Skip to content
AapTak

AapTak

सच, बेहिचक

Primary Menu
  • Home
  • NATIONAL
  • WORLD
  • MP/CG
  • POLITICS/ADMIN
  • BUSSINESS
  • SPORTS
  • LIFESTYLE
    • ENTERTANMENT
    • JOB
    • LIFESTYLE
  • Artical
Light/Dark Button
Live
  • Home
  • MP/CG
  • POCSO: 53% से अधिक बच्चे लैंगिक शोषण का शिकार: विशेषज्ञ
  • MP/CG
  • BHOPAL

POCSO: 53% से अधिक बच्चे लैंगिक शोषण का शिकार: विशेषज्ञ

aaptak.news28@gmail.com April 18, 2026
POCSO Act workshop in bhopal

—पोक्सो कानून को लेकर जज, वकील और विशेषज्ञों ने किया मंथन

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

भोपाल। POCSO Act: देश में 53 प्रतिशत से अधिक बच्चे किसी न किसी रूप में लैंगिक शोषण का सामना कर चुके हैं, जिनमें लड़कों की संख्या भी उल्लेखनीय है। हालांकि, अधिकांश मामलों में शोषणकर्ता परिचित या परिवार का सदस्य होता है, जिससे ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और सतर्कता और अधिक आवश्यक हो जाती है। पोक्सो अधिनियम बच्चों की सुरक्षा के लिए एक सशक्त कानूनी व्यवस्था है, किन्तु इसकी वास्तविक प्रभावशीलता तभी संभव है, जब इसे लागू करने वाले अधिकारी और स्वयंसेवक कानून की बारीकियों को समझते हुए पीड़ि़त बच्चों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएं।

यह बात शनिवार को राजधानी के एमपी नगर स्थित एक निजी होटल में आयोजित एक दिवसीय संयुक्त प्रशिक्षण वर्कशाप में सामने आई, जिसमें जज, वकील और विशेष विशेषज्ञ, पुलिस अधिकारियों और पैरा लीगल वालंटियर्स ने संबोधित किया।

गंभीरता से लागू हो कानून, तभी बच्चों की सुरक्षा संभव: जस्टिस अग्रवाल

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, भोपाल के सचिव एवं न्यायाधीश सुनीत अग्रवाल ने कहा कि पोक्सो अधिनियम बच्चों की सुरक्षा के लिए एक सशक्त कानूनी व्यवस्था है, किन्तु इसकी वास्तविक प्रभावशीलता तभी संभव जब गंभीरता से इस पर अमल हो। यह कार्यशाला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, भोपाल और बच्चों के साथ काम कर रही संस्था आवाज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई।

संवेदनशीलता और सतर्कता अधिक आवश्यक : दुबे

कार्यशाला में लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना तथा बाल लैंगिक शोषण के प्रकरणों में त्वरित, संवेदनशील एवं विधिसम्मत कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों की क्षमता को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया। इस दौरान आवाज संस्था के निदेशक प्रशांत दुबे ने बाल लैंगिक शोषण से जुड़े गंभीर तथ्यों को साझा करते हुए बताया कि 53 प्रतिशत से अधिक बच्चे किसी न किसी रूप में लैंगिक शोषण का सामना कर चुके हैं, जिनमें लड़कों की संख्या भी उल्लेखनीय है। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकांश मामलों में शोषणकर्ता परिचित या परिवार का सदस्य होता है, जिससे ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और सतर्कता और अधिक आवश्यक हो जाती है।

“सपोर्ट पर्सन” की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण

दुबे ने पोक्सो अधिनियम की पृष्ठभूमि, उसकी प्रमुख धाराओं, रिपोर्टिंग प्रक्रिया, धारा 39 के पालन, पीडि़त बच्चों के बयान दर्ज करने की विधि, पहचान की गोपनीयता तथा विशेष न्यायालय की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि बाल लैंगिक शोषण के मामलों में केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि पीडि़त बच्चों के मानसिक एवं भावनात्मक पुनर्वास के लिए “सपोर्ट पर्सन” की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, जिसकी नियुक्ति बाल कल्याण समिति द्वारा की जाती है।

बाल पीडि़तों के पुनर्वास पर की चर्चा

कार्यशाला में बाल कल्याण समिति भोपाल के अध्यक्ष धनीराम सिंह पवार, सदस्य मेखला श्रीवास्तव, वर्षा मीणा और अलंकार जैन ने भी सहभागिता करते हुए बाल पीडि़तों के पुनर्वास, समिति की भूमिका तथा पुलिस एवं बाल कल्याण समिति के बीच समन्वय के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने प्रारूप ‘क’ और ‘ख’ को सही तरीके से भरने की प्रक्रिया पर भी मार्गदर्शन दिया।

पुलिस अधिकारी, पैरा लीगल वालंटियर्स ने साझा किए अनुभव

कार्यशाला में पुलिस अधिकारी और पैरा लीगल वालंटियर्स ने अपने अनुभव साझा किए तथा अधिनियम से संबंधित व्यावहारिक प्रश्नों पर चर्चा की। सभी प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताया और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता जताई। आयोजनकर्ताओं ने बाल संरक्षण के क्षेत्र में सतत क्षमता निर्माण और जागरुकता बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम में आवाज संस्था की काशिफा मंसूरी, शिखा श्रीवास्तव, पवनरेखा बिसेन, रूपेश वर्मा और रोली शिवहरे मौजूद रहीं।

वायरल गर्ल मोनालिसा केस में बड़ा एक्शन, नकली बर्थ सर्टिफिकेट पर CMO नपे

पोक्सो एक्ट: देश में लैंगिग अपराध की स्थिति

भारत में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012, 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन शोषण, उत्पीड़न और अश्लील साहित्य से बचाने के लिए एक सशक्त कानून है। वर्तमान में इस अधिनियम की स्थिति और प्रभावशीलता को निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है।

  1. लैंगिक तटस्थता (Gender Neutrality)
    यह कानून पूरी तरह से लिंग-तटस्थ है, जिसका अर्थ है कि यह लड़के और लड़की दोनों को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है। हालिया न्यायिक व्याख्याओं (जैसे कर्नाटक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के विचार) ने यह स्पष्ट किया है कि महिलाएं भी इस अधिनियम के तहत आरोपी हो सकती हैं। कानून का उद्देश्य अपराधी का लिंग देखना नहीं, बल्कि बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
  2. कठोर दंड के प्रावधान
    अपराध की गंभीरता के अनुसार इस कानून में सख्त सजा का प्रावधान है।

न्यूनतम सजा: गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमले (Aggravated Penetrative Sexual Assault) के लिए न्यूनतम सजा को 7 साल से बढ़ाकर 10 साल और कुछ मामलों में 20 साल कर दिया गया है।

अधिकतम सजा: गंभीर मामलों में आजीवन कारावास और मृत्युदंड तक का प्रावधान है।

अश्लील सामग्री: बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री रखने या साझा करने पर भी 3 से 7 साल तक की जेल हो सकती है।

  1. रिपोर्टिंग और कानूनी प्रक्रिया

अनिवार्य रिपोर्टिंग: यदि किसी व्यक्ति को बाल यौन शोषण की जानकारी मिलती है, तो उसकी रिपोर्ट करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। रिपोर्ट न करने पर सजा हो सकती है।

सबूत का भार: इस कानून की एक बड़ी विशेषता यह है कि सबूत पेश करने की जिम्मेदारी आरोपी पर होती है, न कि पीड़ित बच्चे पर।

बाल-मित्र प्रक्रिया: जांच और सुनवाई के दौरान बच्चे को कम से कम मानसिक आघात पहुंचे, इसके लिए विशेष अदालतों (Special POCSO Courts) और बाल-मित्र प्रक्रियाओं का प्रावधान है।

  1. चुनौतियां और वर्तमान स्थिति
    सख्त कानून के बावजूद, इसके कार्यान्वयन में कुछ बाधाएं देखी गई हैं।

लंबित मामले: अदालतों में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। कानून के अनुसार न्यायिक प्रक्रिया एक साल के भीतर पूरी होनी चाहिए, लेकिन असल में इसमें देरी होती है।

जागरूकता की कमी: कानून प्रवर्तन एजेंसियों और समाज में जागरूकता की कमी अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।

दुरुपयोग की चिंताएं: हाल के वर्षों में झूठी शिकायतों (धारा 22 के तहत दंडनीय) और सहमति की उम्र (Age of Consent) से जुड़े मुद्दों पर भी कानूनी बहस तेज हुई है।

हाल के वर्षों में हुए संशोधन

यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम में हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण संशोधन और न्यायिक बदलाव हुए हैं।

पॉक्सो अधिनियम की महत्वपूर्ण धाराएं और सजा
इस कानून के तहत अपराध की गंभीरता के आधार पर सजा निर्धारित है।

धारा 4 (प्रवेशन लैंगिक हमला): इसके लिए सजा 7 साल से लेकर आजीवन कारावास और जुर्माना है।

धारा 6 (गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमला): इसमें 2019 के संशोधन के बाद सजा को बढ़ाकर न्यूनतम 20 साल से आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक कर दिया गया है।

धारा 8 (लैंगिक हमला): यौन इरादे से बच्चे को छूना इसमें आता है। इसके लिए 3 से 5 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।

धारा 10 (गुरुतर लैंगिक हमला): इसमें सजा की अवधि 5 से 7 साल तक है।

धारा 12 (यौन उत्पीड़न): यौन मंशा से की गई टिप्पणियों या इशारों के लिए 3 साल तक की सजा का प्रावधान है।

धारा 15 (चाइल्ड पोर्नोग्राफी): अश्लील सामग्री का संग्रहण करने या उसे ट्रांसमिट करने पर 3 से 5 साल की सजा हो सकती है।

हालिया प्रमुख संशोधन और न्यायिक फैसले (2019-2026)

मृत्युदंड का प्रावधान (2019): बच्चों के साथ जघन्य अपराधों के मामलों में अपराधियों को मौत की सजा देने का प्रावधान जोड़ा गया।

चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला (2024-25): सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बाल पोर्नोग्राफी को सिर्फ देखना या फोन में रखना भी अपराध की श्रेणी में आता है।

त्वरित न्याय के लिए विशेष अदालतें: वर्तमान में देश भर में 758 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (FTSCs) कार्यरत हैं, जिनमें 412 विशेष रूप से केवल पॉक्सो मामलों की सुनवाई करते हैं।

सहमति की आयु (Age of Consent) पर बहस (2026): जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से “रोमियो-जूलियट” जैसे प्रावधान पर विचार करने का आग्रह किया है, ताकि किशोर-किशोरियों के बीच आपसी सहमति वाले संबंधों को कठोर आपराधिक कार्रवाई से बचाया जा सके। वर्तमान में सहमति की उम्र 18 वर्ष है और इससे कम आयु में सहमति को अप्रासंगिक माना जाता है।

कानूनी प्रक्रिया में बदलाव

समय सीमा: एफआईआर दर्ज होने के 2 महीने के भीतर जांच और 1 साल के भीतर ट्रायल पूरा करना अनिवार्य किया गया है।

कठोर दंड (धारा 42): यदि कोई अपराध पॉक्सो और आईपीसी दोनों के तहत आता है, तो वह कानून लागू होगा जिसमें अधिक कठोर सजा का प्रावधान हो।

देश में कितने प्रतिशत बच्चे लैंगिग अपराध से पीड़ित

भारत में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों और विशेष रूप से लैंगिक अपराधों (Sexual Offences) के आंकड़े चिंताजनक हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और अन्य शोध संगठनों के अनुसार स्थिति इस प्रकार है।

कुल पीड़ित बच्चे: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक पुराने लेकिन व्यापक सर्वेक्षण (2007) के अनुसार, भारत में लगभग 53.22% बच्चों ने किसी न किसी रूप में यौन शोषण का अनुभव किया है [3, 4]।

पॉक्सो (POCSO) के मामले: 2023 की नवीनतम NCRB रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के खिलाफ होने वाले कुल अपराधों में से लगभग 38.17% मामले पॉक्सो अधिनियम (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) के तहत दर्ज किए गए हैं।

पंजीकृत मामलों की संख्या: वर्ष 2023 में पॉक्सो अधिनियम के तहत कुल 67,694 मामले दर्ज किए गए। इससे पहले 2021 में यह संख्या 53,874 थी, जो कुल बाल अपराधों का लगभग 36% थी।

अपराध दर: 2023 में बच्चों के खिलाफ अपराधों की दर प्रति एक लाख बाल जनसंख्या पर 39.9 रही, जो पिछले वर्षों की तुलना में बढ़ी है।

मुख्य चिंताएं और आंकड़े

लिंग आधारित अंतर: लड़कियों के पीड़ित होने की संभावना लड़कों की तुलना में काफी अधिक (लगभग 9 गुना) पाई गई है, हालांकि लड़के भी बड़ी संख्या में इन अपराधों का शिकार होते हैं।

पहचान वाले आरोपी: रिपोर्टों के अनुसार, अधिकांश मामलों (90% से अधिक) में अपराधी बच्चे के कोई परिचित, पड़ोसी या रिश्तेदार ही होते हैं।

सर्वाधिक प्रभावित राज्य: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बच्चों के खिलाफ अपराधों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है।

भारत सरकार ने इन अपराधों को रोकने के लिए 2012 में पॉक्सो (POCSO) अधिनियम लागू किया था, जिसके तहत 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति के साथ यौन शोषण को गंभीर अपराध माना जाता है।

About the Author

aaptak.news28@gmail.com

Administrator

Web News Portal

Visit Website View All Posts
Post Views: 0

Post navigation

Previous: महिला आरक्षण बिल पर घमासान, बैकफुट पर सरकार
Next: मायानगरी मुंबई से बड़ा होगा भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन

Related Stories

Screenshot_2026-07-22-23-04-46-70_7352322957d4404136654ef4adb64504
  • NATIONAL

बर्णवाल नए प्रशासनिक मुखिया, केंद्र ने अनुराग को बुलाया

aaptak.news28@gmail.com July 22, 2026
ucc in mp
  • BHOPAL

MP में UCC बिल पास, बदल जाएंगे शादी, तलाक और लिव इन से जुड़े कानून…

aaptak.news28@gmail.com July 21, 2026
prism jonson limited mankahari
  • NATIONAL

सतना में ट्रक ड्राइवरों का शोषण, 8 घंटे की जगह लिया जा रहा 12-12 घंटे काम

aaptak.news28@gmail.com July 21, 2026
  • क्रांति ने अपनी प्रतिभा के दम पर दुनिया में बढ़ाया भारत का मान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर, खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दे रही है। - 22/07/2026
  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव चंद्रशेखर आजाद नगर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव में होंगे शामिल
    - 22/07/2026
  • राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाना जागरूक नागरिक की पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारे विद्यार्थी देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माता हैं। लोकतंत्र को समझना, उसके मूल्यों को आत्मसात करना और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाना ही जागरूक - 22/07/2026
  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस की दी बधाई
    - 22/07/2026
  • श्री अशोक बर्णवाल मध्यप्रदेश के नए मुख्य सचिव नियुक्त
    मध्यप्रदेश शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (1991 बैच) के वरिष्ठ अधिकारी श्री अशोक बर्णवाल को प्रदेश का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा बुधवार को इस संबंध में आदेश जा - 22/07/2026
  • मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना समिति गठित
    प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत प्रदेश के चयनित जिलों में क्रियान्वित योजना की निगरानी एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य शासन ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय ''प्रधा - 22/07/2026
  • मुख्य सचिव की अध्यक्षता में भारत औद्योगिक विकास
    भारत औद्योगिक विकास योजना में प्रस्तावित परियोजनाओं के मूल्यांकन, अनुशंसा तथा योजना के प्रभावी एवं सुचारू क्रियान्वयन के लिए राज्य शासन ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति का गठन - 22/07/2026
  • जेंडर रेस्पोंसिव बजट की समीक्षा और निगरानी के लिए अंतर्विभागीय समिति का गठन
    राज्य शासन द्वारा जेंडर रेस्पोंसिव बजट की राज्य स्तर पर समीक्षा एवं निगरानी के लिए अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव महिला एवं बाल विकास की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति का गठन क - 22/07/2026
  • मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी कार्रवाई
    - 22/07/2026
  • नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0" अभियान को प्रदेशभर में मिल रहा जनसमर्थन
    - 22/07/2026

Recent Posts

  • बर्णवाल नए प्रशासनिक मुखिया, केंद्र ने अनुराग को बुलाया
  • आज की टॉप 10 खबरें-एक नजर
  • MP में UCC बिल पास, बदल जाएंगे शादी, तलाक और लिव इन से जुड़े कानून…
  • सतना में ट्रक ड्राइवरों का शोषण, 8 घंटे की जगह लिया जा रहा 12-12 घंटे काम
  • भारत में पहली डेंगू वैक्सीन QDENGA को मंजूरी, इस उम्र के लोग ले सकेंगे डोज

Recent Comments

  1. पेपर लीक के बाद अब किताबें भी लीक: कांग्रेस - AapTak on NEET-PG 2025 स्थगित, NBEMS को SC की मंजूरी का इंतजार
  2. Ptoagek on 18 लाख की नकली मुद्रा जब्त, बीबीए छात्र समेत 6 गिरफ्तार
  3. RAVI KHAVSE on 18 लाख की नकली मुद्रा जब्त, बीबीए छात्र समेत 6 गिरफ्तार

Archives

  • July 2026
  • June 2026
  • May 2026
  • April 2026
  • March 2026
  • February 2026
  • January 2026
  • December 2025
  • November 2025
  • October 2025
  • September 2025
  • August 2025
  • July 2025
  • June 2025
  • May 2025
  • April 2025
  • December 2024
  • July 2026
  • June 2026
  • May 2026
  • April 2026
  • March 2026
  • February 2026
  • January 2026
  • December 2025
  • November 2025
  • October 2025
  • September 2025
  • August 2025
  • July 2025
  • June 2025
  • May 2025
  • April 2025
  • December 2024

You may have missed

Screenshot_2026-07-22-23-04-46-70_7352322957d4404136654ef4adb64504
  • NATIONAL

बर्णवाल नए प्रशासनिक मुखिया, केंद्र ने अनुराग को बुलाया

aaptak.news28@gmail.com July 22, 2026
aaptak top 10 news logo new
  • Breaking News

आज की टॉप 10 खबरें-एक नजर

aaptak.news28@gmail.com July 22, 2026
ucc in mp
  • BHOPAL

MP में UCC बिल पास, बदल जाएंगे शादी, तलाक और लिव इन से जुड़े कानून…

aaptak.news28@gmail.com July 21, 2026
prism jonson limited mankahari
  • NATIONAL

सतना में ट्रक ड्राइवरों का शोषण, 8 घंटे की जगह लिया जा रहा 12-12 घंटे काम

aaptak.news28@gmail.com July 21, 2026
हमारे बारे में…
आपतक एक प्रमुख हिंदी न्यूज पोर्टल है। इसमें राजनीतिक—प्रशासनिक और एक्सक्लूसिव समाचारों को प्रमुखता दी जाती है। ट्रेंडिंग न्यूज, बिजनेस, रोजगार तथा तकनीक से जुड़ी अहम खबरों को भी महत्व दिया जाता है।

संपर्क:
संपादक: आर.बी. सिंह
मोबाइल: 9425168479
कार्यालय: Katara Hills Bhopal, MP

खबर एवं विज्ञापन के लिए संपर्क करें:
Email_id: aaptak.news28@gmail.com

  • Home
  • NATIONAL
  • WORLD
  • MP/CG
  • POLITICS/ADMIN
  • BUSSINESS
  • SPORTS
  • LIFESTYLE
  • Artical
  • Home
  • NATIONAL
  • WORLD
  • MP/CG
  • POLITICS/ADMIN
  • BUSSINESS
  • SPORTS
  • LIFESTYLE
    • ENTERTANMENT
    • JOB
    • LIFESTYLE
  • Artical
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.