भोपाल। नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) के लागू होने से मध्य प्रदेश की राजनीति और सत्ता के ढांचे में कई बड़े बदलाव आएंगे। सबसे प्रमुख बदलाव यह है कि राज्य विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित हो जाएंगी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मध्य प्रदेश में होने वाले मुख्य बदलाव
विधानसभा सीटों में वृद्धि
प्रस्तावित संशोधनों और परिसीमन (delimitation) के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा की सीटें मौजूदा 230 से बढ़कर 345 होने की संभावना है।
महिला विधायकों की संख्या
विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण होने पर, प्रदेश में महिला विधायकों (MLAs) की संख्या बढ़कर 114 हो सकती है।

लोकसभा सीटों में बदलाव
मध्य प्रदेश की लोकसभा सीटों की संख्या 29 से बढ़कर 43 होने की संभावना है, जिनमें से 14 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी
यह बिल महिलाओं को केवल लाभार्थी से आगे बढ़ाकर निर्णयकर्ता (decision-maker) की भूमिका में लाएगा, जिससे नीतियों के निर्माण में महिलाओं का प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा।
कैबिनेट और शासन
महिला विधायकों की संख्या बढ़ने से भविष्य में मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल (Cabinet) में भी महिलाओं की भागीदारी और प्रभाव बढ़ने की उम्मीद है।
आरक्षण का आधार
कानून के तहत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों में से भी एक-तिहाई सीटें उन वर्गों की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
लागू होने का समय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की योजना के अनुसार, इस कानून को 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव से पहले प्रभावी तरीके से लागू करने की तैयारी है। इसके लिए परिसीमन की प्रक्रिया और जनगणना (2011 के आंकड़ों के आधार पर विचार) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इसके पहले कब—कब परिसीमन, बढ़ी सीटें
भारत में अब तक कुल चार बार परिसीमन आयोगों का गठन किया गया है। परिसीमन का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करना है।
कब-कब हुआ परिसीमन?
भारत में परिसीमन आयोग अधिनियमों के तहत निम्नलिखित वर्षों में आयोग गठित किए गए।
1952: 1952 के अधिनियम के तहत।
1963: 1962 के अधिनियम के तहत।
1973: 1972 के अधिनियम के तहत।
2002: 2002 के अधिनियम के तहत।
लोकसभा सीटों में वृद्धि का इतिहास
विभिन्न संशोधनों और परिसीमन के माध्यम से लोकसभा की सीटों में समय-समय पर बदलाव हुए हैं।
1952: पहले चुनाव के समय लोकसभा की 489 सीटें थीं।
1963: दूसरे परिसीमन के बाद सीटों की संख्या बढ़कर 520 से अधिक हो गई।
1973: तीसरे परिसीमन (31वें संविधान संशोधन) द्वारा सीटों की संख्या 525 से बढ़ाकर 545 कर दी गई थी।
2002: इस परिसीमन में 2001 की जनगणना का उपयोग किया गया, लेकिन सीटों की कुल संख्या नहीं बढ़ाई गई। केवल निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया गया था।
वर्तमान स्थिति और आगामी परिसीमन
सीटों पर रोक: 1976 में (42वें संशोधन) और फिर 2001 में (84वें संशोधन) लोकसभा और विधानसभा सीटों की कुल संख्या को वर्ष 2026 तक के लिए स्थिर कर दिया गया था।
अगला परिसीमन: संविधान के अनुसार, 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आधार पर नया परिसीमन किया जाएगा।
भविष्य की संभावना: चर्चाओं के अनुसार, 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 816 तक किया जा सकता है, ताकि महिला आरक्षण (33%) को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। कुछ अनुमानों के अनुसार यह संख्या 800 या उससे अधिक भी हो सकती है।
प्रमुख बिंदु
विधानसभा सीटों की संख्या भी संबंधित राज्यों की जनसंख्या के आधार पर परिसीमन आयोग द्वारा तय की जाती है, जो अधिकतम 500 और न्यूनतम 60 हो सकती है (कुछ राज्यों को छोड़कर)।
