नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) पर भाषण दिया। उन्होंने इस विधेयक को विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक और अनिवार्य कदम बताया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ऐतिहासिक अवसर: पीएम मोदी ने कहा कि यह विधेयक केवल एक कानून नहीं है, बल्कि देश की नीति निर्धारण प्रक्रिया में “मातृशक्ति” की भागीदारी सुनिश्चित करने का एक सुनहरा अवसर है।
पिछली गलतियों की सीख: उन्होंने जोर दिया कि जो गलती 25-30 साल पहले हुई थी (आरक्षण को टालने की), उसे अब दोहराना नहीं चाहिए। अगर यह पहले हो गया होता, तो आज देश की तस्वीर कुछ और होती।
श्रेय की राजनीति से ऊपर: प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें इस बिल का कोई श्रेय नहीं चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं क्रेडिट का ब्लैंक चेक दे रहा हूं, विज्ञापन देकर सबकी फोटो छपवाऊंगा,” बस इस बिल को सर्वसम्मति से पारित होने दें।
विपक्ष को सीधा संदेश: उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे राजनीति से ऊपर उठकर इस पर सहमति दें। उन्होंने तर्क दिया कि यदि विपक्ष इसका विरोध करता है, तो उन्हें (भाजपा को) राजनीतिक लाभ होगा, लेकिन यदि सब साथ चलते हैं, तो यह राष्ट्रहित में होगा।
निष्पक्षता का आश्वासन: परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के बीच उन्होंने 100% निष्पक्षता और किसी भी राज्य के साथ भेदभाव न होने की गारंटी दी।
विरोधियों को चेतावनी: उन्होंने यह भी कहा कि इस ऐतिहासिक कदम का विरोध करने वालों को आने वाले समय में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
विधेयक के मुख्य प्रावधान
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण।
यह प्रावधान परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू किया जाएगा।
