भोपाल। अप्रैल 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश (MP) गेहूं की पराली (नरवाई) जलाने के मामले में देश में नंबर वन पर है। इसके बाद पंजाब और हरियाणा जैसे पारंपरिक राज्य आते हैं, जहां सबसे ज्यादा किसान पराली जलाते हैं। आंकड़ों की मानें तो देश में सबसे ज्यादा पराली मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में किसान जला रहे हैं। विदिशा से शिवराज सिंह चौहान सांसद है, जो फिलहाल केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ICAR के आंकड़ों के अनुसार, 1-21 अप्रैल 2026 के बीच गेहूं की पराली जलाने के मामलों में मध्य प्रदेश देश में नंबर-1 बन गया है, जहां देश की कुल घटनाओं का 69% (20,000 से अधिक) हिस्सा है। सबसे अधिक मामले विदिशा और उज्जैन जिलों से आ रहे हैं, जो पिछले साल के रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं
कुल हिस्सेदारी: इस सीजन में देश भर में दर्ज कुल मामलों में से लगभग 72% से 91% मामले अकेले मध्य प्रदेश से हैं।
दैनिक रिकॉर्ड: अप्रैल के मध्य में एक ही दिन में देश के 1,423 मामलों में से 1,091 मामले मध्य प्रदेश के थे।
5 साल का रिकॉर्ड: पिछले 5 वर्षों (2022-2026) में देश में हुई पराली जलाने की कुल घटनाओं का लगभग 50% (1.11 लाख से ज्यादा केस) अकेले एमपी में दर्ज हुआ है।
सबसे ज्यादा प्रभावित जिले
मध्य प्रदेश के कई जिले राष्ट्रीय स्तर पर पराली जलाने के “हॉटस्पॉट” बन गए हैं।
विदिशा: यहां सबसे अधिक (2,491) मामले दर्ज किए गए हैं।
नर्मदापुरम (होशंगाबाद): राज्य में दूसरे नंबर पर (1,705 केस)।
रायसेन: 2,179 घटनाओं के साथ शीर्ष जिलों में शामिल।
अन्य जिले: उज्जैन, सीहोर, और इंदौर में भी मामलों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है।
प्रमुख कारण
कंबाइन हार्वेस्टर का उपयोग: इसके इस्तेमाल से फसल के डंठल खेत में रह जाते हैं, जिन्हें अगली फसल (जैसे मूंग) के लिए खेत साफ करने हेतु जला दिया जाता है।
समय की कमी: किसान अगली फसल की बुवाई जल्दी करना चाहते हैं, इसलिए वे जलाने को सबसे सस्ता और आसान तरीका मानते हैं।
मशीनीकरण में कमी: पंजाब की तुलना में एमपी में पराली प्रबंधन मशीनों (जैसे हैप्पी सीडर) पर सब्सिडी और उपलब्धता कम है।
प्रशासन की कार्रवाई
बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने सख्ती बरतना शुरू कर दिया है:
जुर्माना: अब तक किसानों पर 25 लाख से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है।
FIR और प्रतिबंध: 50 से अधिक FIR दर्ज की गई हैं और पराली जलाने पर धारा 188 के तहत रोक लगाई गई है।
सरकारी लाभ पर रोक: कुछ क्षेत्रों में पराली जलाने वाले किसानों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित करने का भी निर्णय लिया गया है।
