नामांकित किए जाते हैं।
राज्यवार प्रमुख सीटें
सर्वाधिक सीटें: उत्तर प्रदेश में लोकसभा की सबसे अधिक 80 सीटें हैं।
सबसे कम सीटें: लक्षद्वीप जैसे क्षेत्रों में केवल 1 सीट है।
किस राज्य में कितनी सीटें बढ़ेंगी राज्यवार
अप्रैल 2026 की नवीनतम रिपोर्टों और सरकार द्वारा साझा किए गए परिसीमन बिल 2026 (Delimitation Bill 2026) के मसौदे के अनुसार, लोकसभा की कुल सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इस नए फॉर्मूले के तहत, सभी राज्यों की सीटों में लगभग 50% की वृद्धि होने की संभावना है, ताकि किसी भी राज्य का मौजूदा प्रतिनिधित्व कम न हो।
प्रस्तावित राज्यवार लोकसभा सीटें (अनुमानित)
राज्य वर्तमान सीटें प्रस्तावित सीटें (अनुमानित) वृद्धि
उत्तर प्रदेश 80 120 +40
महाराष्ट्र 48 72 +24
पश्चिम बंगाल 42 63 +21
बिहार 40 60 +20
तमिलनाडु 39 58–59 +19/20
मध्य प्रदेश 29 44 +15
कर्नाटक 28 42 +14
गुजरात 26 39 +13
राजस्थान 25 38 +13
आंध्र प्रदेश 25 37–38 +12/13
केरल 20 30 +10
ओडिशा 21 31–32 +10/11
तेलंगाना 17 25–26 +8/9
असम 14 21 +7
पंजाब 13 20 +7
हरियाणा 10 15 +5
दिल्ली (UT) 7 11 +4
नोट: ये आंकड़े सरकार के वर्तमान प्रस्ताव और सूत्रों पर आधारित हैं। आधिकारिक संख्या परिसीमन आयोग की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही तय होगी।
मुख्य बिंदु
महिला आरक्षण: सीटों में यह बढ़ोतरी 33% महिला आरक्षण को लागू करने के लिए आवश्यक मानी जा रही है, ताकि सामान्य सीटों की संख्या कम न हो।
दक्षिण बनाम उत्तर: केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि सीटों को मौजूदा अनुपात में 50% बढ़ाया जाएगा ताकि बेहतर जनसंख्या नियंत्रण करने वाले दक्षिणी राज्यों का सापेक्ष प्रभाव कम न हो।
समय सीमा: इस योजना को 2029 के आम चुनावों तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
